AJAY PRASAD

Joined November 2018

Blessed with family and friends

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कविता

बाल कलाकार * चौदह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नहीं है बाल मजदूरी कर के पेट पालने या कमाने का कानून अधिकार मगर टीवी शो... Read more

कविता

"स्त्री विमर्श " * लड़कियों को चाहिए आज़ादी रातों को बेखौफ़ घूमने की, दिनभर बेरोकटोक कोई भी काम करने की , अपने अनुसार चलने,फि... Read more

"गुस्ताखियाँ " आज़ाद गज़लें संग्रह और कविताएँ

नहीं लिखता मैं गज़लें गाने के लिए हैं सिर्फ़ ये बहरों को सुनाने के लिए । कभी मात्रा मैनें गिराया नहीं कयोंकि बहरें तो हैं बस लय मि... Read more

आज़ाद गज़ल

अपनी मक़बूलियत पे भी ध्यान देतें हैं इसलिए तो वो विवादित वयान देतें हैं। कहीं जंग न लगे लफ्जों के तलवार में उन्हें वो अक़सर म... Read more

आज़ाद गज़ल

क्या! तेरी कोई एक्स गर्लफ्रेंड नहीं है यानी तू अभी आशिक़ी में ट्रेंड नहीं है। लैला-मजनू वाला इश्क़ है आउटडेटेड इसलिए तू किसी क... Read more

आज़ाद गज़लें संग्रह

(1) जी लेंगे झोंपड़ी में हुजूर चिंता न करें यही है गरीबी का दस्तूर चिंता न करें । आप तो फ़िक्र करें अमीरों के लिए हम लोग... Read more

आज़ाद गज़ल

2122 2122 2212 चाहता जो हूँ मै वो ,कह पाया कहाँ वो असर मेरे सुखन में ,आया कहाँ । आप कहतें हैं तो शायद ,उम्दा ही हो मेरे ... Read more

आज़ाद गज़ल

गर सब बुरे हैं तो अच्छा क्या है अबे तू इतना सोंचता क्या है। नुक्स निकालता है हर बात मे अपने आप को समझता क्या है। तेरे जैसे... Read more

आज़ाद गज़ल

जंग लगी हुई ज़मीर का क्या करूँ दोस्तों हूँ गरीब,अमीर का क्या करूँ । जो हक़ में किसी के दुआ ही न करें उस मतलबी फ़कीर का क्या करूँ... Read more

आज़ाद गज़लें

(1) जी लेंगे झोंपड़ी में हुजूर चिंता न करें यही है गरीबी का दस्तूर चिंता न करें । आप तो फ़िक्र करें अमीरों के लिए हम लोग... Read more

आज़ाद गज़लें

212212212212 एक हसरत मेरी हाथ मलती रही ज़िंदगी छाती पे मूँग दलती रही । मै सितम उनके चुपचाप सहता रहा खामुशी भी उन्हें,... Read more

कविता

कविता पलती है अपने दम पर सार्थकता से, उपयोगिता से, पीढियों के सरोकार से, समीक्षा और तिरस्कार से। सामाजिक, आर्थिक, और... Read more

आज़ाद गज़ल

इतनी बेशर्मी अजय कहाँ से लाते हो जो बेबाक बेबह्र गज़लें लिखे जाते हो। ज़रा तो लिहाज़ करो बुजुर्ग शायरों का उनके किये कराए पर पानी ... Read more

आज़ाद गज़ल

लफ्ज़ रुठ जातें है और शेर चिढ़ जातें हैं शायरी में जब भी हम हाथ आजमातें हैं । गज़लें तो देतीं हैं जी भरकर गालियाँ मुझें जब भी उन... Read more

कविता

"दुशासन" देखते हुए टीवी पर समाचार पूछा जब बेटी ने क्या है सरकार , पुलिस और प्रशासन ? मैनें कहा मोडर्न ... Read more

आज़ाद गज़ल

घात लगाकर बैठे हैं इश्तेहार देखिए बनतें हैं अवाम कैसे शिकार देखिए । रोज़मर्रा की ज़िंदगी के जंग पर भी हावी है किस कदर बाज़ार देख... Read more

आज़ाद गज़ल

तज़्किरा =ज़िक्र सुनकर मेरी बातें देखिए उनको गुस्सा आ गया शायद उनके ही करतूतों का तज़किरा आ गया । दो दिनों तक तफतीश करके ही खा... Read more

आज़ाद गज़ल

क्या मिलेगा भला मुझे फरियाद कर के ! जब खुश हो खुदा ही बरबाद कर के । अब न लौटेंगे कभी इस गमे हयात में जा रहा हूँ मैं बद... Read more

आज़ाद गज़ल

सदियों से ही उचित न्याय की तलाश में हूँ दलितों,पीड़ितों औ शोषित के लिबास में हूँ । ज़िक्र मेरी भला कोई करे क्योंकर ग्रंथो में ... Read more

