नाम- अभिषेक कुमार
तख़ल्लुस- अम्बर
जन्म- 07 मार्च 2000
जन्मस्थान- मवाना मेरठ उत्तर प्रदेश।
विद्या- हास्य व्यंग्य, ग़ज़ल, गीत , छंद आदि।

अभिषेक अम्बर का जन्म 07 मार्च 2000 को मेरठ के मवाना कसबे में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली से प्राप्त की। तेरह वर्ष की आयु से निरंतर हिंदी एवम् उर्दू साहित्य के लिए समर्पित हैं। गीत, ग़ज़ल , छंद , कविता आदि विद्या में लिखते हैं। हिंदुस्तान की मशहूर शायरा अंजुम रहबर जी के शिष्य हैं। तथा साहित्यिक मंचों पर सक्रिय भूमिका में हैं।

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एक ख्वाहिश है बस | अभिषेक कुमार अम्बर

एक ख्वाहिश है बस दीवाने की, तेरी आँखों में डूब जाने की। साथ जब तुम निभा नहीं पाते , क्या जरूरत थी दिल लगाने की। आज जब आस छोड़ दी ... Read more

ख्वाब आँखों में |अभिषेक कुमार अम्बर

ख्वाब आँखों में जितने पाले थे, टूट कर के बिखर ने वाले थे। जिनको हमने था पाक दिल समझा, उन्हीं लोगों के कर्म काले थे। पेड़ होंगे जव... Read more

होली छंद | अभिषेक कुमार अम्बर

हाय रे ! ये माह फ़ाग दिल में लगाये आग, गोरियों को देख प्रेम उमड़े है मन में। लगती हैं लैला हीर नजरों से मारें तीर, बिज़ली सी दौड़ पड़े... Read more

पहन के कोट पेंट(छंद) | अभिषेक कुमार अम्बर

पहन के कोट पेंट तन पे लगा के सेंट, बनकर बाबू सा में चला ससुराल को। आकर के मेरे पास बोलने लगी ये सास, नज़र न लग जाये कहीं मेरे लाल ... Read more

बसंत है आया | अभिषेक कुमार अम्बर

कू-कू करती कोयल कहती सर सर करती पवन है बहती। फूलों पर भँवरें मंडराते सब मिल गीत ख़ुशी के गाते। सबको ही ये मौसम भाया देखो देखो बस... Read more

जब तक मानव नही उठेगा | अभिषेक कुमार अम्बर

जब तक मानव नहीं उठेगा, अपने हक़ को नहीं लड़ेगा, होगा तब तक उसका अपमान, कब तक मदद करे भगवान। नहीं यहां कोई तरस है खाता, खून के प... Read more

महबूबा | अभिषेक कुमार अम्बर

सबकी मेहबूबा है वो सबके दिल की रानी है। मेरी गली के लड़कों पे जबसे आई जवानी है। कभी कभी लगती मुझको वो सब तालों की चाबी है। और जिसस... Read more

जीवन है एक डगर सुहानी | अभिषेक कुमार अम्बर

जीवन है एक डगर सुहानी सुख दुःख इसके साथी हैं, कर संघर्ष हमें जीवन में मंजिल अपनी पानी हैं । बड़ी दूर है मंज़िल अपनी लंबा बड़ा है... Read more

साथ जबसे तुम्हारा मिला | अभिषेक कुमार अम्बर

साथ जबसे तुम्हारा मिला सारी दुनिया बदल सीगई। प्रेम का पुष्प जब से खिला सारी दुनिया बदल सी गई। बदला बदला सा मौसम यहां बदली बदल... Read more

और न कुछ भी चाहूँ | अभिषेक कुमार अम्बर

और न कुछ भी चाहूँ तुझसे बस इतना ही चाहूँ। अपने हर एक जन्म में सिर्फ तुझको ही माँ में पाऊं। और न कुछ भी चाहूँ। लाड़ प्यार से मु... Read more

सरस्वती वंदना-२ | अभिषेक कुमार अम्बर

हे विरणावादिनी मईया मेरी झोली ज्ञान से भर दे। सत्य सदा लिखे कलम मेरी मुझको ऐसा वर दे। छल दंभ पाखंड झूठ से हमको दूर करो तुम। म... Read more

सरस्वती वंदना | अभिषेक कुमार अम्बर

हे माता मेरी शारदे तू भव से उतार दे। बुद्धि को विस्तार दे ज्ञान का भंडार दे। हे माता मेरी शारदे। दूर सब अँधेरे हो ज्ञान के सवे... Read more

एग्जाम एंथम | अभिषेक कुमार अम्बर

हम होंगे सब में पास हम होंगे सबमें पास हम होंगे सब में पास एक दिन...........। हो..................। सोते हैं बिंदास लिखते हैं ... Read more

मास्टर श्यामलाल | अभिषेक कुमार अम्बर

हमारे मास्टर श्यामलाल, करा रहे थे गणित के सवाल। मास्टर जी ने दो सवाल कराये और ऐंठ गए। वापस आ कुर्सी पर बैठ गए। उन्हीं के पास मे... Read more

मिसेज डोली | अभिषेक कुमार अम्बर

एक दिल मिसेज डोली, अपने पति से बोली। अजी! सुनिए आज आप बाजार चले जाइये। और मेरे लिए एक क्रीम ले आइये। सुना है आजकल टाइम में थ... Read more

कुण्डलिया छंद

खिड़की को देखूँ कभी,कभी घड़ी की ओर, नींद हमें आती नहीं ,कब होगी अब भोर। कब होगी अब भोर ,खेलने हमको जाना, मारें चौक्के छक्के, हवा मे... Read more