कवयित्री हूँ या नहीं, नहीं जानती पर लिखती हूँ जो मन में आता है !!
Anjneetnijjar222@gmail.com

Copy link to share

त्याग दो

त्याग दो, त्यागना पड़े तो उन तमाम सुखों को तुम दो त्याग, जो बेड़ियाँ बन कर पाँव में हैं पड़े, और बन कर रुकावट विकास की, रास्ते म... Read more

सोच मेरी

लगता है तुम्हें कि थोड़ी अलग है सोच मेरी हाँ मानती हूँ, चीजों को देखने का नज़रिया अलग है थोड़ा मेरा, तुम्हें तकलीफ़ है विरोध के ह... Read more

वो एहसास

वो एहसास कि ख़ास हो तुम, वो एहसास कि मेरे आसपास हो तुम, ज़िंदगी की भागदौड़ में, एक सकूँ भरा विश्राम हो तुम, थक कर हो जाऊँ चूर तप... Read more

ज़माने की नज़र में

ज़माने की नज़र में, एक गुज़रा हुआ कल हूँ मैं, अक्सर खोजती हूँ अपनी अहमियत मैं, ज़माने की नज़र में, अब थोड़ी बेपरवाह, बेफ़िक्री ह... Read more

तुम्हारी ज़रूरत

मुझे ज़रूरत नही, यक़ीन मानों, तुम्हें चाहने के लिए अब तुम्हारी ज़रूरत नही, कभी था वो वक़्त, जब इंतज़ार रहता था, तेरा इन नज़रों... Read more

रिश्ते

कुछ रिश्ते ज़िंदगी होते हैं दौड़ते भागते हैं ज़िंदगी बन कर साँस बनकर बदन में कभी तो कभी दौड़ते हैं रगों में लहू बनकर जी चाहता ह... Read more

आप

अपने अहसास की ख़ुश्बू से सरोबर कर जाते हैं आप, जब कभी मेरे ख़्यालों की गली से गुज़र जाते हैं आप, मैं खुली आँखों से देखती हूँ बस आप... Read more

माँझी

माँझी की धूल झाड़ दे, जो बीत गया उसे बिसार दे, अपनी उम्मीदों को इक नया परवाज़ दे, अतीत को कमज़ोरी न मान, उसे नया ही इक आग़ाज़ दे... Read more

याद

मेरे पास छोड़ जाओ, अपनी यादों के मौसम से निकाल कर, कुछ रुई के गोले से बादल, जो बरस जाए जब भी मैं चाहूँ, तेरी यादों में भीगना, क... Read more

मन मेरा

जलती धरती मन मेरा, हर पल अवसादों ने था घेरा, तपन दुःख की बढ़ती थी जाती, कोई ठौर न इसका न कोई रैन बसेरा, तलाश कर रहा था राहत डे... Read more

ग्रहण

ग्रहण लग जाता है उन तमाम सपनों पर उम्मीदों पर उमंगों पर जो आती हैं अँज़ुरी भर सिंदूर और काले दानों के साथ जब हिस्से आती है, ... Read more

इक कोना

इस पूरे कुल ज़हान में, मेरे पास कहने को ख़ुद का इक अदद कोना भी नही है, आख़िर कब तक इस ज़हान में भटकूँगी मैं बिना किसी अपने कोने के... Read more

बंधन २

सही गलत की परिभाषा अपनी-अपनी सोच है। नियम निर्धारण एवं प्रति पालन मानव की खोज है। स्वच्छंदता पर लगाम के नाम पर ये परतंत्रता के बंध... Read more

बंधन

सही-ग़लत, ग़लत सही की परिभाषा, किसने बनाए नियम, और इन नियमों की भाषा, बंधन महज़ मानने भर से सिर चढ़े, या ज़बरदस्ती थे सब पर मढ़... Read more

बेनिशाँ

बेनिशाँ है तेरा अहसास, मगर बहुत गहरा है, कहीं दूर कहीं अंदर तक, तू मुझ में ठहरा सा है, अक्सर छिटक कर, ज़हन से, दिमाग़ से, कोश... Read more

एक वही था

एक वही था, जो मेरा हो कर भी मेरा नही था, जो था जुगनू सा, जिसके साथ होने से, अँधेरा भी अँधेरा नही था, जो था चाँद सा, चमकता था म... Read more

नया दिन

देखो दिन नया निकलता है, वक़्त नए रंग में ढलता है, देखो दिन नया निकलता है, सुबह का सूरज आशा की किरण बन, दिल में उतरता है, देखो द... Read more

दो किनारे

एक इस छोर तो एक उस ओर, नदी के दो किनारे, चुपचाप निहारते, दूर से इक दूजे को, एकटक-एकठौर, दोनों चाहतें हों जैसे, कि हो जाए वो कि... Read more

शक्ल दिखाने आए हो ?

