Amber Srivastava

Bareilly,(UP)

Joined January 2017

लहजा कितना ही साफ हो लेकिन,
बदलहज़ी न दिखने पाए,
अल्फ़ाज़ों के दौर चलते रहें,
ये सिलसिले कभी ना रुकने पाएं,
कोशिश यही रहेगी मेरी,
कि दिल किसी का ना दुखने पाए।

बस इसी विचारधारा के साथ मैं साहित्यपीडिया पर अपनी कविताएं और लेख लिखने का प्रयास करूंगा।

Email- amber.srivastava84@gmail.com
What’s app-9719293562

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नमस्ते।

शायद ये एक इशारा है कि, मैं मुड़ जाऊं अपने रस्ते, कि कुछ भी कहता हूं मैं, तो वो कह देते हैं नमस्ते🙏, शब्दों में छिपे सम्मान को... Read more

मायूसी से मुस्कान तक-सन् 2013

एक दिन था बहुत मायूसी भरा, आज फिर बजता एक साज़ है, ठुकराने चला था उस जीवन को मैं, जिस जीवन पे मुझको नाज़ है, उदास वो दिन ... Read more

एकतरफा संवाद।

एकतरफा चलते संवादों में, मैं कब तक कुछ कह पाऊंगा, आप हाथ तो बढ़ा कर देखिए जनाब, मैं हमेशा साथ निभाऊंगा, ना होगा मुझसे अनादर कभ... Read more

अलगाव-मजबूरी से दूरी बेहतर।

अलगाव, इस शब्द का मतलब ये बिल्कुल नहीं की आप लोगों से मुंह मोड़ लें या विमुख हो जाएं, इसका मतलब ये है कि आपकी तरफ से आप दूसरों को ये... Read more

रंग-ए-दुनिया।

ज़िंदा नज़र आती ये दुनिया सारी, एक मुर्दों की बस्ती है, क्यों उलझता तू बातों में उनकी, बातें ही जिनकी सस्ती है, ना कर भरोसा द... Read more

आत्मविश्वास।

माना कि वक्त बलवान है, पर इंसान तू भी तो आम नहीं, वक्त भी ये माने एक दिन, कि परेशानियों से तू परेशान नहीं, वक्त चाहे जितना ड... Read more

शुक्रिया।

बीते हुए उन दिनों को आज, याद मैंने कुछ यूं किया, आता था जवाब कुछ लोगों का, और मैं कहता था "जी शुक्रिया", हो सकता है दिल ना... Read more

चल आ ज़िंदगी।

चल आज हम फिर से ख़ुद को, एक दूजे के रू-ब-रू करते हैं, तू भी क्या याद रखेगी ज़िंदगी, कि तुझे फिर से शुरू करते हैं, किन्हीं ... Read more

अब मोह बढ़ने लगा है।

कुछ रिश्तों के साथ ये मन, कुछ ज़्यादा ही जुड़ने लगा है, थोड़ा संभल जा ऐ दिल, कि अब मोह बढ़ने लगा है, लगाव-जुड़ाव का ये बंध... Read more

मुलाकात ख़ुद के साथ।

आप ही सोच के देखिए हुज़ूर, क्या ये भी कोई बात हुई, मिलते रहे हैं सभी से अब तक, पर ख़ुद से ना मुलाकात हुई, जाने कितने दिन बी... Read more

जो छूट गए सो छूट गए।

कहां ढूंढे और कैसे मनाए उन्हें, कुछ बिछड़ गए कुछ रूठ गए , ज़िंदगी नाम है आगे बढ़ने का, जो छूट गए सो छूट गए, जो हिस्सा थे रोज... Read more

मुरादाबाद और लाॅकडाउन।

कुछ ही महीने हुए थे कि मेरा छोटा भाई देहरादून से मुरादाबाद आ गया और अपनी पत्नी और बेटी के साथ मानसरोवर कॉलोनी में रहने लगा,मैं सिर्फ... Read more

नई सुबह घर आती है।

सूरज की पहली किरण, हर सुबह घर आती है, जीवन है नाम आशाओं का, हर पल यही सिखाती है, कभी-कभी ये सुबह ना भाऐ, कभी यही सुहाती है,... Read more

एक पराई।

अपनेपन से पास वो आती, कांधे पे मेरे सिर को झुकाती, आँखों में उसकी दिखी सच्चाई, जब-जब मेरे पास वो आई, कैसा अनोखा रिश्ता उस... Read more

बदल गया हूं मैं भी थोड़ा।।

बदल गया हूं मैं भी थोड़ा, जबसे बदला ये ज़माना है, विश्वास कीजिए फिर भी मेरा, कि अंदाज़ वही पुराना है, ना ही कहीं कोई शिकवा ... Read more

आस-पास।

इंसानों का अस्तित्व तो एक दिन ख़त्म हो जाता है, लेकिन किसी से जुड़ी अच्छी भावनाऐं, हमेशा रह जाती हैं, यहीं-कहीं,आस-पास, कभी न ख़... Read more

सवाल कैसा?

