कवयित्री हूँ या नहीं, नहीं जानती पर लिखती हूँ जो मन में आता है !!
Anjneetnijjar222@gmail.com

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यह ना सोचो

यह ना सोचो कि सोचने से सब हो जायेगा जब तक कुछ कर गुजरने की ठानोगे नहीं, कुछ नहीं हो पायेगा, वक़्त रेत बन कर हाथ से फिसलता जायेगा... Read more

करवाचौथ

जानती हूँ मैं, जानती हूँ,मेरे भूखा रहने से नहीं बढ़ेगी तुम्हारी उम्र, बरसों पढ़ी किताबों ने इतना तो सिखाया है, पर तुम्हारी प्रीत ... Read more

मुझमें भी इक जंगल है

मुझमें भी इक जंगल है, लहलहा रहे, अनगिनत पेड़, कुछ छोटे,कुछ बड़े, कुछ जंगली जो स्वछंद उगे और बड़े, कुछ आशाओं के फल लिए ताके आसमान... Read more

एहसास

क्यूँ कोई इतना खास हुआ जाता है क्यूँ किसी से इतना लगाव हो जाता है किसी के रोने से रोना, हँसने से हंसना आता है क्यूँ कोई इतना खास ... Read more

नाव है मंझधार में

गर नाव है मंझधार में, तो सुन ले ऐ नाविक! थाम ले पतवार हाथ में, रख हौंसला तू आगे बढ़, मत डर, तू मत डर , यह लहरें डराएंगी, आँखे द... Read more

मुझे

हर मौसम, हर दिन, हर लम्हा, लम्हों के हर पल में जीना पसंद है मुझे, ,, बारिश में, सर्दी की गुलाबी ठंड में, कुनकुनी धूप में टहलना पस... Read more

तू कहाँ है?

कहाँ हो तुम, की मानस ढूंढे तुझे यहॉं, वहाँ किसी ने ढूंढा तुझे मंदिर-मस्जिद में, तो किसी ने काबे-कैलाश में, मृग की कस्तूरी सा तू,... Read more

सपने

इन आँखों में सपने है कुछ नए से, कुछ विद्रोही से सपने, ढर्रे से अलग,लीक से हटकर, जो स्वीकारे नहीं जायेंगे, दिखा कर समाज का डर, ह... Read more

ऐ जिंदगी

अब कोई गिला नहीं तुझसे ऐ जिंदगी, लाख दुश्वारियां हो फिर भी प्यारी है तू, जो मिला मुझे वो लाख गुना बेहतर है औरों से, तेरी क्रूरता... Read more

मानवता

1) दिल परिंदा, आज़ादी के दम पे, रहता ज़िंदा l 2) मन की आशा, देती हौंसला सदा, जीत जाने का l 3) एक विश्वास, सम्भव कर देता, ... Read more

ज्ञान क्या है ?

ज्ञान सीमित नहीं किताबों तक ना ही है सीमाओं में बंधा बच्चे का पहला अक्षर है ज्ञान ज्ञान नहीं है अक्षरों की पहचान ज्ञान है दिव... Read more

छुट्टी का इतवार

आज छुट्टी का इतवार है सभी देर तक सोयेंगे औरत को छुट्टी पर भी नींद नहीं आती आज छुट्टी है, आज खिलाऊंगी कुछ खास आज ढंग से कर पाऊ... Read more

खाने में क्या बनाऊँ?

कुछ देर पहले ही तो सोच रही थी कि खाने में क्या बनाऊँ? हसरतों के चावल या ख्याबों की खिचड़ी बनाऊँ क्यों न दुआओं की सब्जी और उम्मीद... Read more

कुछ कमी हम में ही थी

कुछ कमी हम में ही थी, जो समझ न पाए दुनिया को, दुनियादारी को,चेहरों के पीछे छुपे सफेद चेहरों को, पीलापन लिए गंदमी रंगों को, दिलों और... Read more

कोई शाम गुजारूँ तुम्हारे साथ,

कोई शाम गुजारूँ तुम्हारे साथ, हसरत ही बन गयी है कुछ दिनों से, जो इच्छा है मेरी, व्यस्तताओं का रोना दोनों तरफ है, तुम्हारी तरफ भी हम... Read more

