मेरा नाम अल्पना नागर है।पेशे से शिक्षिका हूँ।मूलतः राजस्थान से हूँ, वर्तमान में दिल्ली में निवास है।पिछले 1 वर्ष से साहित्य सृजन में संलग्न हूँ।सभी तरह की कविताएं छंद मुक्त,छंद बद्ध, गीत,नवगीत,ग़ज़ल, गीतिका,हायकू,क्षणिकाएं लिखना व पढ़ना बहुत पसंद है।

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प्रेम

चेतना, निर्णय, अधिकार, एक एक कर सब समर्पित कर चली हो, स्त्री तुम प्रेम कर बैठी हो! सहगामिनी बनने चली थी, अनुगामिनी रह गई हो, ... Read more

बात समझ मे आई

लघु कहानी बात समझ में आयी आज रजिया बहुत खुश नज़र आ रही थी।कक्षा 12 में उसने गणित विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त किये।सभी शिक्... Read more

हायकू

हायकू (1) कभी रुके न समय मुसाफ़िर चलते जाना (2) सूखे गुलाब जीवन की साँझ में हरा बसंत (3) सम्बन्ध घास अहंकार की आग अंततः ... Read more

चिड़िया

चिड़िया रानी चिड़िया रानी कहे कहानी आँखों में सपने पानी पानी आँगन की है शोभा ये तो घर की चहल पहल उड़ जाना है उसे एक दिन पिय क... Read more

अहसास

अहसास तुम होते हो तो सुहानी लगती हैं फरवरी की बेफ़िक्र हवाएं मेरा रोम रोम वाकिफ़ है तुम्हारे गुनगुने अहसास से.. अच्छा लगता है... Read more

अस्तित्त्व

अस्तित्व तुम्हें हक़ है कि चुनो तुम रिश्तों की भीड़ से स्वयं के अस्तित्व को, समेटो रसोई के मसाला डिब्बों में बंद पड़े अरमानो... Read more