Akash Yadav

Shahjahanpur

Joined September 2017

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।। जगत जननी ।।

हे गर्भवती तुम पार्वती, जिसने सारा संसार जना हे गर्भवती तुम भगवती, जिसमें सारा संसार बसा तेरे धैर्य और साहस से इस जग का निर्माण ... Read more

।। अंतर्मन ।।

मंजिल दूर नही है मेरी, बस कुछ कदमो की उधारी है मेरे सपनों में मेरे अपनो की, बस इतनी हिस्सेदारी है क्या बोलूं क्या न बोलूं मैं, ... Read more

रक्षक या भक्षक

जनता की रक्षा करने को, इन सबने कसमे खाई हैं कैसे की जाती है रक्षा, इसकी छवि दिखाई है ले - देकर सब समझौता करते, ऐसी नीति अपनाई है... Read more

मेरी माँ

मेरी माता मेरी भाग्य विधाता, ईश्वर भी जिसकी महिमा गाता, उसके चरणों में चारो धाम, सारा जीवन उसके नाम, मां की ममता की छाया क... Read more

शब्द

शब्दों से संसार चल रहा, शब्दों से इंसान, शब्दों से ही स्वरूप बन रहा, शब्दों से सम्मान, शब्दों से सौहार्द बढ़ रहा, शब्दों से घमासा... Read more

मैं और मेरी हिंदी

रोना धोना और हँसाना ये सब सिखाया हिंदी ने, कहना सुनना और सुनाना भी तो सिखाया हिंदी ने, माँ की ममता पिता का प्यार, जज्बात बताये ह... Read more

पेज की अभिलाषा

कॉपी के उस आखिरी पन्ने ने, ये सवाल आज पूछ लिया, लिखते तो सब शुरुआत से हैं, पर क्यों उसको मैला कर दिया । शिक्षक भी उन पन्नो को बड़... Read more

नारी

जीवन भर वो जिम्मेदारियां निभाती रही, कभी बेटी तो कभी माँ कहलाती रही, न डरती थी वो न थकती थी वो, एक अग्नि सी जलती थी वो, हौसल... Read more

मेरी अभिलाषा

तात अब मैं भी स्कूल जाऊंगा छोड़ के अपनी माँ की गोद, स्कूल में दौड़ लगाउँगा, माँ ने मुझको आधार दिया, तुमने मुझको अभिमान दिया इन ... Read more

मेरी विवशता

जब भी मैं किसी अस्पताल में जाता हूँ, तो खुद को पूर्ण विवश पाता हूँ, इलाज के नाम पर करते हैं ढोंग निर्ममता के नाम पर रहते हैं मौ... Read more