30 जून 1965 में उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के “सरैया-कायस्थान” गाँव में जन्मे कवि अम्बरीष श्रीवास्तव एक प्रख्यात वास्तुशिल्प अभियंता एवं मूल्यांकक होने के साथ राष्ट्रवादी विचारधारा के कवि हैं। प्राप्त सम्मान व अवार्ड:- राष्ट्रीय अवार्ड “इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी अवार्ड 2007”, “अभियंत्रणश्री” सम्मान 2007 तथा “सरस्वती रत्न” सम्मान 2009 आदि | email:ambarishji@gmail.com

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'दोहों के तेईस प्रकार' : इंजी. अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर'

'दोहों के तेईस प्रकार' बांचें सारे दोहरे, तेईस रूप प्रकार. प्रस्तुत है श्रीमान जी , दोहों का संसार.. नवल धवल शीतल सुखद, मात... Read more

छंद 'दोहा' व उसका रचनाक्रम : इंजी. अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर'

दोहे के माध्यम से दोहे की परिभाषा :- (छंद दोहा : अर्धसम मात्रिक छंद, चार चरण, विषम चरण तेरह मात्रा, सम चरण ग्यारह मात्रा, अंत पता... Read more

सरसी/सुमंदर या कबीर छंद की परिभाषा व रचनाक्रम: इंजी. अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर'

सरसी/सुमंदर या कबीर छंद (चार चरण, प्रत्येक में १६-११ मात्रा अर्थात १६ पर यति, चरणान्त में गुरु-लघु) 'सरसी' छंद लगे अति सुंदर... Read more

मुक्तामणि छंद की परिभाषा व रचनाक्रम" :इंजी. अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर'

मुक्तामणि छंद में ही इस छंद की परिभाषा (चार पद प्रत्येक में २५ मात्रा व १३-१२ मात्राओं पर यति, पदांत में दो गुरु या कर्णा) ... Read more

भारत रत्न लौह पुरुष सरदार पटेल को हार्दिक नमन ....

सिंह समान गर्जना स्वर में किन्तु हृदय अति कोमल था. आँधी जैसी चाल तुम्हारी, साथ तुम्हारे दल-बल था. मानचित्र था पल में बदला भारत को ... Read more

मगर मेरे भाई न शादी रचाना.....

(समसामयिक हास्य-व्यंग्य रचना) अगर तुमको आये न खाना पकाना पड़े भूख से आये दिन बिलबिलाना बटन चेन गायब कभी मत लजाना सो बेचारगी में... Read more

शाम को कल्लू मिलेगा आपकी लेकर दवा.....

खटखटाते द्वार पर घंटी बजाते लोग हैं आज दोनों हाथ जोड़ें मित्रता के योग हैं देखिये मुन्ना खड़ा है आपका ही लाल है आपके अनुसार ही यह द... Read more

छंद कुण्डलिया : कितना मँहगा वोट.....

चुनावी कुण्डलिया छंद : _________________________________ (१) पंजा थामे साइकिल, सधी कमल की चाल. इंजन सीटी दे रहा, हाथी करे धमाल. ... Read more

होते मानव के लिए, मानव के अधिकार..

आपस में हम सब करें, न्यायोचित व्यवहार. दलित, दुखी, कमजोर पर, मत हो अत्याचार.. प्रेम त्याग करुणा क्षमा, मानवता के अंग. असुरवृत्त... Read more

समसामयिक कुण्डलिया: स्वार्थ का त्यागें चोला..

चोला ओढ़े स्वार्थ का, दिखा रहे हैं क्रोध. किसको क्या परवाह है, करते रहें विरोध. करते रहें विरोध, मजा अब लेना छोड़ें. मत दें तीन तला... Read more

एक अनुभव : टाइप-२ डायबिटीज पर विजय

डायबिटीज का एक मंत्र है .......... ‘ॐ गजाननं भूंतागणाधि सेवितम्, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम् | उमासुतम् शोक विनाश कारकम्, नमामि वि... Read more

आया है नववर्ष यह....

मंगलमय हो वर्ष यह, जुड़ें तार से तार | अपनापन बढ़ता रहे, उपजाए यह प्यार || गुरु हैं अपने देवगुरु, अति पावन है वेश। गुरु ब्रह्मा ह... Read more

(छंद कुण्डलिया): करें उचित उपचार....

पट्टी बांधे आँख पर, देवी की ऐ मूर्ति. न्याय तराजू मत झुका, कौन करेगा पूर्ति? कौन करेगा पूर्ति? अगर अन्याय रहेगा. वाम सेक्युलर वाद... Read more

तुम्हें मैं बुलाऊँ मुझे तुम बुलाना.....

अजी चाहे जब गीत औरों के गाना चहकना बहकना व सीटी बजाना गुसलखाने में मस्त हो गुनगुनाना मगर मेरे भाई तू कवि बन न जाना ये कविता बह... Read more

मत्तगयन्द सवैया: देव नहीं परब्रह्म कहें ....

