जो दिल करता है वही लिखता हूँ …
कान्हा की नगरी मथुरा, उत्तर प्रदेश में रहते हुए लिखने का शौक लगा तो ये सफ़र चल पडा..आजकल रायपुर छत्तीसगढ़ को अपना निवास स्थान बनाया है
विगत कुछ दिनों से लिखना शुरू किया है ग़ज़ल, गीत ,हाइकू ,लघु कथा,मुक्तक दोहे, लिख पाता हूँ !!

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पत्थर

दे..लालच... देश में दंगा कराया है ।। यहाँ.भाई से...भाई को...लड़ाया है ।। फसाते चंद सिक्को का देकर लालच ।। उन्ही..के हाथ में..पत्थर... Read more

मुक्तक

शर्म आती नहीं उन्हें अब तो ! चाहे कपडे सभी ले जाये जो !! नग्न उनको सभी ने अब देखा ! वोट ले देश को ही छलते वो !! ** आलोक मित्तल ** Read more

जोड़ना

जोड़ना ही जोड़ना हमको घटाना ही नहीं। दुश्मन अपने तो कभी कही बनाना ही नहीं । घूमूँगा फिरूँगा भाषा सबकी समझूँगा मैं । पर उम्मीद किसी ... Read more

छल फरेब

टूटता साथ अब बनाना है ! दूरियाँ आज सब मिटाना है ! हो न अब छल फरेब आपस में ! आज विश्वास ये जमाना है !! आलोक मित्तल उ... Read more

न ज़िन्दगी से हम थे हारे

मापनी - २२ २२ २२ २२ पदपादाकुलक छंद ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ न ज़िन्दगी से हम थे हारे दूर हुए हों भले किनारे भूख... Read more

बचपन

खेल में आज भी लगा है मन ! है अभी भी यही कही बचपन ! भूलते ही नहीं पुराने दिन ! है कही दिल में आज सूनापन !! आलोक मित्तल उदित Read more

ये भी' कोई ज़िंदगी है,

ये भी' कोई ज़िंदगी है, आदमी जिसमें दुखी है. आदमी तो आदमी में । ढूंढता कोई कमी है ।। साथ माँगा दोस्ती में । टूटी तब उम्मीदगी... Read more