AJAY AMITABH SUMAN

FARIDABAD

Joined November 2018

अजय अमिताभ सुमन
अधिवक्ता: हाई कोर्ट ऑफ़ दिल्ली
मोब: 9990389539
E-Mail: ajayamitabh7@gmail.com
पिता का नाम:श्रीनाथ सिंह आशावादी
माता का नाम:उमा सिंह आशावादी
पैतृक स्थान:दाउदपुर, सारण, बिहार-841205
वर्तमान स्थान:दिल्ली

दिल्ली हाई कोर्ट में पिछले एक दशक से ज्यादा समय से बौद्धिक संपदा विषयक क्षेत्र में वकालत जारी। अनगिनत कानूनी संबंधी लेख कानूनी पत्रिकाओं में प्रकाशित। वकालत करने के अलावा साहित्य में रूचि रही है.अनगिनत पत्र , पत्रिकाओं में प्रकाशन।हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में समान अधिकार। प्रकाशन: रचनाकार , हिंदी लेखक , स्टोरी मिरर, मातृ भारती , प्रतिलिपि, नव भारत टाइम्स, दैनिक जागरण ,यूथ की आवाज , स्पीकिंग ट्री , आज, हिंदुस्तान, नूतन पथ, अमर उजाला इत्यादि पत्रिका और अख़बारों में रचनाओं का प्रकाशन।

आत्म कथ्य

जीवन में बहुत सारी घटनाएँ ऐसी घटती है जो मेरे ह्रदय के आंदोलित करती है. फिर चाहे ये प्रेम हो , क्रोध हो , क्लेश हो , ईर्ष्या हो, आनन्द हो , दुःख हो . सुख हो, विश्वास हो , भय हो, शंका हो , प्रसंशा हो इत्यादि, ये सारी घटनाएं यदा कदा मुझे आंतरिक रूप से उद्वेलित करती है. मै बहिर्मुखी स्वाभाव का हूँ और ज्यादातर मौकों पर अपने भावों का संप्रेषण कर हीं देता हूँ. फिर भी बहुत सारे मुद्दे या मौके ऐसे होते है जहाँ का भावो का संप्रेषण नहीं होता या यूँ कहें कि हो नहीं पाता। यहाँ पे मेरी लेखनी मेरा साथ निभाती है और मेरे ह्रदय ही बेचैनी को जमाने तक लाने में सेतु का कार्य करती है.

हृदय रुष्ट है कोलाहल में,
जीवन के इस हलाहल ने,
जाने कितने चेहरे गढ़े ,
दिखना मुश्किल वो होता हुँ।
हौले कविता मैं गढ़ता हुँ।

जिस पथ का राही था मैं तो,
प्यास रही थी जिसकी मूझको,
निज सत्य का उद्घाटन करना,
मुश्किल होता मैं खोता हुँ।
हौले कविता मैं गढ़ता हुँ।

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खा जाओ इसको तल के

शैतानियों के बल पे,दिखाओ बच्चों चल के, ये देश जो हमारा, खा जाओ इसको तल के। किताब की जो पाठे तुझको पढ़ाई जाती, जीवन में सारी ... Read more

सागर के दर्शन जैसा

तुम कहते वो सुन लेता,तुम सुनते वो कह लेता। बस जाता प्रभु दिल मे तेरे,गर तू कोई वजह देता। पर तूने कुछ कहा नही,तेरा मन भागे इतर कहीं... Read more

राजा और भिखारी

एक राजा जा रहा था शेर की शिकार में, पोटली लेके खड़ा था एक भिक्षु राह में। ये भिखारी घोर जंगल में यहाँ खो जाएगा, शेर का भोजन यक... Read more

राख़

जाके कोई क्या पुछे भी, आदमियत के रास्ते। क्या पता किन किन हालातों, से गुजरता आदमी। चुने किसको हसरतों , जरूरतों के दरमियाँ। ... Read more

पतवारें बनो तुम

मौजो से भिड़े हो , पतवारें बनो तुम, खुद हीं अब खुद के, सहारे बनो तुम। किनारों पे चलना है , आसां बहुत पर, गिर के सम्भलना है... Read more

व्यापार

दिल की जो बातें थीं सुनता था पहले ,सच ही में सच था जो कहता था पहले। करने अब सच से खिलवाड़ आ गया, लगता है उसको व्यापार आ गया। ... Read more

नए धर्म की की खोज

वेश्यावृति व्यसन से अकुलित पीड़ित और परेशान, व्यथित स्त्री ने आखिर में काटे निज पति के कान। पति ग्रसित संताप से अतिशय,पकड़ाने जा... Read more

मौजो से भिड़े हो पतवारें बनो तुम

मौजो से भिड़े हो पतवारें बनो तुम, खुद हीं अब खुद के सहारे बनो तुम। किनारों पे चलना है आसां बहुत पर, गिर के सम्भलना है आसां बह... Read more

संबोधि के क्षण

इन आंखों से नित दिन गुनता, रहता था जिसके सपने, वो भी तो देखे इस जग को, नित दिन आँखों से अपने। कानों में जो प्यास जगी थी, व... Read more

राष्ट्र का नेता कैसा हो?

राष्ट्र का नेता कैसा हो? जो रहें लिप्त घोटालों में, जिनके चित बसे सवालों में, जिह्वा नित रसे बवालों में, दंगा झगड़ों का क्रेता ह... Read more

राज क्या है?

