अमृता मनोज

शहडोल

Joined September 2017

समाजीक कार्य कर्ता

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सहेलियाँ

मेरी कलम से... friendship day special * बचपन वाली सहेलिया* दिन बीते, समय गये.. बचपन गये, बचपने गये.. गई हँसी और ठिठौलीय... Read more

एक था बचपन

बचपन की याद मे लिखी मेरी कविता✍ 👭एक था बचपन👬 बचपन के दिन भी क्या दिन थे, कभी खेला,तो कभी मौज मेलों के द... Read more

मै पुरूष बोल रहा हूँ

# मैं पुरूष बोल रहा हूँ# मैं पुरूष बोल रहा हूँ.. दिल का मर्म खोल रहा हूँ.. मैं पुरूष बोल रहा हूँ.... बचपन से सब यही सिखाते..... Read more

अनाथ

##अनाथ## जन्म तो मैंने भी लिया था *माँ* के कोख से... आसमान से ना आ टपकी थी.... फिर जाने क्यो रुठी माँ मुझसे... और किसी "अनाथालय... Read more

बेटी

#बेटी# माँ मै हू एक नन्ही किरण तेरे कोख की.. मै ही तो हू तेरा वजूद.. तूझमे ही तो मै हू समाई,तू ही तो है मेरी परछाई.. फिर क... Read more

डरता बचपन?

सहम जाता हूँ माँ जब "आँचल" से तेरे दूर होता हूं.. एक रूह सी काप उठती दिल मे जब आँखों से तेरे ओझल होता हूँ... अपने दिल की धडकनों ... Read more

सूना आँगन सूनी कोख

उसके गम को क्या कहेगें सीने पर रखा पत्थर है.. नीत झर झर बहते आँसू है सूना आँगन है सूनी कोख.. दिल मे छूपी एक न्नही परी खिलखिला कर... Read more