Amber Srivastava

Bareilly (UP)

Joined January 2017

लहजा कितना ही साफ हो लेकिन,
बदलहज़ी न दिखने पाए,
अल्फ़ाज़ों के दौर चलते रहें,
ये सिलसिले कभी ना रुकने पाएं,
कोशिश यही रहेगी मेरी,
कि दिल किसी का ना दुखने पाए।

बस इसी विचारधारा के साथ मैं साहित्यपीडिया पर अपनी कविताएं और लेख लिखने का प्रयास करूंगा।

Email- amber.srivastava84@gmail.com

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एक प्रेम सूफियाना सा।

ना दर्जा देना प्रेमिका का, ना करना आपसे विवाह है, आपके प्रति चंद अल्फ़ाज़ मेरे, इस अनकहे प्रेम की राह है, ना बंधन है कोई नाम का... Read more

डोर।

ना सुनाई देती है आहट कोई, ना होता है कोई शोर, कभी-कभी इस जीवन में यूँ ही, बंध जाती हैं कुछ डोर, बेनाम रिश्तों का दुनिया में, ... Read more

अलगाव-मजबूरी से दूरी बेहतर।

अलगाव, इस शब्द का मतलब ये बिल्कुल नहीं की आप लोगों से मुंह मोड़ लें या विमुख हो जाएं, इसका मतलब ये है कि आपकी तरफ से आप दूसरों को यह... Read more

समझिये जनाब।

कभी-कभी ख़ामोशी के भी, समझने चाहिए इशारे जनाब, जब अंदाज़ होने लगे नज़रअंदाज़, तो ख़ुद ही हो जाइये किनारे जनाब। Read more

अंबर।

काश दूर कहीं ये अंबर, नीले अंबर में खो जाए, धरती पे मौजूद ये अंबर भी, नीले अंबर सा हो जाए, निश्चित है इस अंबर का भी, एक न एक ... Read more

मायूसी से मुस्कान तक-सन 2013

एक दिन था बहुत मायूसी भरा, आज फिर बजता एक साज़ है, ठुकराने चला था उस जीवन को मैं, जिस जीवन पे मुझको नाज़ है, उदास वो दिन बन... Read more

एक तरफा संवाद।

एकतरफा चलते संवादों में, मैं कब तक कुछ कह पाऊंगा, आप हाथ तो बढ़ा कर देखिए जनाब, मैं हमेशा साथ निभाऊंगा, ना होगा मुझसे अनादर कभी,... Read more

रंग-ए-दुनिया।

ज़िंदा नज़र आती ये दुनिया सारी, एक मुर्दों की बस्ती है, क्यों उलझता तू बातों में उनकी, बातें ही जिनकी सस्ती है, ना कर भरोसा दुन... Read more

एक धागा मित्रता का।

जिस जगह से नहीं लगाव कोई, उस जगह की और मैं मुड़ने लगा, बस यूं ही अचानक मैं मिला था तुझसे, फिर तुझसे मैं जुड़ने लगा, बातों के साथ... Read more

मुरादाबाद और लाॅकडाउन।

कुछ ही महीने हुए थे कि मेरा छोटा भाई देहरादून से मुरादाबाद आ गया और अपनी पत्नी और बेटी के साथ मानसरोवर कॉलोनी में रहने लगा,मैं सिर्फ... Read more

आत्मविश्वास।

माना कि वक्त बलवान है, पर इंसान तू भी तो आम नहीं, वक्त भी ये माने एक दिन, कि परेशानियों से तू परेशान नहीं, वक्त चाहे जितना डरा... Read more

कभी कहीं।

कई बार सुना आज माना है, जीवन एक बहती धारा है, कभी कहीं है बेबस बहुत, तो कहीं मौजूद कोई सहारा है, कहीं सुना कि काबिल है, कहीं ... Read more

संसार-सागर।

जीवन एक चढ़ाई है, क्या ख़ूब लगते हैं ,इस के नजारे, सुख-दुख है एक घटा बादल की , दोनों ही हैं ये साथी हमारे, मुश्किलों में भी मु... Read more

कहानी एक कविता की।

26 अप्रैल 2017, इस शाम को कुछ ऐसा घटित हुआ जिसका कहीं न कहीं मुझे कब से इंतज़ार था, बाइज़्ज़त एक महिला के लिए कविता के रूप में अपनी... Read more

ओझल।

कलम उठती नहीं कुछ लिखने को, आज लिखने का फिर भी करता दिल, जीवन में थे कुछ लोग भी ऐसे, दिल कहता उनसे जाके मिल, कुछ तो अभी भी साथ... Read more

