Anju Gupta

Joined January 2017

Am a management professional with 20 years of rich experience. Working as a softskill Trainer Writing is my passion.

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खुद को बदलने की कशमकश

अक्सर और आदतन, निद्रा के आगोश में जाने से पहले, ले बैठती हूँ... दिनभर के लेखे - जोखे की किताब ! पर हरदम ही... दुनियादारी ... Read more

अच्छा लगता है...

इक खामोशी अक्सर फैल जाती है हम दोनों में कभी -कभी ... इक दूजे में गुम होना भी अच्छा लगता है !! तेरा इंतजार क्यों बन गया ... Read more

तू संग मेरे रहता है...

तेरे ख्यालों में... गुजरने लगे हैं, रात और दिन ! तू पास हो न हो, तू संग मेरे रहता है !! तेरे दीदार को... तरसने लगे हैं, शाम... Read more

क्या है कोई राम

क्या है कोई राम ? ? ? ***************** कितनी अहिल्या जीती जागती बनीं शिला हुई भावशून्य ! उसी वजह से... जो व्यापित सतयु... Read more

मर्यादा

मर्यादा क्यों मर्यादा की... चादर ओढ़े, दिन-रात यूँ ही... घुट -मर्यादा क्यों मर्यादा की... चादर ओढ़े, दिन-रात यूँ ही... घुट -... Read more

कविता : आजकल हम बेवजह मुस्कुराने लगे हैं

जिनको कभी थे हम नज़रंदाज़ करते, धड़कन बन दिल में वो समाने लगे हैं ! आजकल बेवजह हम मुस्कुराने लगे हैं !! बदलने लगा है कुछ अंदाज़ ... Read more

हाइकु : जर्जर काया

हाइकु जर्जर काया, इच्छाएँ खंडहर, जीने को मरे नम नयन, गालों के सूखे आँसू, पुकारें तुम्हें ! छायी बदरी, व्याकुल फिर मन,... Read more

हाइकु : जलूं न कैसे

आड़ी - तिरछी किस्मत की लकीरें समझूं कैसे !! मुठ्ठी में बन्द भविष्य है अपना बदलूं कैसे !! बादशाह हो तक़दीर के तुम पाओ... Read more

हाइकू : हैरान धरा

हैरान धरा, फसलों की जगह, मकान उगा ! सिमटे घन, जब रूठ धरा से, कृषक मरा ! छायी बदरी, व्याकुल फिर मन, गीला तकिया ! अंजु ... Read more

मेरी कविता

चहूँ ओर सूरज के घूमें धरती वैसे ही... हर रचना का केन्द्र तुम बन जाते हो ! हर लफ्ज, हर भाव समर्पित तुमको जाने - अंजाने... Read more

नवजीवन

आशंकित सी मैं थी व्याकुल... दर्द- वेदना से आकुल मिला चैन थमा सैलाब ! फिर... नवजीवन की गूंजी आवाज़ ! अजब अनुभूति नया अ... Read more

सपनों की महानगरी

देख शहर की ऊँची अट्टालिकाएँ, मस्ती भरा आलीशान जीवन लिए स्वप्न सुनहरे असंख्य करें गाँव से पलायन ! यथार्थ दिखे और सपने ... Read more

कैसी विडम्बना...

कैसी विडम्बना ! क्यों संवेदनहीन है बना समाज,,, हादसों के शिकार दर्द से कराहते लिए टूटती-उखड़ती साँसें उम्मीद से जब माँग... Read more

अक्सर दिखते हैं...

अक्सर दिखते हैं... लाल बत्ती पर... तो कभी फुटपाथों पर ! कभी आँसू लिए ... तो कभी आँसू पिए ! कभी नंगे बदन... तो कभी चिथड़ों से... Read more

तेरे बिन

बिन तेरे तेरी यादों में मुमकिन है... मैं जी जाऊँ बेखबर हूँ... ये भी हो सकता है पूरी तरह बिखर जाऊँ ! ढह रहा सपनों का घर ... Read more

नींदें चुरा के मेरी

नींदें चुरा के मेरी, चैन से वो सो गया है कल तक था दिल जो मेरा, अब उसका हो गया है !! उसे देखने की हसरत, बात करने की तमन्ना उसके... Read more

किस्मत

आरजू थी बस इतनी ....  बन दुल्हन तेरी मैं, तेरे घर में आऊँ   ll हँसते-खिलखिलाते, खुशियों से तेरा, घर-आँगन सजाऊँ  ll साथ ते... Read more

वक़्त-बेवक़्त तू याद आने लगा है...

छाने लगा फिर है, ख्वाहिशों का मौसम सरूर मुहब्बत का, सताने लगा है ! आलम क्या बताऊँ, दिल का मैं तुझको वक़्त-बेवक़्त तू याद आने लगा है... Read more

मेरी बिटिया

मेरी बिटिया घुटनों बल चलती, ठुमकती - थिरकती, कभी आँचल में छिपती, कभी कान्धे पर चढ़ती ! वो नन्ही परी पंख फैलाने लगी है.... मेर... Read more