Anil Mishra Prahari

Patna

Joined August 2019

He hails from Patna but presently serving in a reputed company in Ludhiana. He did his post graduation in Economics and also did diploma in Materials Management. He has published two poetry books naming ‘Prahari’ and ‘Rahi Chal’. Prahari is written on the bravery of our soldiers and on other social issues whereas Rahi Chal is a motivational book. Both books are available on various online retailers such as Amazon, Flipkart, BooksCamel and so on. EBooks are also available.

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सुन्दर तन।

तन धो - धो पावन करे मन को करे न कोए सुन्दर तन किस काम का मन जो पापी होए। अनिल। Read more

न मंजिल मिली।

दिखाके गगन के चमकते सितारे सलीके से खुद को छले जा रहे हैं, न मंजिल मिली न पता कोई इसका न जाने कहाँ हम चले जा रहे हैं। अनिल... Read more

एकता।

अगर यही है तेरी चाहत तोड़ूँ पर्वत की छाती, बिजली बन मैं कड़कूँ नभ में चलूँ चाल भी मदमाती। हो और... Read more

धधकी ज्वाला में।

धधकी ज्वाला में जब लोहा गलता है नये रूप में भाग्य तभी तो ढलता है, जो अपने को पतझड़ तक पहुँचा न सका वृक्ष कहाँ वह डाली - डाली फल... Read more

बेरोजगारी।

बेरोजगारी नाम है। फैला चतुर्दिक भुज मेरा दुर्दिन दुलारा, अनुज मेरा, सत्ता हमारी जगत् पर गृह हर नगर, हर ग्राम है। ... Read more

हार सहज स्वीकार नहीं है।

यह कैसी है घिरी निराशा ? भटक रहा तू दर- दर प्यासा, बाधा अडिग खड़ी पथ होती सागर ... Read more

मुक्तक

फेर गया है चाँद हमारे सपनों पर आँखों का पानी रूप सलोने, मदिर, मनोहर चेहरे ने की ये नादानी! Read more

मुक्तक

वह कैसी तलवार कि जिसमें धार नहीं है कौन कहेगा सिन्धु जहाँ मँझधार नहीं है, सिर्फ ताप के लिए जले वह ज्वाला कैसी आँखों से न ब... Read more

गुरूर।

हममें - तुममें गुरूर न होता यह फासला जरूर न होता। अनिल। Read more

गुरु वंदना।

गुरु का कर वन्दन, रज चंदन कर गुरु का सम्मान, हरता तम, पथ आलोकित कर करता गुरु कल्याण। ज्ञान अलौकिक भरता पशुता का होता स... Read more

गजल

वो तेरी हर बात का जवाब रखते हैं सुना कि पहलू में आफताब रखते हैं। उन्हें जानना है तो उनके दिल में झाँक असली चेहरे... Read more

मुक्तक

सूखी जमीं पर मेघों को गरजते देखा समंदर में जाकर उन्हें बरसते देखा, मेरे शहर में झुग्गी-झोपडी की कमी ... Read more

नन्हीं - सी प्यारी गौरैया।

नन्हीं - सी प्यारी गौरैया। फुदक - फुदककर चुगती दाने चूँ-चूँकर गाती मृदु गाने, घर - आँगन है रैन - ... Read more

मदमस्त पवन।

मदमस्त पवन। खुशबू है साँसों में तेरी कानन, उपवन करते फेरी, किन फूलों से गंध चुराकर मुकुलित कलियों से टक... Read more

यह सागर कितना प्यासा है।

जिसको जितना मिलता रत्न और अधिक का करता यत्न, अगणित नद पीकर सागर की बुझती नहीं पिपासा है। यह सागर कितना प्... Read more