झलक।

एक ऐसी शख़्स हैं जीवन में, जो अक्सर नज़र आ जाती हैं, कुछ तो ऐसी बात है उनमे, जो एक झलक से ही भा जाती हैं, ना बात कोई ना मुला... Read more

जीवन।

कभी पल ख़ुशियों के मीठे-मीठे, कभी ज़हर का कड़वा घूंट दिया, कोई शिकायत तुझसे नहीं, ऐ जीवन तूने सब कुछ ही दिया, उम्मीदों की शमा क... Read more

कुदरत।

जाने कैसे मुकाम पे आकर, ये दुनिया गई ठहर है, पिंजड़े में जानवरों को रखता था इंसान, आज कैद घर में हर पहर है, जाने कैसी शाम है ये,... Read more

शादी।

शादी तो बस एक रिवाज़ है, ”बंधन" है जिसका आधार, सात जन्मों-सात फेरों की, ये बातें हैं निराधार, जन्मों का ये बंधन अगर, होता इतना ... Read more

सुबह का संदेश।

सुबह का एक संदेश ही, अपने आप में है सौगात, नहीं तो आजकल कहां किसी से, हो पाती है कोई बात, दिल से आभारी हूं मैं उनका, जो मुझे भ... Read more

अनाम।

हर रिश्ता अगर नाम से जाना जाता, तो अनाम रिश्ता और निस्वार्थ भाव, कभी ना माना जाता क्योंकि जो अल्फ़ाज़ों से परे हो, वो बयान नहीं... Read more

मैं और मेरी चाय।

कमाल की चीज़ है तू भी चाय, क्या ख़ूब तू मुझसे यारी निभाए, मोहब्बत तुझसे कुछ ऐसी है, कि दूर तुझसे रहा ना जाए, सुबह का हर पल निखरत... Read more

नमस्ते।

शायद ये एक इशारा है कि, मैं मुड़ जाऊं अपने रस्ते, कि कुछ भी कहता हूं मैं, तो वो कह देते हैं नमस्ते, शब्दों में छिपे सम्मान को श... Read more

तलाश।

हबीब किसी के बन ना सके तो, ना रहिए बन कर रक़ीब भी, कि बेयक़ीं है ये सफ़र-ए-ज़िंदगी, और है थोड़ा सा अजीब भी, दूर रहकर भी पास रह... Read more

अकारण।

किसी के प्रति सम्मान की भावना अकारण हो , तो कारण जानने का प्रयास मत कीजिए, कुछ भावनाओं का अकारण होना ही उनकी सुंदरता है, कुछ रिश्... Read more

चुप।

बीत गया अब तो काफी वक़्त, कि अब आप भी चुप, और मैं भी चुप, दे चुका हूं सारी दुआएं मैं शायद, कि अब कलम भी चुप, और शब्द भी चुप, न... Read more

दिखावा।

जीवन रुपी सर्कस में, हर इंसान एक मसख़रा है, कोई रहता उदास हमेशा, किसी का जीवन मस्ती भरा है, सभी हैं बनते ज्ञानी यहाँ, हर कोई य... Read more

ग़ज़ल।

कुछ ऐसे मेरे दिल पे है, आपके रूप का असर, जी चाहता है कि रच दूं मैं, आप पे कोई ग़ज़ल, उठती-झुकती पलकों पे मैं, कह जाऊं कोई ग़... Read more

कहिएगा ज़रूर।

कुछ मेरी सुनिएगा , कुछ अपनी सुनाइएगा, ज़िदगी एक जश्न है दोस्त, इसे दिल खोलकर मनाइएगा, हंसीयेगा और हंसाइएगा, हो जो कोई नई ... Read more

उंगली।

आठ उंगलियां हाथों में, किसी एक का कीजिये इस्तेमाल, उंगली करने की कला सीखिए, फिर देखिए इसका कमाल, सबके मामलों में उंगली कीजिये, ... Read more

एक प्यारी सी गुड़िया।

सुबह-सवेरे अक्सर मुझको, एक प्यारी सी गुड़िया नज़र आती है, ढेरों आशीष मैं देता उसको, जब-जब वो मुस्काती है, अपनी मस्ती में चहलकदम... Read more

शराब।

क्या कसूर है इसमें इसका, जो दुनिया में मौजूद शराब है, ख़ुद के बस में रहता ना इंसान, और शराब को कहता ख़राब है, ज़रा झांकीए इतिहास... Read more

फिर मिलेंगे।

जो बिछड़े हैं आज, तो कल फिर मिलेंगे, जो नज़र न आए आस-पास, तो दूर कहीं ख़्यालों में मिलेंगे, कभी जवाबों मे मिलेंगे, तो कभी सवालो... Read more