दिल में आया कुछ ख़्याल ऐसा, ना तू मेरी ना मैं तेरा, फिर इंतज़ार का सवाल कैसा, जब इकरार कि कहीं, कोई गुंजाइश नहीं, फिर इज़हार ... Read more

समझिए जनाब।

बाअदब हर बात कहते हैं माना, सबसे बाइज़्ज़त मिलते हैं आप, ख़ुद को भी इज्ज़त बक्शिए ज़रा, कि अहमियत अपनी भी समझिए जनाब, ... Read more

अमिट याद।

(१) तेरी आंखों के काजल सी रात, काली अंधियारी मगर खूबसूरत। (२) तेरे होने का एहसास कराती ये हवा, मंद-मंद बहती जो गुज़रती है पास स... Read more

रंगीन तबियत।

उम्र हो गई पैंतीस के पार, बस बड़प्पन आना बाकी है, समझदारी तो फिर भी आ गई, बस लड़कपन जाना बाकी है, रंग बदलती ये ज़िंदगी यहा... Read more

दिखावा।

जीवन रुपी सर्कस में, हर इंसान एक मसखरा है, कोई है हर पल उदास यहां, तो किसी का जीवन मस्ती भरा है, सभी हैं बनते ज्ञानी यहां प... Read more

संसार-सागर।

जीवन एक चढ़ाई है, क्या ख़ूब लगते हैं इस के नज़ारे, सुख-दुख हैं एक घटा बादल की , दोनों ही हैं ये साथी हमारे, मुश्किलों में भ... Read more

अर्पण।

क्या कहूं कि आपकी मुस्कान एक, संपूर्ण सुंदरता का दर्पण है, प्रेम रस से सजी हर कविता मेरी, बस आपको ही अर्पण है, स्वार्थ स... Read more

जीवन।

कभी पल ख़ुशियों के मीठे-मीठे, कभी ज़हर का कड़वा घूंट दिया, कोई शिकायत तुझसे नहीं, ऐ जीवन तूने सब कुछ ही दिया, उम्मीदों की शमा ... Read more

कभी कहीं।

कई बार सुना आज माना है, जीवन एक बहती धारा है, कभी कहीं है बेबस बहुत, तो कहीं मौजूद कोई सहारा है, कहीं सुना कि काबिल है, क... Read more

एक प्यारी सी गुड़िया।

सुबह-सवेरे अक्सर मुझको, एक प्यारी सी गुड़िया नज़र आती है, ढेरों आशीष मैं देता उसको, जब-जब वो मुस्काती है, अपनी मस्ती में चह... Read more

अंबर।

काश दूर कहीं ये अंबर, नीले अंबर में खो जाए, धरती पे मौजूद ये अंबर भी, नीले अंबर सा हो जाए, निश्चित है इस अंबर का भी, एक न... Read more

तलाश।

हबीब किसी के बन ना सके तो, ना रहिए बन कर रक़ीब भी, कि बेयक़ीं है ये सफ़र-ए-ज़िंदगी, और है थोड़ा सा अजीब भी, दूर रहकर भी पास रहें... Read more

चलते-चलते।

जीवन-पथ पे चलते-चलते, यूं ही मिला कुछ लोगों का साथ, हर सुबह उन्हें संदेश मैं देता, तभी होती थी दिन की शुरुआत, क्या ख़ूब था व... Read more

मेरा दोस्त।

तेरे दिल से मेरा नाता है, तू ही मुझे बस भाता है, तेरे जैसा दोस्त मिला, दिल और नहीं कुछ चाहता है, दोस्ती अपनी चलती रहे, ... Read more

हो सके तो।

दिल खोलकर कीजियेगा मेरी आलोचना, बेशक चाहे मुझको कोस लीजियेगा, पर ऐसा भी क्या किया है मैंने, हो सके तो एक बार ये भी सोच लीजियेगा,... Read more

कुदरत।

जाने कैसे मुकाम पे आकर, ये दुनिया गई ठहर है, पिंजड़े में जानवरों को रखता था इंसान, आज कैद घर में हर पहर है, जाने कैसी शाम है... Read more

शादी और समाज।

शादी तो बस एक रिवाज़ है, ”बंधन" है जिसका आधार, सात जन्मों-सात फेरों की, ये बातें हैं निराधार, जन्मों का ये बंधन अगर, होता इ... Read more

ये कैसा ईश्वर?

