शिक्षा- परास्नातक ( जैव प्रौद्योगिकी ) बी टी सी, निवास स्थान- आगरा, उत्तरप्रदेश,
लेखन विधा- कहानी लघुकथा गज़ल गीत गीतिका कविता मुक्तक छंद (दोहा, सोरठ, कुण्डलिया इत्यादि ) हाइकु सदोका वर्ण पिरामिड इत्यादि|

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भारत की सदा ही जय

भारत की सदा ही जय ***** भारत तेरे टुकड़े होंगे कहने वाले गद्दारो मातृभूमि माता सम होती इसको कैसे भूल गये.. अपनी माँ के टुक... Read more

गीतों में मिल जाउंगी

तन्हाई भी तनहा होकर आंसू आंखों में भर-भरकर रो पड़ती होगी बरबस ही सूनेपन से आहत होकर टूट-टूटकर कतरा-कतरा और सिसकते होंगे सपने ... Read more

तेरी बेरुखी

तेरी बेरुखी _________ ""तू अपने ग़म से आज़िज है मैं तेरे ग़म से अफ़शुर्दा तू है मशग़ूल औरों में मैं तुझ बिन अश्क़ में गुम हूँ... ... Read more

आपका सज़दा किया...

""" इक ज़रा सा अब्र का कतरा सिरहाने पर रखा.. और धनक़ का छोर लेकर के रिदा को बुन लिया.. ले शफ़क को संग की फ़लक की आराइश.. कुछ इ... Read more

तुम्हें खबर तो है न?

मेरी जिंदगी की किताब के हर वरक हर हरफ़ हर शिफ़हे पर तुम्हारी खामोश मौजूदगी मजबूत दरख़्त सा भरोसा मेरा तुम हो यहीं कहीं जिस्म तो द... Read more

वो "पहली राइड"

वो पहली राइड मैं तुम और बाइक सिनेमा को जाते सबसे लम्बा रास्ता पकड़कर मेंहदी - चूड़ी वाले हाथ कमर को घेरे चेहरे को छूती तुम्हार... Read more

लग गई किसकी नजर.....

अतुकांत रचना ******* " परत चढ रही है, अवसाद की, प्यार पर, पङ गयी किसकी नज़र, जो था गवाह मेरी अठखेलियोँ का, खो गया क... Read more

जाना है दूर

जाना है दूर बहुत दूर तुम्हारा हाथ थामकर जहां न नफरतें हों न टूटी हसरतें कहीं जहाँ तुम भर सको मुझे आगोश में महसूस... Read more

युंही....

आँखोँ की झील मेँ डूबे सपने मेरे , बरस जाते हैँ ,तकिये के सिरहाने.. ...पलक खुलते ही दूर तुम्हेँ पाती हूँ जब .. ...रिदा की सलवट जै... Read more

लग गई किसकी नजर.....

परत चढ रही है, अवसाद की, प्यार पर, पङ गयी किसकी नज़र, ... Read more

"माफ कर दो.." अतुकांत रचना

मैं..... कल तुम्हारे पीछे तुम्हारे कमरे में गई थी... तुम तो नाराज थे न सारी बातें करती रही तुम्हारे सामान से तुम्हारा बिस्तर... Read more

जब तुम नहीं हो (अतुकांत )

"जब तुम नहीं हो" ? ? ? ? कल तुम अपनी राह पर जाओगे साथ गुजारा वक्त याद आएगा जब किया प्रेम एक दूसरे से एक दूसरे की परवाह की आशा ... Read more

मन निर्विकार

निर्विकार निराकार एक स्वप्न साकार होता हुआ , तोड़ कर भ्रान्तियाँ , कर रहा क्रान्तियाँ , क... Read more

हां नारी हूँ

" मैं चपला सी तेज युक्त नभ तक धाक जमाऊँ आ सूरज, तेरी किरणों से अपना भाल सजाऊँ कभी धरा- गांभीर्य ओढकर मौन का काव्य सुनाऊँ ... Read more

बाल कविता प्यारी चिड़िया

चूं चूं चिड़िया आओ ना दाना रक्खा खाओ ना ???????? फुदक फुदक कर चलती हो तिनके देख मचलती हो ???????? नीड़ बनाती हो सुंदर सीखा कैसे... Read more

मुकरी

सब दिन पीछे पीछे डोले कभि कुछ मांगे कभि कुछ बोले डांटूं तो रो जावे नाहक ए सखी साजन? ना सखी बालक। तन से मेरे चुनर उङावे मेरे ब... Read more

क्या लिखूं

प्यारा भारत वर्ष लिखूं आजादी संघर्ष लिखूं जाति धर्म में देश बंटा कैसे मैं उत्कर्ष लिखूं ।।। शोषण अत्याचार लिखूं जीने का अधिका... Read more