अब समझ में आया,कि राज क्या है? इस शहर में जीने का,अंदाज क्या है? अकड़ के जो खड़ा था, नाहक हीं लड़ पड़ा था, तूफान का था मौसम, पर ज... Read more

नर है या कि मादा

लटक मटकती चाल गजब है समझूँ आधा आधा, अति कठिन ये प्रश्न है भैया , वो नर है या मादा? पैरों में हैं बाल बहुत पर हाथों में हैं च... Read more

क्यों नर ऐसे होते हैं?

कवि यूँ हीं नहीं विहँसता है, है ज्ञात तू सबमें बसता है, चरणों में शीश झुकाऊँ मैं, पर क्षमा तुझी से चाहूँ मैं। कुछ प्रश्न ऐस... Read more

निर्धारण

ख़ुदा की जफ़ा को जफ़ा मानते हो, है उसकी अता ये ना पहचानते हो। ये उसकी नहीं बन्दे तेरी खता है, ख़फ़ा है अकारण तुझे भी पता है। ... Read more

ईश विष दृश

जीवन के थपेड़ों के कारण मनुष्य में अनगिनत नकारात्मक प्रवृत्तियां जन्म ले लेती है , पर मानव इन प्रवृत्तियों को स्वीकार नहीं कर पाता. ... Read more

संबुद्ध

भावों में कोई भक्ति नहीं , फिर कैसे प्रभु का पान करे? जिसकी जिह्वा रस उन्मादित, वो कैसे ईश गुण गान करे? है तत्पर जो भौत... Read more

हेतु

हे मित्र वर , हे प्रिय वर, कैसा ये आलाप? मदिरालय से दूरी कैसी, कैसा नया प्रलाप? जो मधु सुख मिलता है तुमको, मदिरा और मदिरालय... Read more

ज्ञान और मोह

दो राही चुप चाप चल रहे, ना नर दोनों एक समान, एक मोह था लोभ पिपासु , औ ज्ञान को निज पे मान। कल्प गंग के तट पे दोनों, राही ... Read more

कैसे कहूँ है बेहतर ,हिन्दुस्तां हमारा?

कह रहे हो तुम ये , मैं भी करूँ ईशारा, सारे जहां से अच्छा , हिन्दुस्तां हमारा। ये ठीक भी बहुत है, एथलिट सारे जागे , क्रिकेट मे... Read more

पत्नी महिमा

लाख टके की बात है भाई,सुन ले काका,सुन ले ताई। बाप बड़ा ना बड़ी है माई, सबसे होती बड़ी लुगाई। जो बीबी के चरण दबाए , भुत पिशाच निकट ना... Read more

निर्द्वंद्व

लोग ईश्वर का साक्ष्य मांगते है . ये सृष्टि हीं ईश्वर का सबुत है . यहाँ अगर दिन है तो राज भी . सुख है तो दुःख भी . अँधेरा है तो प्रका... Read more

हौले कविता मैं गढ़ता हूँ

हौले कविता मैं गढ़ता हुँ मन को जब खंगाला मैंने, क्या बोलूँ क्या पाया मैंने। अति कठिन है मित्र तथ्य वो, बामुश्किल हीं मैं कहता... Read more

चांडाल

ये एक नकारात्मक व्यक्ति के बारे में एक नकारात्मक कविता है। इस कविता में ये दर्शाया गया है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी नकारात्मक प्रवृत्... Read more

राह प्रभु की

कितना सरल है, सच? कितना कठिन है, सच कहना। कितना सरल है, प्रेम? कितना कठिन है, प्यार करना। कितनी सरल है, दोस्ती, कि... Read more

राष्ट्र का नेता कैसा हो?

राष्ट्र का नेता कैसा हो? जो रहें लिप्त घोटालों में, जिनके चित बसे सवालों में, जिह्वा नित रसे बवालों में, दंगा झगड़ों का क्रेता ह... Read more

पुलवामा

लकड़बग्घे से नहीं अपेक्षित प्रेम प्यार की भीख, किसी मीन से कब लेते हो तुम अम्बर की सीख? लाल मिर्च खाये तोता फिर भी जपता हरिनाम, का... Read more

जीवन उर्जा

जीवन ऊर्जा तो एक हीं है, ये तुमपे कैसे खर्च करो। या जीवन में अर्थ भरो या, यूँ हीं इसको व्यर्थ करो। तुम मन में रखो हीन भाव, ... Read more

नीतीश तुम्हारी जय हो

जय हो , जय हो, नितीश तुम्हारी जय हो। जय हो एक नवल बिहार की ,सुनियोजित विचार की, और सशक्त सरकार की,कि तेरा भाग्य उदय हो, तेरी जय ह... Read more

धरती पे माँ कहलाती है

आओ एक किस्सा बतलाऊँ,एक माता की कथा सुनाऊँ, कैसे करुणा क्षीरसागर से, ईह लोक में आती है?धरती पे माँ कहलाती है। ब्रह्मा के हाथों से स... Read more

संस्कार

क्या कहूँ जब पापा और ,माँ झगड़ रहे थे , बिजली कड़क रही थी ,बादल गरज रहे थे. इधर से दनादन थप्पड़ ,टूटी थी चारपाई , उधर से भी चौकी औ... Read more