शक्ल दिखाने आए हो महज़ या हमें फुसलाने आए हो, यह पहली बार तो नही, जब बहलाने आए हो, आते हो, हर पाँच साल में एक बार, हर बार झूठ... Read more

नदी

दूर कहीं दूर, जा सोचा मैंने, शांति चाहिए, खोजूँ उसे, कुछ दूर इस शहर से चलूँ, शहर के पार, था एक सुनसान जंगल, बहती थी इक शांत न... Read more

माँ की याद

तब तुम बहुत याद आती हो माँ, जब सुबह से शाम तक काम करती हूँ मैं, काम कर कर के थोड़ा थक जाती हूँ मैं कब सुबह से रात होती है, जान न... Read more

हस्ताक्षर

औरत की बेफ़िक्री, चुभती है अक्सर हर किसी को, औरत की हँसी, अक्सर बेपरवाह सी लगती है हर किसी को, औरत का नाचना, अक्सर बेशर्म होना ... Read more

सुख

सुख तो बस इतना है, जब पा लेने की चाहत ख़त्म हो जाए, मन भर जाए अंदर की शांति से, और मोह-माया से ऊपर उठ जाए, जब टूट जाए यह बंधन मा... Read more

आस

गिरे गर टूटकर शाख से पत्ते, तो मिट्‌टी में मिल ही जाते हैं, गुज़रे जो दिन वो लौटकर, वापिस कभी नही आते हैं, रिश्तों को दोनो हाथ... Read more

क्या हुआ गर?

क्या हुआ गर? जो साथ न तेरा कभी मिला क्यूँ इतनी सी बात पर हो मुझे गिला क्या हुआ गर? जो साथ चल न पाए हम कभी, कहाँ साथ साथ चल पाते... Read more

साथ

साथ वही है, जो खड़ा तुम्हारे साथ नही, बल्कि खड़ा तुम्हारे पीछे है, जिसके हाथों में तुम्हारा हाथ नही, बल्कि कंधा तुम्हारा, उसके ... Read more

शब्द

इतने शब्द कहाँ से लाते हो तुम? कैसे बुनते हो ये ताना-बाना? किस्सों की चादर कैसे बिछाते हो? ये गीत-ग़ज़ल के तकियों पर कैसे ख़्वा... Read more

अभागे

पृथ्वी घर हम सबका, शायद, क्या सच में? हम सबका घर, पर कुछ थे, जो थे आभगे, जो शायद हम जैसे नही थे, मनुष्य नही थे, ढोर की तरह... Read more

विदा किया

विदा किया, जा तुझे विदा किया, जिस तरह पंछी दे देते हैं विदा, नही रखते हैं कोई अपेक्षा जिन्हें देते है जन्म, बिना किसी स्वार्थ क... Read more

सपना

जानती हूँ मैं , बहुत कुछ है खोया, फिर भी हार कहाँ मानी मैंने, हर रोज़ एक नया ही सपना है बोया, रोज़ एक एक सपने का क़द बड़ेगा, ... Read more

पिशाचनी

सुबह सुबह मँजुला अपनी बेटी को लेकर काम पर आई, इतनी सुबह उसे देख कर कोफ़्त तो हुई मुझे, पर बच्ची को देख कर थोड़ी हिचकिचाई, जल्दी ज... Read more

मेरी क़ीमत

घर लौटते वक़्त, चलता है दिमाग़ में, चाबियों का गुच्छा, बाहर बैठा मेरा कुत्ता, बिजली का आन-ऑफ़ स्विच, और पानी का आना न आना, सब ... Read more

जगाना

दिखा कसाईखाने के दबड़े में, इक मुर्ग़ा, बेबस हालातों में, लाचार मुर्ग़ा, पंजे मुड़े हुए, पंख टूट कर बिखरे, तो कुछ जुड़े हुए, इस... Read more

वही लड़कियाँ

वही लड़कियाँ, केवल वही लड़कियाँ, जो देखती हैं खिड़कियाँ खोल कर खुले आसमान को, झाँकती नही हैं दरवाज़ों की दरारों से, केवल वही लड़... Read more

