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ग़ज़ल - बुरा लगता है

ग़ज़ल जब भी तुम रूठ के जाते हो बुरा लगता है आ के फिर रौब जमाते हो , बुरा लगता है । बात करते हो रकीबों से ग़िला कुछ भी नहीं ब... Read more

ग़ज़ल - बुरा लगता है

ग़ज़ल जब भी तुम रूठ के जाते हो बुरा लगता है आ के फिर रौब जमाते हो , बुरा लगता है । बात करते हो रकीबों से ग़िला कुछ भी नहीं ब... Read more

ज़िंदगी है माँ

‎ माँ है पिता चाँद ..चाँदनी है माँ गर है विश्वास बस वही है माँ। नास्तिक मैं कहीं न हो जाऊँ इक मेरी आस . वंदगी है म... Read more