अमरेश गौतम'अयुज'

रीवा,मध्य प्रदेश

Joined July 2016

कवि/पात्रोपाधि अभियन्ता

Books:
अनकहे पहलू(काव्य संग्रह)
अंजुमन(साझा संग्रह)
मुसाफिर(साझा संग्रह)
साहित्य उदय(साझा संग्रह)
काव्य अंकुर(साझा संग्रह)
कल्पना के मोती(साझा संग्रह)
भारत के युवा कवि एवं कवयित्रियाँ(साझा संग्रह)
कलाप(साझा संग्रह) संपादित
परिधि पर समय(साझा संग्रह) शब्द संयोजन एवं संपादन
छितिज की ओर (साझा संग्रह )
अपनी शान है तिरंगा (साझा संग्रह)

Awards:
काव्य रश्मि सम्मान, श्रेष्ठ युवा रचनाकार सम्मान,हिन्दी सागर सम्मान,साहित्य शिखर सम्मान एवं काव्य रत्न सम्मान।

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मुक्तक

कोई पुरखों की मिल्कियत बचाना चाहता है। कोई कुनबे की इज्जत बचाना चाहता है। हे भगवान रक्षा करना मेरे वतन की अब- कौन देश की ताक़त बच... Read more

कविता

कई दिनों से कविता उदास रहती है। व्यस्त जिन्दगी में भी आसपास रहती है। नहीं मिलता वक्त उससे मिलने का जरा भी- इसीलिए आजकल थोडा़ खटास... Read more

बुधिया काका

घर के भीतर चल रहे समाचार और समाचार में जो बताया जा रहा था बुधिया काका साफ-साफ सुन भी रहे थे और समझ भी। खिन्न थे वो आज की निति... Read more

माँ

तुम हमको जहां में लायी हो माँ, बच्चों को कितना भायी हो माँ। जब भी कोई कष्ट है होता, सबकी जबां पर माँ है होता। दुनिया का कोई ... Read more

राज़दार

मेरे अरमानों को क्यों किया तार-तार, इनकी फरमाइश की थी तो बार-बार। जब भी देखा हुजूम तेरे फरिस्तों का, याद कर तुझको सजदे किये ह... Read more

ये कैसी बारिश आई है

नभ के हर कोने पर,तेरी ही रानाई है, ये कैसी बारिश आई है। अधरों के तपते शोलों पर,शबनम की बूँद लुभाई है, सदियों स... Read more

नहीं बनूँगा

मैं विद्रोही नहीं बनूँगा मै अवरोही नहीं बनूँगा। तुम उद्दंड भले हो जाओ, मैं निर्मोही नहीं बनूँगा। स्वप्न सदा देखा उन्नति का, ... Read more

समसामयिक

बगावत छेंड़ दी, बाग की लताओं नें, माली कैद है, हमपर राज किसका है। कारजा़र सा माहौल है, अपनों का अपनों से, अपना सा ये काजि़ब, सम... Read more

बघेली मुक्तक और समसामयिक शायरी

आंधर बनें बटइया,अपनेन क बांटत हं, सुधबन के मुंहु, कुकुरबे चाटत हं। एंह दउर मं केहू क का कही बताब, अपनन के हाथ, अपनेन काटत हं। ... Read more

समसामयिक

छोड़ दो कोशिशें किसी को जगाने की, अब कहां फिक्र है किसी को ज़माने की। Read more

बेटियाँ

बेटियाँ कच्चे बाँस की तरह, पनपती आधार हैं। बेटियाँ ही अनवरत, प्रकृति की सृजनहार हैं। किसी भी संदेह में ना, उन्हें मारा जाय... Read more

नोटबंदी-एक सिलसिला

कैसा विरोधाभास है ये, खाने के लाले भी हैं, और तरक्की की बात भी। Read more

नोटबंदी-एक सिलसिला

जमा पूरी रकम को, कालाधन न कहो साहब, गरीबों के एक-एक रुपये का,उसी में हिसाब है। कालाधन तो अब,आप जैसों से निकले हैं, जो कि हर हा... Read more

मेरा सिद्धांत

आदर्श मेरा वो नहीं, जो शीर्ष पर आसीन हो, और अपने कर्म से, निष्कृय हो, उदासीन हो। आदर्श मेरा निम्न स्तर का बशर होगा अगर, कर्तव्य... Read more

नोटबंदी-एक सिलसिला

गड्डी महलों की निकली या न निकली, अपने बटुए से नोट पुराने चले गए। सुबह शाम हम खड़े कतारों में हर दिन, बैंकों से महलों में पैसे च... Read more

कोई तो है

सोई हुई रातों में, धड़कनें बढ़ाती है, कोई तो है जो दिल को लुभाती है। उस बात की आज भी, देखिए खुमारी है, मुस्कुराकर जब कहा था,ज... Read more

नोटबंदी - बघेली कविता

रहा फैसला निकहा दादू, होइ गइ चूक समीक्षा मा। बिन तइयारी बइठी गये हों कउनउ ऊंचि परीक्षा मां। जेका कह समर्थन दादू, ऊत एनकर... Read more

शहादत पर

एक पल के लिए बनाने वाला भी रोया होगा, किसी का अरमान जब यूँ मौत की नींद सोया होगा। हाँथों की मेहँदी छूटी भी नहीं कि चूड़ियाँ तोड़न... Read more

समसामयिक

आसार नहीं अच्छे दिन के, ये केसर क्यारी के दंगल। नहीं भा रहे सेव बंगीचे, बना कुछ दिनों से जंगल। विदेश नीतियां ठीक हैं लेकिन,... Read more

योजना है

सुनो एक योजना है।   जब तलक पूरी न होगी,   इस जहाँ में जिद हमारी।   जुबाँ पर फरियाद होगी,   अवज्ञाएँ फिर हमारी।   जब तलक ना ... Read more

तो याद करना

कोई दर्द, कोई चुभन जब हद से गुजर जाए,तो याद करना, जिन्दगी में कभी जरूरत पड़ जाए,तो याद करना। बिछड़ते वक्त के ये आखिरी, अल्फाज थे... Read more

अभी-अभी तो होश में आया हूँ मैं

न देखिये यूं तिरछी निगाहों से मुझे, अभी-अभी तो होश में आया हूँ मैं। मदहोश था अब तक उनकी आराईश में यूं, लगता था खुद से ही परा... Read more

खुश्बू जानी-पहचानी थी

मुद्दतों बाद वो दिखे मुझे, पर अपनों की निगरानी थी, खुश्बू जानी-पहचानी थी। एक दिवस मैं गया था, लेने कुछ सामान, कोई बगल से ... Read more