Arun Pradeep

Joined January 2017

Though a science master by education, a tax collector by work did write in Hindi n English since 1970.
Got published in print media since 1970 intermittently!
Now a retired person, pursuing my hobby as writer!

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माँ

माँ ** अरुण प्रदीप शर्मा गर्मी की तपती धूप में बरगद सी छाया देती बादल जो उमड़ घुमड़ डराए छाती से है तू लिपटाती सर... Read more

हाइकु

धनतेरस नहीं रस धन में कहा किसने! Read more

हाइकु

क्यों आते याद छोड़ जाने के बाद घर संसार Read more

हाइकु

हाइकु जन बगीचा फूलों बना गलीचा मन है रीता 2 न कटी नाक नकटे की थी बात नेताई ठाठ 3 मंत्री था बाप बेटा कराता बात द... Read more

हाइकु

हाइकु -- अरुण प्रदीप 1 सूरज दादा रथ पर सवार वार पे वार 2 सावन बैरी परदेशी साजन गोरी बेमन 3 एकाकी म... Read more

हाइकु

हाइकु 1 गीली गलियां भीगते तन मन आया सावन 2 मीठी ठंडक गुनगुनी सी धूप आया वसंत 3 कूकी कोयल अंबिया लदे वृक्ष सो... Read more

होली

होली के हुड़दंग में ,अपने कवि कलवालाल थे भंग चढ़ाये घूमते, मुंह पर भले गुलाल थोड़ी सी ही देर में, भंग की उठी तरंग सभी पड़ोसी हंस रहे... Read more

बेटी :: एक विचार

बेटी :: एक विचार -- अरुण प्रदीप सृष्टि रचना के समय पुरुष ने जब देखा होगा सर्वगुण संपन्न प्रकृति को तभी उपज होगा उसमें हीन भाव... Read more