AJAY PRASAD

Joined November 2018

Blessed with family and friends

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विजयादशमी के बाद

जल गया रावण अहंकार रह गया फ़िर एक दफ़ा राम लाचार रह गया । मोह,माया ,क्रोध, वासना और लालच अंदर आदमी के ज़िंदा विकार रह ग... Read more

आज़ाद गजल

कत्ल कर के मेरा,कातिल रो पड़ा जब हुआ कुछ न हासिल, रो पड़ा । समंदर तो खुश था मुझे डूबो कर लाचारी पे अपनी साहिल रो पड़ा । आया त... Read more

आज़ाद गजल

"पढ़ी रचनाएँ आपने मेरी,मेरा काम हो गया की आपने तारीफें तो मेरा नाम हो गया । अब मुझे मरने का भी कोई गम न होगा कुछ पल को सही दिल मे... Read more

आज़ाद गज़ल

दिमागी दिवालियेपन की हद है ख्वाबों में जीने की जो आदत है । इमानदारी से मेहनत के बगैर ही चाह बेशुमार दौलत की बेहद है । हश्र पता... Read more

आज़ाद गज़लें

आशिक़ी मेरी दोस्तों अधूरी रही सच है कि ख्वाबों में भी दूरी रही । बेवफा क्यों उसे कहें हम भला कुछ तो अपनी ही मज़बूरी रही । न इज़हा... Read more

आज़ाद गजल

शिकवे, गिले, मलाल ,कुछ भी नहीं इससे बुरा तो हाल कुछ भी नहीं । वक्त के साथ हालात बदलते ही हैं तेरा और मेरा कमाल कुछ भी नहीं । द... Read more

आज़ाद नज़्म

गिर चुका है वो मेरी नजरों से ज़माने का क्या गुजर गया है वक्त मगर उस फसाने का क्या । चलो ठीक है आज वो मुतमईन हैं हालात स... Read more

तू बता

मै तो गया गुजरा ठहरा ,तू बता हाशिये पे हरदम ही रहा,तू बता । थी हैसीयत नही की बात रखता उपर से हुजूर भी खफा, तू बता । न दवा,न दु... Read more

नया साल मुबारक हो 2020के लिए

नया साल,नया दिन,नयी रात मुबारक हो वही मुल्क और वही हालात मुबारक हो । वही सुबह, वही शाम, वही नाम ,वही काम वही उम्मीदों की झूठी स... Read more

आज़ाद गज़ल

आसमां से गिर हम कर खजूर में अटकते हैं शायद लोगों की नज़रों में बेहद खटकते हैं । मंज़िलों से तो रहती है अक़्सर गुरेज़ मुझको बस बेखौफ ... Read more

रहने दे

सूरज की मानींद तू ढलना सीख ले गुजरते उम्र के साथ पलना सीख ले । तकलीफें बेहद राहत देंगी तुझे देख वक्त के सांचे में तू ढलना सीख ल... Read more

आज़ाद गज़ल

आईये फहराएं तिरंगा जश्न-ए-आजादी है हालात से मत हो अचंभा जश्न-ए-आजादी है बेरोजगारी,भ्रष्टाचारी,बलात्कारी के साथ साथ रहे कौम में... Read more

आज़ाद गज़ल

मुझे तुमसे मुहब्बत न थी, न है, न होगी खुद से ही वगावत ,न थी ,न है, न होगी । लाख करे कोशिश ये ज़माना मिटाने की मगर उसकी हैसीयत न ... Read more

आज़ाद गज़ल

होती है क्या तरक्की किसी गरीब से पूछो छिन गई हो जिसकी रोज़ी बदनसीब से पूछो । रहनुमा रहम दिल हो , ऐसा कभी नहीं हुआ किस कदर ये ख... Read more

आज़ाद गज़ल

रोज़ पढ़ता हूँ तुझे मैं अखबार की तरह सुनता हूँ तेरी हर बात समाचार की तरह । तू मुझे देखे या न देखे ये तेरी मरज़ी है मै तो देखता हूँ... Read more

आज़ाद गज़ल

रिश्ते भी अब रिसने लगें हैं गैर मुझे सब दिखने लगें हैं । कल तक था जो मन मुटाव बन के नासूर टिसने लगें हैं । सच्चाई, ईमानदारी, त... Read more

रंग,,,,,,,,,,,,,,,,,,,काई जैसे

काई जैसे! जम गये हैं रंग जीवन में काई जैसे रोज़ बिछ जाता हूँ मै चटाई जैसे । ज़िन्दगी भी यारों कमाल करती है बढ़ाती है ग... Read more

आज़ाद गज़ल

बड़ी खामोशी से सपने टूटते हैं बड़ी खामोशी से अपने लूटते हैं बड़ी खामोशी से । ज़र,जोरू या जमीन की खातीर रिश्ते छूटते हैं बड़ी ख... Read more

मेरी क़लम से

आईना मुझसे अक़्सर ये सवाल करता है अब इस घर मे कौन तेरा ख्याल करता है । कौन सुनता है भला चिखें तेरी नसीहतों की क्यूँ वेबजह ही फ़... Read more

माँ

माँ शब्द नहीं, संसार है माँ खुद में ही त्यौहार है माँ । हो अमीर या गरीब की एक पवित्र प्यार है माँ । दुख-सुख फिक्र,सब्र... Read more

मेरी क़लम से ...

रहने दे ... मेरी आँखों तेरे ख्वाब रहने दे उम्र भर को दिले बेताब रहने दे । कुछ पल को सही मान मेरी मुझे अपना इन्ताखाब रहने द... Read more