आख़िरी बैंच

वह बच्चे हाँ वही बच्चे, जो बैठते हैं कक्षा की आख़िरी बैंच पर जिनके हाथों की मुठ्ठियों में भरी रहती है दुगनी आज़ादी जो गले में बा... Read more

बिंदास लड़कियाँ

हाँ इस शहर की थी हम बिंदास लड़कियाँ लोग देखते हमें, आहें भरते पर औरों को नसीहत करते इनकी तरह मत होना, हाँ,हम में होने जैसा था ही... Read more

ख़ामोश मत रहो

ख़ामोश मत रहो, जब लगे तुम्हें कुछ ग़लत, तो सवाल उठाओ, अचानक से जब भर जाओ, ख़ामोशी से अंदर तक, चीख़ो, चिल्लाओ और शोर मचाओ, मत ... Read more

सूरजमुखी

प्रेम के साथ जोड़े जाते हैं अक्सर, गुलाब के फूल, सुर्ख़ लाल रंग लिए है एकाधिकार प्यार का, गुलाब की ही तरह, तभी अचानक नज़र पड़ती ... Read more

इतना मुश्किल भी नही

इतना मुश्किल भी नही, आसानी से मंज़िलों को पा जाना, और मुस्कुराना, सच मानो, इतना मुश्किल नही है, बस एक ही बात है मन को समझाना, ... Read more

सवाल-जवाब

एक सवाल और कब तक? साथ रहोगी या दोगी साथ मेरा, मैं इक मीठा छलावा बन, ठगता रहा हूँ तुझे सदा, मैंने फूल दिए, तुमने बग़ीचा सजा दिय... Read more

मेरा हिस्सा

सृजन का शायद कोई नियम रहा होगा, तभी तो विरोधाभास अस्तित्व में आया, आदम और हव्वा बन अवतरत हुए जब हम, तो कोमलता का पर्याय बनी मैं, ... Read more

कब तक

और कब तक? साथ रहोगी या दोगी साथ मेरा, मैं इक मीठा छलावा बन, ठगता रहा हूँ तुझे सदा, मैंने फूल दिए, तुमने बग़ीचा सजा दिया, दिया... Read more

कभी उदास मत होना

कभी उदास मत होना, इस जीवन पथ पर कभी जाए अगर हाथ छूट, किसी का साथ होना, भ्रम मात्र है, छलावा है, दुनियादारी महज़ दिखावा है, मैं ... Read more

क्यूँ इनके पीछे पड़ी है?

क्यूँ इनके पीछे पड़ी है? अनहोनी तुझे कौन रोके, कौन तुझे समझाए, क्यूँ यह चीथड़े संभाले मलिन लोग, अभावग्रस्त, अव्य्व्स्थाओं के मार... Read more

चाँद

चाँद मशहूर है, ज़माने में जो हर रोज वादा खिलाफी करता है। कभी रुप बदलता है। तो कभी झरोखे में छिपता है। पर क्यों न कोई ज़माने... Read more

तू ही बता ज़िंदगी

तू ही बता ऐ ज़िंदगी, मैं तुझको अब क्या लिखूँ, घाव का मरहम लिखूँ या जीत का परचम लिखूँ, धूप में एक छांव लिख दूं या पुराना गांव लिख ... Read more

ज़िंदगी है आपसे

ज़िंदगी है आपसे, घर, घर लगता है आपसे, आपके अनुभव की छांव से, महकती है इस जीवन की फुलवारी, हाँ , माँ-बाबूजी आप ही से ज़िंदगी है... Read more

वहम था मेरा

वहम था मेरा, कि दिखाई देता है तुम्हें, सुनाई देता है तुम्हें, पर सच में यह वहम था मेरा, तुम पढ़े-लिखे वाइट collared लोग, तुम्... Read more

रात

रात ठहर गयी है मुझमें गहरी काली स्याह , होती जा रही स्याह दर स्याह, छटपटाहट बढ़ती है जाती, दिन प्रतिदिन हर दिन, पर अँधेरा है जो... Read more

जीवनशैली

दवा की ज़रूरत न पड़े गर दें हम ख़ुद पर थोड़ा ध्यान, सुधारें अपनी जीवनशैली, सुधारें अपना खान-पान, सूरज के आने से पहले, उठ जाएँ औ... Read more