रचना क्षेत्र में मेरा पदार्पण अपनी सृजनात्मक क्षमताओं को निखारने के उद्देश्य से हुआ। लेकिन एक लेखक का जुड़ाव जब तक पाठकों से नहीं होगा , तब तक रचना अर्थवान नहीं हो सकती।यहीं से मेरा रचना क्रम स्वयं से संवाद से परिवर्तित होकर सामाजिक संवाद का रूप धारण कर लिया है।
कविता , शेर , ग़ज़ल , कहानियाँ , लेख लिखता रहा हूँ।

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बेबस को सताना ही अब दस्तूर हो गया

कुछ इस तरह ज़माने का दस्तूर हो गया थोड़ा जो उठ गया वो मद में चूर हो गया/ चलती है ये दुनिया तो उन्हीं के ही सहारे अब तो हर किसी ... Read more

दो माचिस की डिबिया

ये लाइक भी ले लो ये माइक भी ले लो भले छीन लो मुझसे संचार यंत्र ये ज्ञानी। मगर मुझको लौटा दो वो बचपन का साधन दो माचिस की डिबिया... Read more

दर्द अपने मैं काग़ज़ पर उतार देता हूँ

सिलसिला दर्द का थम गया होता, तू अगर मेरा ही बन गया होता, मुश्किलें मुझको तब तोड़तीं कैसे, सामने उनके तो मैं तन गया होता! ... Read more

हर कोई इतना ही अब दिलदार होना चाहिए

बिक रहा है झूठ तो इस क़दर जहान में, सच का भी तो कोई बाज़ार होना चाहिए/ नेक राहों पर जो चलना चाहता हर क़दम, उसको तो हर हाल में खुद... Read more

मेरी तरह वो भी बिखरता होगा

आया निकल मैं गाँव से दूर, पता कोई मेरा पूछता होगा। बात मन की वो कह न सके, बस निगाहों से ढूँढता होगा। दूर उससे हो आँखें हैं स... Read more

पसीने से ख़ुद को तो भिगाया करो

ग़म की हो या हो ख़ुशी का ही पल दोस्तों को तुम मत भूल जाया करो/ रिश्तों में कुछ नयापन सा आ जाएगा संग उनके तो महफ़िल सजाया करो/ ... Read more

मुक्तक

(1) ख़्वाब बुनता हूँ फिर उनको तोड़ जाता हूँ, ख़ुद को मैं तो हक़ीक़त से जोड़ जाता हूँ, कुछ ख़्वाब जीवन को बोझिल कर देते, ऐसे ख़्... Read more

हौसला ज़िंदा

१ ख़ामोश रात, सुलगा अहसास, तुम बिन मैं! २ ज़िंदगी जंग, किसी का नहीं संग, फिर भी रंग! ३ रोटी महँगी, है ज़िंदगी सस्ती, भूखी... Read more

प्रेम का ज्वार : भाग-२

प्रेम का ज्वार-भाग-२ ------------------- समय इसी तरह गुज़रता रहा । मेरा रुझान सिविल सेवा की ओर था , परंतु उसके लिए ... Read more

आँखों में पानी क्यों नहीं

ढूँढ रहा हूँ मैं तो जवाब इस सवाल का वतन पर मिटती है अब जवानी क्यों नहीं/ इस धरा पर दूर तक सागर का विस्तार है पर रही लोगों की आँ... Read more

न जाने किस घड़ी में ज़िंदगी की शाम हो जाए

जीवन के हर पल को खुलकर ही तुम जी लो, न जाने किस घड़ी में ज़िंदगी की शाम हो जाए। राह मुश्किल भी हो तो आगे बढ़ना ही मत छोड़ो, ... Read more

ऐ ज़िन्दगी, तूने बनाया ही कितना रूप है

ऐ ज़िंदगी , तूने तो बनाया ही कितना रूप है, कैसे-कैसे रंग अब तक मुझको दिखाती रही। समझ आया नहीं मुझको तेरा ये फ़लसफ़ा, किसी को ... Read more

देती है मुझे मौन वेदना

शब्दों की तराश करता हूँ, गीत नए-नए ही बुनता हूँ, जिन राहों में बिखरे काँटे हों, ऐसी डगर ही चुनता हूँ। है मेरी दु:साध्य साधना , ... Read more

एक मुक्तक

एक मुक्तक ख़याल ही अब तो बे ख़याल हो गए जवाब भी अब तो ख़ुद सवाल हो गए जिनकी ख़ातिर मैंने लूटाया ख़ुद को उन्हीं की निगाह मे... Read more