देव नहीं परब्रह्म कहें शिवनाम अमोघ सदा हितकारी. नाम जपे नित मंदिर जाय जहाँ जगदीश बने त्रिपुरारी. ग्यारहवें प्रिय रुद्र बली अति नष्... Read more

समसामयिक मुक्तक ....

बसे गद्दार हैं कितने न है गिनती यहाँ कोई. मिटा अस्तित्व देगें ये अभी है अस्मिता खोई. लगाकर देश में दीमक खजाना कर चुके खाली, इन्हे... Read more

लघुकथा: नकल जिंदाबाद..

"आज का पेपर कैसा हुआ बेटी?" चाय का प्याला हाथ में लेते हुए गजेन्द्र ने निकिता से पूछा | “गज़ब का पापा", निकिता ने खुश होते हुए कहा...... Read more

तब भी चोरी कीजिए, ....

(१) चोरी यद्यपि पाप है चोरी है अपराध. तब भी चोरी कीजिए, ऑफीसर को साध.. ऑफीसर को साध, जुगाड़ी युक्ति लगाएं. जा सत्ता के द्वार, फूल... Read more

कुछ दोहे ...

ताज स्वार्थी शीश पर, बने हुए सम विष्णु. देखो कहते फिर रहे, भारत है असहिष्णु.. परिवारीजन हैं दुखी, कैसे हो अब काम. अफसर चाहे अप्... Read more

बांस के झुरमुटों से बजें सीटियाँ..

कुछ मुक्तक आवरण त्यागकर भंगिमा नेक लें, प्राकृतिक ही रहें भाव भी एक लें, काँपता शीत है सूर्य के सामने, गुनगुनी-कुनकुनी धूप को ... Read more

याद बहुत आते है गुल्ली-डण्डों वाले दिन....

कवि प्रमोद तिवारी व कवि के० डी० शर्मा ‘हाहाकारी’ की पावन स्मृति में ..... ____________________________________ याद बहुत आते है गु... Read more

एक दोहा ....

लोभ मोह में फँस यहाँ, होते पापी कृत्य. बाह्य जगत मिथ्या यहाँ, अंतर्मन ही सत्य.. --इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर' Read more

नववर्ष व नवरात्रि शुभकामना मुक्तक...

प्रीति की भावना स्नेह उत्कर्ष यह रूप शिशुवत धरे मातृ को हर्ष यह आज उल्लास की बह रही धार है, हो सनातन सुखद मित्र नववर्ष यह, --इ... Read more

सरस्वती वंदना...

शुचि शुभ्रवसना शारदा वीणाकरे वागीश्वरी, कमलासनी हंसाधिरुढ़ा बुद्धिदा ज्ञानेश्वरी, अमृतकलश कर अक्षसूत्रं पुस्तकं प्रतिशोभितं, शरणाग... Read more

बेच रहे हैं अंग....

छंद कुण्डलिया (दोहा + रोला) (दोहे के अंतिम चरण से रोले के प्रथम चरण का आरम्भ व कुण्डलिया का प्रारंभिक व अंतिम शब्द एक ही) चीनी ... Read more

दिखा प्रतिबिम्ब दर्पण में.....

एक मुक्तक: _________________________________________ बह्र: बहर-ए–हज़ज मुसम्मन सालिम रुक्न: मफाईलुन मफाईलुन मफाईलुन मफाईलुन हिन्दी... Read more

पुस्तक समीक्षा : 'कथा अंजलि' -लेखक डॉ० प्रवीण कुमार :

पुस्तक समीक्षा : कथा अंजलि : डॉ० प्रवीण कुमार प्रकाशक: साहित्यपीडिया पब्लिकेशन्स समीक्षक : इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर' प... Read more

राहत देगी कोर्ट..

सहा कुपोषण सो कहा, नहीं हुआ बर्दाश्त. बदले में दण्डित हुआ, अब जवान बर्खास्त.. सहो नहीं अन्याय यदि, जनता करे सपोर्ट. सच्चाई होगी... Read more

समसामयिक कुण्डलिया

___________________________ आतंकी हमले हुए, अपने मरे जवान, देश व्यथित मन रो रहा, सरकारें दें ध्यान. सरकारें दें ध्यान, समर्थक, ब... Read more

घनाक्षरी छंद: सब को भूकंपरोधी, ज्ञान देना चाहिए....

_______________________________ गहरी हो चार फीट नीव यदि मंजिल दो, बीम बाँधे नीव सारी, ध्यान देना चाहिए. आर० सी० सी० बैंड बांधे... Read more

समसामयिक कुण्डलिया ...

प्रतिबंधित है उत्खनन, अति सीमित परिमाण. मौरंग गिट्टी के बिना, रुका सभी निर्माण. रुका सभी निर्माण, व्यथित पीड़ित अब जनता. भूखे श्रम... Read more

एक मुक्तक

सदा पावों को यदि देखे दुखी मन मोर रहता है. भुलाकर मोर पंखों को व्यथित चहुँओर रहता है. जिसे हम खोजते संसार में प्रतिक्षण बने पागल, ... Read more

श्रमिक दिवस पर विशेष..........

