Amber Srivastava

Joined September 2017

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आँखे शर्मिंदा है।

मरते ज़मीरो को देख आँखे शर्मिंदा है, नापाक सही किरदार मेरा ज़िन्दा है। फ़स जाता है परिंदा मासूम सा कोई, लगाते किस हुनर से जो ये फं... Read more