साथ ऐसा तुम मेरा निभाया करो

साथ ऐसा तुम मेरा निभाया करो, मेरे जीवन का साया बन जाया करो। थककर ठहरूँ मैं जब भी घनी धूप में, तुम पेड़ों की छाया बन जाया करो। प... Read more

तेरे प्यार का अहसास मुझको मुक्त करता है

बड़ी फुरसत से ख़ुदा ने तेरी सूरत बनायी है तभी तो तूने सूरत में ख़ुदा का नूर पायी है। मेरी हर सुबह तेरी इबादत से शुरू होती पर शाम क... Read more

थोड़ी राह ही शेष है

पाँव में छालें बहुत हैं , दूर तक कैसे चलूँ , पथ तो है अग्नि सरीखा , पार अब कैसे करूँ । पाँवों के मेरे ये छालें, मुझसे लेकिन कह ... Read more

मेरा वेलेंटाइन ज्ञान

आजकल एक वीक चल रहा है , जिसका समापन एक विशेष डे से होगा। रोज कोई न कोई डे का पता चल रहा है । इससे बहुत ज्ञानवर्धन भी हो रहा है । वैस... Read more

अभिलाषा के पंख फैलाओ

अभिलाषा के पंख फैलाओ कर्मों का विस्तार करो, स्वेद बिंदुओं से सिंचित कर सपनों को साकार करो। मिलता उसको तो उतना ही जितना ही वो क... Read more

ये जीवन है चंद वर्षों की

ये जीवन है चंद वर्षों की , फ़िक्र में क्यूँ इसे गुज़ारूँ मैं, हक़ीक़त से रु-ब-रु होकर, क्यूँ न हर पल इसे सँवारू मैं। कर्मों को न... Read more

ज़िंदगी की राह आसान हो जाए

हो हौसला तो मुश्किलें परेशान हो जायें, राह की बाधाएँ ही ख़ुद हैरान हो जायें, हर हाल में होंठों पे जो मुस्कान आ जाये, फिर ज़िंदगी... Read more

कविता भी बनी प्रोडक्ट है

अजब है दुनिया यहाँ चलती का नाम ही गाड़ी है, चलते-चलते ठहर गया जो वो तो राहों का अनाड़ी है। अब तो ये दुनिया बनी ही बाज़ार है आक... Read more

ख़यालों में उनके उलझने लगे हैं

नज़र ये मिली है उनसे ही जबसे हसरतें तो दिल के सँवरने लगे हैं। दिल में मेरे तो अब उमंगें जगी हैं साज तो दिल के भी बज़ने लगे है। क... Read more

वो क़ीमत लगाने आ गए

बिक रहे थे जज़्बात मेरे वो क़ीमत लगाने आ गए/ भर रहे थे जो ज़ख़्म मेरे फिर से जगाने आ गए/ फूलों को महक रहा था ख़ुशबू ही चुर... Read more

ज़िंदगी की दौड़

ज़िंदगी बढ़ रही आगे-आगे , आगे -आगे, मैं इसके ही पीछे दौड़ रहा भागे-भागे,भागे-भागे। पर पकड़ न पाता, क्योंकि कभी रफ़्तार, इसकी ... Read more

ऋतु बसन्त आ ही गया है

वसुधा का श्रृंगार किया है नूतन उमंग नव आस लिए ऋतु बसन्त आ ही गया है जीवन में तो उल्लास लिए। सूरज की तंद्रा अब भंग हुई शी... Read more

मुझसे रु-ब-रु तो हो

आए हो मुझसे मिलने तुम मुद्दतों के बाद दे सकते क्या वक़्त का सौग़ात भी नहीं/ आते ही तुम क्यूँ कह रहे जाने को तो ही अभी तो हुई ... Read more

प्रेम का ज्वार-१

भाग-१- प्रेम का ज्वार ----------------- प्रीति बेलि जिनी अरुझे कोई,अरुझे मूए न छूटे सोई। प्रीति बेलि ऐसे तन बाढ़ा,पलुहत ... Read more

फिर ज़रूरत क्या रोशनी की

रहनुमा जब हो ही जाय अंधा क्या ज़रूरत फिर रोशनी की। जहाँ चीख़ों को कोई सुने नहीं वहाँ कौन सुनेगा सिसकी की। Read more

पुत्रियाँ

पुत्र की चाहत,हो उसी की बादशाहत हमारे समाज की यही मनोवृत्ति है, पुत्री के जन्म पर होना झल्लाहट, नारी के प्रगति में बनी हुयी भित्त... Read more

काँटों पर चलने की तो मेरी फ़ितरत हो गयी

जब मैं पाया उसको ही सारी राह में बिखरे हुए काँटों पर चलने की तो मेरी भी फ़ितरत हो गयी/ जब मैं चाहा बन चिराग़ दुनिया को रोशन करूँ... Read more