Anjali A

Joined November 2018

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बस एक औसत औरत हूं मैं

यूं ही नहीं हर मोड़ पर हूं मुस्कुराती मैं दर्द‌ की मार से खुद को बनाती हूं मैं जब ठहर जाता मेरा सारा जहां वहां नदिया से हौसले बह... Read more

जीवन नियम

स्वाभिमान जरा बढ़ जाए अहम कहलाता है स्वाभिमान कम हो तो हर कोई धिक्कार लगाता है अहम को त्याग दो ये चला जायेगा जरा तरक्की करी... Read more

जीवन नियम

स्वाभिमान जरा बढ़ जाए अहम कहलाता है स्वाभिमान कम हो तो हर कोई धिक्कार लगाता है अहम को त्याग दो ये चला जायेगा जरा तरक्की करी... Read more

हां मैं स्त्री हूं

नीले नभ में अवतरित एक अभिव्यक्ति हूं मैं जल में शोभित एक जलपरी हूं मैं मुसकुराते हुए पुष्प की कोमलता हूं और उस वीर पुरुष के धनु... Read more

मां मेरा संबल

थक कर उदास यूं ही बैठी थी आज मां की बहुत याद आ रही है मां जो लौरी सुना रही है आंचल में मां के मुझे गहरी नींद आ रही है मैंने ... Read more