आनन्द कुमार

हरदोई (उत्तर प्रदेश)

Joined January 2017

आनन्द कुमार पुत्र श्री खुशीराम गुप्ता
जन्म-तिथि- 1 जनवरी सन् 1992
ग्राम- अयाँरी (हरदोई) उत्तर प्रदेश
शिक्षा- परास्नातक (प्राणि विज्ञान)
वर्तमान में विषय-“जीव विज्ञान” के अन्तर्गत अध्यापन कार्य कर रहा हूँ । मुख्यत: कविता, कहानी, लेख इत्यादि विधाओं पर लिखता हूँ । इनके माध्यम से जीवन की निरन्तरता, मौलिकता, अपने विचारों एवं भावनाओं को रखने का प्रयास करता हूँ ।
email – akgupta.spn11@gmail.com

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मुक्तक : कह दो उनसे कि...

कह दो उनसे कि, हमारी गलियों से न गुजरा करें वो , हर शख्स की शख्सियत से न वाकिफ हुआ करें वो ।। कहीं बदनाम न हो जाएँ , मेरे अजीज... Read more

होली - महत्व एवं वैज्ञानिकता

सर्वप्रथम साहित्य पीडिया परिवार के रचनाकारों, हमारे परिवार जनों, गुरुजनों, इष्ट मित्रों, एवं हमारे समस्त विद्यार्थियों को होली की हा... Read more

"" माँ ""

'माँ माँ सभी कहें सम्मान सभी देते नहीं' , यदि करें सम्मान सभी वृद्धाश्रम कभी बने नहीं ।। 1 माँ के मातृत्व को पहचानो सभी द... Read more

"जश्न - ए - ईद"

ईद मुबारक ' ईद मुबारक 'जश्न - ए - सौगात' मुबारक बनने लगी सेवइयाँ मीठी - मीठी हामिद ने सप्रेम से भेंटी । मिलकर गले हम - सब ... Read more

मुक्तक : "ज़ुनून-ए-इश्क़"

ये तड़प भी बड़ी अजीब होती है , पर क्या करूँ ? दिल को अजीज होती है , छुप-छुप के मोहब्बत करने की जरूरत नहीं , हम तो ' वर्णान... Read more

होली - हाइकु

जीवन संग रहें होली के रंग प्रेम प्रसंग।। 1 प्रेम मिलन खिल उठे नयन हर्षित मन।। 2 मन्द पवन उड़ रहीं हैं लटें सम्भा... Read more

वसंत - हाइकु

पीली सरसों से उड़ी है तितली रंग रंगीली ।।1 बाट जोहती नीली पीली कंटेली आयी तितली।। 2 बेर रसीले तोड़े खाये बच्चों ने देख... Read more

मुक्तक : "दिल-ए-नादां"

इश्क़ का दीदार हर किसी को नसीब नहीं होता "शबाब-ए-हुस्न" का ख्वाब हर किसी का पूरा नहीं होता । "दिल-ए-नादां" तू समझता क्यों न... Read more

सच कहता हूँ...

सच कहता हूँ मैं मेरी बात पर गौर करो बुरी संगत में पड़कर न अपने आप को बर्बाद करो। भूल चुके हो अपने आप को कि कौन हूँ मैं ... Read more

बन्धन

उन बन्धनों को तोड़ना मुश्किल नहीं होता जो झूठे होते हैं, चाहें वो प्रेम के हों , या हृदय के जज़्बात के । ये तो मोम के बन्धन ... Read more

उन्हें प्रणाम

हे ! स्वतंत्र देश के वासी , निश्छल निष्पाप हृदय राशी जो दे गये तुम्हें अमृत दान , कर जोड़ करो उन्हें प्रणाम । जो मिट गये इस भू ... Read more

मुक्तक:"नूर-ए-दीदार"

पिय को अपने प्रेम की चाहत है, मेरे यार को मेरे इन्तजार की चाहत है । साअत (घड़ी) आ चुकी है, प्रेम मिलन की, मुझे मेरे "नूर-ए-दी... Read more

रंग गुलाल मोहे पिया लगावैं

रंग गुलाल मोहे पिया लगावैं लपकि-झपकि मोहे अंग लगावैं मैं उन पर जाऊँ वारी भरि पिचकारी मोहे मारी तन भी भीगौ मन भी भीगौ अँखियन-अँ... Read more

"ज़िन्दगी-एक : कर्म-पथ"

चल पड़ी जिस तरफ जिन्दगी मन्थर-मन्थर धूमिल पथ पर कुछ फिसलती कुछ सम्भलती मुट्ठी से जैसे रेत निकलती । सूर्य धुँधला सा, छिपा जा र... Read more

" नारी : तुम जीवन की आधार शिला "

नारी तुम जीवन की आधार शिला तुम ही जग जननी हो.... तुम ही लक्ष्मी, तुम ही दुर्गा तुम ही सती सावित्री हो तुम ही कोमल हृदय वाली त... Read more

" गुलाब "

फूलों के दर्द को किसी ने नहीं समझा है, लोगों ने उन्हें सिर्फ मुस्कुराते हुए देखा है, ये फूल गम मे... Read more

कह दूँ अगर...

कह दूँ अगर इक-बात तो नाराज तो न होगे... जाम लेकर हाथों से तो न छलकाओगे, अपने अधरों से जिसे तुमने लगाय... Read more

चल पड़ी जिस तरफ जिन्दगी

वह पूरब की अंधेरी गलियों से होता हुआ, हमारे पश्चिमी मोहल्ले की गली मे उसने प्रवेश किया, जो बिजली की रोशनी से जगमगा रही थी । अचानक ... Read more

"तेइस जनवरी:आज वह स्वर्णिम तारीख"

तेइस जनवरी आज वह स्वर्णिम तारीख जिसमें नेताजी ने जन्म लिया, सन् अट्ठारह सौ सत्तानवे ई0 मे उड़ीसा राज्य को सुशोभित किया, ....आज ... Read more

"अरूणाभा-एक बेटी के प्रति पिता का हृदय"

वह सुन्दर सी, कोमल हाथों में जब मेरे आयी, पुलकित हुआ हृदय मेरा जब देखा चेहरे पर लालिमा छायी । प्यारा सा सुस्मित चेहरा लग रह... Read more

बेटी को आगे बढ़ने दो

बेटी को आगे बढ़ने दो पढ़ने दो इसे पढ़ने दो, बेटों को जो सुख साधन दिये बेटी इससे वंचित क्यों ? बेटी को आगे बढ़ने दो । अपनी सों... Read more