ये कैसा ईश्वर है जो अपनी ही, सुनना चाहे जयकार, सुने बिना ये प्रशंसा अपनी, न करे किसी का उद्धार, एक पल में चला आया था जो, ... Read more

तुम।

मेरा ख़्याल तुम, मेरी प्रेरणा तुम, तुम ही मेरी कल्पना हो, सांसों का साज़ तुम, दिल की आवाज़ तुम, तुम ही मेरी तमन्ना हो। ज़... Read more

वो लेखक भी क्या लेखक?

ना तो कोई बड़ा लेखक हूं, ना हूं मैं कोई महात्मा ज्ञानी, फिर भी देख कर थोड़ी सी दुनिया, चार बातें मैंने भी जानी, वो लेखक भी क... Read more

अनकहे जज़्बात।

तू कितनी मेरी मैं कितना तेरा, बस यही बताना रह गया, नाराज़गी-बेरूखी़ तो अक्सर ही दिखी, बस हक जताना रह गया, ऐसे कई ख़्याल थे ज... Read more

चाय और आपका ख़्याल।

सुहानी हसीन सुबह के साथ, एक मीठी चाय की चुस्की हो, मेरे दिल में ख़्याल हो आपका, और होठों पे मुस्की हो, आइए ख़्यालों में बैठ के... Read more

आपकी सुबह।

सुबह हो आपकी ऐसी जिसमें, हर पल खुशियों का तरन्नुम हो, दिन बन जाए ख़ूबसूरत इतना, कि ताउम्र जिसका तसव्व़ुर हो, हर एक पल आपके दि... Read more

जवानों तुम्हें सलाम।

गर्व है मुझको आप पर, ऐ मेरे देश के जवान, हंसते हंसते देते हैं, आप देश के ऊपर जान, इस देश की धरती धन्य है, जिसपे जन्मे है... Read more

अजीब एहसास ।

हैं जो बिल्कुल अंजाने से, फिर भी लगते पहचाने से, कुछ जाने-पहचाने बरसों के, पर हैं बिल्कुल अंजाने से, बिना कहे भी कभी-कभी, बह... Read more

दिल ही दिल में।

ऐ दोस्त ये एहसास-ए-मोहब्बत भी, एक दिलकश हसीन नज़राना है, दिल में रौशन ख़्यालों पर, दिल ही दिल में इतराना है, अनकहे अल्फ़ाज़ो... Read more

मैं और मेरी चाय।

कमाल की चीज़ है तू भी चाय, क्या ख़ूब तू मुझसे यारी निभाए, मोहब्बत तुझसे कुछ ऐसी है, कि दूर तुझसे रहा ना जाए, सुबह का हर पल न... Read more

खुल कर जीना।

मरना तो एक दिन लाज़मी है, खुल कर जीना सीखो, औरों पर क्या हंसना यारों, ख़ुद पर हंसना सीखो, दूसरों को बदलना तो नादानी है, बस ... Read more

मेरी डायरी।

रोज़-रोज़ तो लिख नहीं पाता, पर दूर मैं तुमसे रह नहीं पाता, साझा करता तुमसे मैं, अपनी हर एक सोच, मानो जैसे हो जाता, हल्का ... Read more

ओझल।

कलम उठती नहीं कुछ लिखने को, आज लिखने का फिर भी करता दिल, जीवन में थे कुछ लोग भी ऐसे, दिल कहता उनसे जाके मिल, कुछ तो अभी भी साथ... Read more

माता-पिता-38 वर्ष शादी के।

14 जून 1982, मेरे माता-पिता परिणय सूत्र में बंधे, शादी एक संयोग है और इन दोनों की शादी इस बात का जीवंत उदाहरण है। मेरी माता जी सन् ... Read more

सुबह का संदेश।

सुबह का एक संदेश ही, अपने आप में सौगात है नहीं तो आजकल कहां किसी से, हो पाती कोई बात है, दिल से आभारी हूं मैं उनका, जो मुझे भ... Read more

प्रेम- एक अध्यात्म।

किसी इंसान के प्रति निस्वार्थ प्रेम का भाव रखना भी तो अध्यात्म है,प्रेम जो एक या दो तरफा श्रेणी में नहीं आता,प्रेम जिसे ना तो पाने ... Read more

कहानी एक कविता की।

26 अप्रैल 2017, इस शाम को कुछ ऐसा घटित हुआ जिसका कहीं न कहीं मुझे कब से इंतज़ार था, बाइज़्ज़त एक महिला के लिए कविता के रूप में अपनी... Read more