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जिंदगी है खेल नहीं

खेल सी हो चली है कैसी जिंदगी है ये अपनो को ही नोच रहे सब कैसी दरिंदगी है ये शर्मिन्दगी होती है महसूस क्या यही इनका काम है करता... Read more

ज़िन्दगी नही, ख्वाब बन गयी है

ज़िन्दगी नही, ये अब ख्वाब बन गयी है। मेरे किये कर्मों का ये हिसाब बन गयी है। बड़े सवाल किया करता था मैं लोगो से। आज मेरी जिंदगी ए... Read more

पढ़ना तो सीखो, लिखना खुद-ब-खुद सीख जाओगे

पढ़ना तो सीखो, लिखना खुद-ब-खुद सीख जाओगे। गिरना तो सीखो, उठाना खुद-ब-खुद सीख जाओगे। बोलना भी आजकल बच्चे सीखने जाने लगे हैं। सुन... Read more

माँ का प्यार

माँ का प्यार ज़िन्दगी जीने का अंदाज़ भले ये संसार देता है। पर जमाने से लड़ने की ताकत माँ का प्यार देता है। ज़िन्दगी में जीतने... Read more

फितरत इंसानों की

भला कौन नहीं रहा इंसान के निशानों पर मैंने खुदा को भी देखा है बिकते दुकानों पर खुद की दौलत से खुश नहीं है अब यहां कोई रखते हैं ... Read more