Sarfraz Sam

सिवान (बिहार)

Joined November 2018

ना मैं कवि हूँ ना मैं लेखक!
एक साधारण-सा इंसान हूँ जिसे लफ़्ज़ों को सजाना अच्छा लगता है।
हमारी लेखणी पसंद आए तो अपना प्यार जरूर दीजियेगा।

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माँ

माँ:- रातों को जाग कर उसने, हमें सुलाया है, खुद भूखे रह लिया, लेकिन हमें खिलाया है, धूप में खड़ी रही है माँ, सारी उम्र पिता बन कर... Read more

"एक आग खुद में लगाओ तो"

एक आग खुद में भी लगाओ तो, अपने अंदर के 'रावण' को जलाओ तो, शहरों को जला के क्या मिलेगा? अहंकारों को आग लगाओ तो! हर बार प्रह्लाद... Read more

"हैवानियत में सियासत"

तुम फैसले का इंतज़ार करते रहना वो हर रोज़ बलात्कार करता रहेगा, तुम धर्म की सियासत में उलझे रहना वो बेटियों की तिज़ारत करता रहेगा। ... Read more

"एक तू ही सच्चा मिला"

एक तू ही सच्चा मिला, जो कभी हमारा नहीं था, वरना लोग तो अपने होकर भी अपने नहीं होते। कुछ ऐसे भी मिले हैं हमदर्द यहाँ, जो अपनों क... Read more

"माँ, मैं वापस घर आना चाहता हूँ।"

भाग-दौड़ की इस दुनिया से थोड़ा सुकून पाना चाहता हूँ, माँ, मैं वापस घर आना चाहता हूँ। यहाँ एयर-कंडीशनर रूम है, पर वो सुकून नहीं... Read more

"रुला दिया"

रोया करते थे अक्सर, जिनको खोने के डर से, आज फिर उनको पाने की चाहत ने रुला दिया, माँगते रहे जिन्हें, ता-उम्र दुआओं में, आज फिर... Read more

"होली आ गई"

लेकर खुशियों का पैग़ाम फिर होली आ गई, रंगने मोहब्बत के रंग में, फिर होली आ गई। उड़ेगा गुलाल, रंगों की पिचकारी चलेगी, हरा, लाल, ... Read more