दिल परिंदा

दूर ख्यालों के आसमान में उड़ता दिल परिंदा आसमान में , उड़ता ये दिल परिंदा । दरिया सा बहता , झरनों से खेलता, चाहत का मारा नादान ... Read more

रंग मिट्टी के

रंग मिट्टी के है अनेक, एक से बढ़ कर एक मिट्टी खेतों की,अन्नपूर्णा है मिट्टी मूर्त की, माँ दुर्गा है मिट्टी घड़े की, शीतलता है ... Read more

प्रेम परिभाषा

मैंने प्रेम को अनुराग-विराग, आसक्ति-विरक्ति, मिलन-बिछोह से कहीं दूर बहुत दूर पाया मैंने देखा, मर्यादा के बंधनों में प्रेम व्यथ... Read more

तुझे क्या चाहिए ज़िंदगी?

तुझे क्या चाहिए ज़िंदगी? चंद लम्हे सुकून भरे दूर किसी हरयाले जंगल में जुगनूओं की टिमटिमाहट चा... Read more

मैं, मैं ही हूँ

मत समझो कि मैं कमतर हूं, शायद में सबसे बेहतर हूं। हां खुद को कभी साबित नहीं किया, जो किया अपनों के लिए किया। मुझ में भी भाव उमड़... Read more

तुम कुछ भी समझो मुझे

तुम कुछ भी समझो मुझे,राधा मत समझना सर्वस्व लुटा कर भी केवल प्रियतमा कहलाऊंगी तुम कुछ भी समझो मुझे,लेकिन मैं सीता नहीं हूँ लाँछन ... Read more

दुआ मांगते चलो

दुआ मांगते चलो , हर किसी की ख़ुशी की दुआ मांगते चलो, देखो जो किसी राहगीर को तो उसकी मंजिल की दुआ मांगते चलो, देखो जो किसी किसी विद्य... Read more

खामोशी

कितनी परतें कितने तह हैं ना तुम्हारी आँखों में भी बातों में भी कि जैसे तुम तुम नहीं कोई और हो या फिर वो जिसे देखा था फिरते... Read more

मैं नारी हूं

सब कुछ तो नहीं आता मुझे, पर थोड़ा-थोड़ा सब सीखा है। दक्ष नहीं हूं किसी काम में, थोड़ा-थोड़ा सब आता है। "अन्नपूर्णा" तो नहीं हूं,... Read more

क्या कठिन था ?

दूर रह कर देख लिया तुमने, क्या ज्यादा कठिन था ? प्रेम या घृणा, संयोग या वियोग वियोग महज रस उत्तपति रही कठिनता का पर्याय तो प्रे... Read more

कर्मठ कहाँ रुक पाता है,

कर्मठ कहाँ रुक पाता है, कर्मठ कहाँ रुक पाता है, राह है काँटों भरी, नंगे पाओं है चलना , जानते हुए भी चलता जाता है , कर्मठ कहाँ रुक प... Read more

घर बिखर जाता है,

घर बिखर जाता है, जब करने लगते है, दरकिनार छोटी छोटी खुशियों को, जब करने लगते है अनदेखा अपनों की भावनाओं को, जब करने लगते है मृगत... Read more

ढूंढ़ने से भी नहीं मिलते,वो गुजरे पल

ढूंढ़ने से भी नहीं मिलते,वो गुजरे पल, वो पुराने दोस्त कॉलेज के कैंटीन की चाय,वो दोस्तों की हाय-बाय, छोटी छोटी खुशियाँ मनाना, दिन ... Read more

सड़क

वो सड़क है जहाँ मोड़ है ढालान है आते जाते लोग हैं किनारों पर कहीं पेड़-पौधे कहीं घर-मकान हैं चलते हुए पाहिए हैं और मैं हूँ ... Read more

कैसी उधेड़बुन है

कैसी उधेड़बुन है ? सोचूँ क्या होता है , क्यों होता है? क्यों अक्सर मुझ संग होता है? क्या नाराज़ किया किसी देवता को मैंने या फलीभूत ... Read more

हो अँधेरा कितना भी घना

हो अंधेरा कितना भी घना हमें रोक सकता नहीं,चल पड़े जो कर्मठ,तो राह उजला हो न हो कोई फरक पड़ता नहीं है, है रास्ता वीरान, उबड-खाबड़,पत्... Read more