कवयित्री हूँ या नहीं, नहीं जानती पर लिखती हूँ जो मन में आता है !!
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मानवता

1) दिल परिंदा, आज़ादी के दम पे, रहता ज़िंदा l 2) मन की आशा, देती हौंसला सदा, जीत जाने का l 3) एक विश्वास, सम्भव कर देता, ... Read more