Ajay Kher

Joined January 2017

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ज़िन्दगी कभी-कभी अजनबी सी लगती है...

अपनी होकर भी, ना जाने क्यूँ.... किसी और की लगती है.... ये ज़िन्दगी कभी कभी…. हाँ.....कभी-कभी अजनबी सी लगती है..... धड़कता तो है ... Read more

दहेज़ की अग्नि में स्वाह....

हीना का रंग अभी तक हाथो पर जवां था.... माथे पर बिखरा सिन्दूर हर लम्हे का गवाह था.... सिलवटे बिस्तर पर अभी भी ले रही थी करवटे... क... Read more