मालिक समझें स्वयं को, पाकर नाम हुजूर। सबका मालिक किन्तु वह, उसके सब मजदूर।। --इंजी0 अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर' Read more

समसामयिक कुण्डलिया ...

घटतौली कर हो रहे, चिप से मालामाल. सीनाजोरी देखिये, चोर करें हड़ताल. चोर करें हड़ताल, कारनामे हैं काले, त्वरित लगा अभियोग, इन्हें ... Read more

कुण्डलिया

कातिल नाबालिग़ मगर, घातक उसकी सोच। बलात्कार कर क्रूरतम, अंतड़ियों को नोच। अंतड़ियों को नोच, राक्षसी जागी ज्वाला। फाड़ दिया गुप्तांग, ... Read more

'रसवृष्टि धरा पर फिर होगी'

आओ मेरे प्यारे मित्रों रिश्तों की बात बताता हूँ जो दिल मिलकर टूटे बिछड़े उन सबकी व्यथा सुनाता हूँ युग-युग से है सबको पसंद बस रंग स... Read more

समसामयिक कुण्डलिया छंद:

करिए हस्तक्षेप मत, भले जिन्दगी नर्क. घातक तीन तलाक है, कर दे बेड़ा गर्क. कर दे बेड़ा गर्क, औरतें तिल-तिल मरतीं. चले हलाला साथ, महज ... Read more

दिव्यांग मित्रों के प्रति कुछ मुक्तक ...

पांव यदि है एक तो शत पर्वतों को लांघिये. एक है यदि हाथ तो दस के बराबर मानिए. आँख भी है एक अथवा हैं नहीं दोनों नयन, हर परिस्थिति... Read more

जेवर-बुलंदशहर हाइवे पर हुई दुर्दान्त ह्त्या व महिलाओं के साथ हुए गैंगरेप से द्रवित होकर उपजे हुए कुछ मुक्तक...

जेवर-बुलंदशहर हाइवे पर हुई दुर्दान्त ह्त्या व महिलाओं के साथ हुए गैंगरेप से द्रवित होकर उपजे हुए कुछ मुक्तक... हाइवे पर हैं दरिन... Read more

दोहा

मीन -मेख भारी पड़ा, झेल रही दुःख त्रास. व्यथित स्वार्थी भावना,भावुक हुआ उदास.. --इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव 'अम्बर' Read more

असहनीय है कृत्य....

खुलेआम है खेलता, पैशाचिक जो खेल। बने एकजुट रामपुर, उस पर कसे नकेल। उस पर कसे नकेल, सबक ऐसा सिखलाये। नहीं दुशासन क्रूर जन्म फिर से... Read more

दोहा

समसामयिक दोहे: प्लाटिंग मौरंग उत्खनन, सभी गया जो छूट. आय बंद सो हो रहे, मर्डर रेप व लूट.. गुंडे कातिल माफिया, अतिशय सक्रिय आ... Read more

नफरत को मत दिल में पालो...

गम सहकर भी प्यार बिखेरो अपनों में मत फ़र्क करो, नफरत को मत दिल में पालो उसका बेड़ा गर्क करो, रोज सुकूं दिल को जो देती वो है अपनी बीव... Read more

डॉ० विश्वनाथ मिश्र के प्रति ...

स्नेहभाव पूरित हृदय, सरल सौम्य व्यवहार. विश्वनाथजी नित्यप्रति, बरसाते थे प्यार.. शुचि संस्कारित शुद्ध मन, त्याग समर्पण भाव. अति... Read more

इन्तजार करिए बस साहब...

इन्तजार करिए बस साहब... इन्तजार करिए बस साहब अपनी अपनी बारी का. काश्मीर में मौत बँट रही हाल देख गद्दारी का.. आतंकी को करें स... Read more

प्यार करना न इनसे सिखाओ सुकवि

प्यार के गीत रच-रच के गाओ सुकवि किंतु आतंक मत भूल जाओ सुकवि! मित्र सतनाम हैं यार रेहान हैं दोस्त लैम्बर्ट है शत्रु बुरहान हैं ... Read more

फले सनातन वृक्ष...

सत्ता आयी राम की, हृदय हुआ गोविंद. भारत के अब राष्ट्रपति, रामनाथ कोविंद. रामनाथ कोविंद, रामनाइक मन भावन. दोनों में हैं राम, मगन श... Read more

समसामयिक कुंडलिया छंद

___________________________________ सरिया बिन छत डालते , करते रहे कमाल। कहलाते इंजीनियर मिस्त्री वंशीलाल। मिस्त्री वंशीलाल, आत्मव... Read more

हमारे प्रिय पुत्र भूषण के जन्म दिवस पर ...

मंगलमय हो जन्मदिवस यह, स्नेहपूर्ण रसधार मिले। गुरुजन का आशीष रहे, माँ सरस्वती से प्यार मिले।। जीवनपथ हो ज्ञान प्रकाशित हो विनम्र म... Read more

मुद्रा का अपमान..

सिक्के घर रख आइये, सबसे मिलता ज्ञान. बाजारों में हो रहा, मुद्रा का अपमान.. मुद्रा के अपमान से, सिक्का रोये एक. अब कोई लेता नही... Read more