Anand Kumar

280, NIJAMUDDINPURA, MAUNATH BHANJAN, MAU, 275101, UP

Joined January 2018

Journalist

Books:
No

Awards:
No

Copy link to share

हां मैं गांधी हूं, मैं मरा नहीं हूं...

मेरी कलम से... हां मैं गांधी हूं, वही गांधी, जिसने तुम्हें, आजादी दिलाई थी, अंग्रेजों से फिर भी, मार दिया गया मैं, अपने ही ... Read more

दोनों तो उलझे थे, शब्द व स्नेह के बीच...

शब्द, कहां गई हूं मैं, कहीं तो नहीं, यहीं हूं, आस-पास तुम्हारे, हां मित्र-अमित्र में, खींच गई हैं लकीरें, यह सच है, लेकिन य... Read more

दोनों तो उलझे थे, शब्द व स्नेह के बीच...

शब्द, कहां गई हूं मैं, कहीं तो नहीं, यहीं हूं, आस-पास तुम्हारे, हां मित्र-अमित्र में, खींच गई हैं लकीरें, यह सच है, लेकिन य... Read more

व्यंग्य - चाय-ना बैंक...

फिर देशी विदेशी की, बात उड़ चली। सरकार चायना बैंक, भारत में खोलेगी, यह आवाज उड़ पड़ी, विपक्षी सत्ता पक्ष पर, जोर-जोर बिफर रहे, र... Read more

संस्कृति तुम कहां हो...

संस्कृति तुम कहां हो, क्या कहा, संस्कृति की हत्या हो गयी, अरे चुप, ऐसे कैसे हो सकता, अभी तो, टेलिविजन पर, खूब तेज, गप्पे हांक... Read more

(नींद बहुत जल्दी आती है)

मेरी कलम से... आनन्द कुमार मेरी तबियत नासाज है, या वह अब दिल में नहीं रही, बिस्तर पर जाते ही, अब नींद बहुत जल्दी आती है । Read more

प्लीज पापा, मुझे अठ्ठाहस दो ना

पापा देखो ना, मां मुझे, जन्म देना नहीं चाहती, पापा मां को, समझाओ ना, मां मुझे गर्भ में ही, क्यों मारना चाहती। पापा आप दोनों ... Read more

यह कलयुग की सरकार है

मेरी कलम से... आनन्द कुमार मौका था, दस्तूर था, एफडीआई का विरोध था, गानों के बोल थे, घूमें गोल-गोल थे, देश प्रेम की बात थी, ... Read more