सब मिल कर इनको नमन करो

जो राष्ट्रधर्म पालक थे उनका हम अभिवादन कर लें इतिहास के पन्ने खोल हम उनको आज नमन कर लें नमन करें हम आओ तुलसी सूर कबीर की वाणी को... Read more

तुम्हें लड़ने का अधिकार नहीं

खुद आप हैं बैठे महलों में माता घुमे सड़कों पर जो माँ का दूध लजाते हैं धिक्कार ऐसे लड़कों पर गौ सेवा के नाम पे जो आडम्बर फैलाते हैं... Read more

अन्तर्द्वन्द्व

जब सभ्य समाज में इंसानी विषधर अपना फन फैलाता है जब राजनीति का छलिया दानव लोगों को छलने आता है जब अपना भारत बँटा हुआ हो धर्म जाति... Read more

जाने क्या क्या छूटेगा

सब कुछ अपना छूट गया है छूट गई लरिकाइं भी बचपन जिसके साथ गुजारा छूट गया वो भाई भी माँ का प्यारा आँचल छूटा छूट गई अँगनाइ भी पोखर त... Read more