शुक्रिया।

बीते हुए उन दिनों को आज, याद मैंने कुछ यूं किया, आता था जवाब कुछ लोगों का, और मैं कहता था "जी शुक्रिया", हो सकता है दिल ना मिल... Read more

आप।

आपने उस दिन कहा था मुझसे, क्या मुझ पर आप लिख सकते हैं, सबसे पहले धन्यवाद आपका, कि मुझ पर हक आप समझते हैं, बहुत ज़्यादा तो आपको ज... Read more

एक असभ्य लेखक।

ना तो कोई बड़ा लेखक हूं, ना हूं मैं कोई महात्मा ज्ञानी, फिर भी देख कर थोड़ी सी दुनिया, चार बातें मैंने भी जानी, वो लेखक भी क्य... Read more

चलते-चलते।

जीवन-पथ पे चलते-चलते, यूं ही मिला कुछ लोगों का साथ, हर सुबह उन्हें संदेश मैं देता, तभी होती थी दिन की शुरुआत, क्या ख़ूब था वो शब... Read more

देहरादून।

जीवन भर ये शहर मुझे, आता रहेगा याद, कितनी जल्दी बीत गया, ये सात वर्षों का साथ, अपने में मस्त रहता था मैं, गर्मी बरसात और जाड़ों... Read more

क्यों?

स्थाई इस दुनिया में, कुछ भी रह पाता नहीं, बहुत कुछ रह जाता है, जो इंसान कह पाता नहीं, मन ही मन क्यों घुटता है, क्यों वास्तविकता... Read more

आस-पास,

इंसानों का अस्तित्व तो एक दिन ख़त्म हो जाता है, लेकिन किसी से जुड़ी अच्छी भावनाऐं हमेशा रह जाती हैं, यहीं-कहीं,आस-पास, कभी न ... Read more

अनकहे जज़्बात।

तू कितनी मेरी मैं कितना तेरा, बस यही बताना रह गया, नाराज़गी-बेरूखी़ तो अक्सर ही दिखी, बस हक जताना रह गया, ऐसे कई ख़्याल थे जिनको... Read more

प्रेम।

किसी इंसान के प्रति नि:स्वार्थ प्रेम का भाव रखना भी तो अध्यात्म है, प्रेम जो एक या दो तरफा श्रेणी में नहीं आता, प्रेम जिसे पाने की... Read more

थोड़ी सी नादानी।

कभी किसी को सुना सके जो, दिल में कोई ऐसी कहानी रखिए, वक्त बना देता है समझदार सभी को, ज़िदा थोड़ी सी नादानी रखिए, जो ख़ास होने का... Read more

खुल कर जीना।

मरना तो एक दिन लाज़मी है, खुल कर जीना सीखो, औरों पर क्या हंसना यारों, ख़ुद पर हंसना सीखो, दूसरों को बदलना तो नादानी है, बस ख़ुद... Read more

कुछ ख़्याल बस यूँ ही।

अरसे बाद कुछ ख्यालों को, पन्ने पर रखने बैठा हूं, ऐ कलम मेरा हाथ बटा , आज फिर मैं लिखने बैठा हूं, तेरी हर आज़माइश के, स्वाद को ... Read more

कद्र।

ना इतराइये ये सोच कर, कि आपके लिए भी कोई मचल सकता है, कद्र का मोहताज हर कोई है यहां, कि इंसान कभी भी बदल सकता है, कलयुग की इस दु... Read more

ना पास ना दूर।

हक़ समझते हों जो किसी पे, तो जताइए ज़रूर, हो जो दिल में बात कोई, तो बताइए ज़रूर, ना किसी को बहुत करीब रखिए, ना रखिए बहुत ही दूर... Read more

दोस्ती ज़िंदगी से।

जब जहाँ भी हो सके, जी भर के मस्ती कर लो, यही तो एक ज़िंदगी है दोस्त, हो सके तो इससे दोस्ती कर लो। अंबर श्रीवास्तव। Read more

एक किराए का कमरा।

एक किराए का कमरा था, जो बना मेरा हमराज़, रिश्ता था उस कमरे से ऐसा, ताउम्र रहेगा नाज़, कमरे ने मेरी निराशा देखी, एक बोझिल दौर ... Read more

चाय

जब समझ ना आए कि, कौन सी बात कही जाए, तो फ़ुर्सत में चुपचाप बैठकर, एक कप चाय पी जाए, आइए साथ बैठ के, बातें चंद की जाएं, हाथों ... Read more