आज़ाद गज़ल

आई सी यू में है समाज क्या करें सूझता नहीं है इलाज़ क्या करें । नये दौर के बड़े स्मार्ट बच्चें हैं मानते नहीं रिवाज़ क्या कर... Read more

आज़ाद गज़ल

वाहीयात बातों से आपको हँसाते हैं आइये कपिल शर्मा का शो दिखातें हैं । फुहड़ता कितना हो गया है फायदेमंद लोग अब बेशरमी से फ़ायदा उ... Read more

कविता

"अपाहीज़ " खुद को बड़ा ही असहज असहाय अपाहिज सा पाता हूं जब सिवाय लिखने के कुछ नही कर पाता हूँ। -अजय प्रसाद Read more

आज़ाद गज़ल

वाहीयात बातों से आपको हँसाते हैं आइये कपिल शर्मा का शो दिखातें हैं । फुहड़ता कितना हो गया है फायदेमंद लोग अब बेशरमी से फ़ायदा उ... Read more

आज़ाद गज़ल

मौत का मज़ा तो चखना पड़ेगा कर्म का फल तो भुगतना पड़ेगा । तोड़ना गर है दुनियाँ के रस्मो को जिगर फौलाद का रखना पड़ेगा । चाहते है... Read more

आज़ाद गज़ल

मौत का मज़ा तो चखना पड़ेगा कर्म का फल तो भुगतना पड़ेगा । तोड़ना गर है दुनियाँ के रस्मो को जिगर फौलाद का रखना पड़ेगा । चाहते हैं... Read more

आज़ाद गज़ल

चांद मुझ पे झल्ला गया छत पे जब मैं भी आ गया । ज़ुल्फें क्या सहेज दी मैनें बादलों को गुस्सा आ गया । शाम मुहँ फुलाकर बैठ... Read more

गज़ल

2122 221 12 दिल लगाने की बात न कर इस जमाने की बात न कर । कौन कब धोखा दे दे यहाँ दोस्ताने की बात न कर मेरी किस्मत में ... Read more

आज़ाद गज़ल

रोया रात भर माहताब क्यों भीगा हुआ था गुलाब क्यों । नींद से कोई दुश्मनी तो न थी खफ़ा हो गए मेरे ख्वाब क्यों। सवाल तुम्हारे तिलम... Read more

आज़ाद गज़ल

दिल में रहते थे वो किराए के मकां जैसे भला मुझ को फ़िर समझते अपना कैसे । इल्म ही नहीं क्यों बिक गए मेहबूब मेरे इश्क़ में हुआ इस्... Read more

लड़ रहा आदमी

212 212 212 212 खुद से ही आज खुद लड़ रहा आदमी अपनी ही जात से डर रहा आदमी दौड़ते भागते सोते औ जागते सपनो के ढेर पर सड़ रहा आदमी... Read more

आज़ाद गज़ल

वो मुझको खतरों से आगाह करता है क्या सचमुच इतनी परवाह करता है। लह्ज़ा तो रहता है धमकियों से भरा क्यों मेरी गज़लों पे वाह वाह क... Read more

मुक्तक

'पूछता है भारत' कब तक करोगे तिज़ारत मुद्दे के नाम पे टुच्चे बहस और सियासत । गले फाड़ कर जो ब्रेकिंग न्यूज़ हो दिखाते क्या ऐसे ह... Read more

भाषा

भाषा पूरी धरती पर केवल मनुष्य ही एक मात्र प्राणी है जो अपनी जाती,धर्म,भाषा को लेकर काफ़ी सचेत रहता है वर्ना धरती पर ... Read more

जड़ हूँ

किसी ने लिखी नहीं कभी कोई कविता न कही कोई गज़ल न तारीफों के पुल बांधे किसी ने मेरी सुन्दरता पे । न मेरे मुरझाने पर कोई दुख... Read more

जड़ हूँ

किसी ने लिखी नहीं कभी कोई कविता न कही कोई गज़ल न तारीफों के पुल बांधे किसी ने मेरी सुन्दरता पे । न मेरे मुरझाने पर कोई दुख... Read more

मुक्तक

गिरे हुए लोग क्या किसी को उठाएंगे वो तो ओछी मानसिकता ही दिखाएंगे। विरासत में मिली हैं जो बिसंगतियां तो कहाँ से अच्छे संस्कार ला... Read more

मुक्तक

वो जो चीखते थे रील लाईफ में आज क्यों खामोश हैं वाईफ़ पे । -अजय प्रसाद खोखले रंगीनियों में डूबे हुए लोग ज़िंदगी की जंग से ऊबे ... Read more

जड़ हूँ

किसी ने लिखी नहीं कभी कोई कविता न कही कोई गज़ल न तारीफों के पुल बांधे किसी ने मेरी सुन्दरता पे । न मेरे मुरझाने पर कोई दुख... Read more

भाषा

भाषा पूरी धरती पर केवल मनुष्य ही एक मात्र प्राणी है जो अपनी जाती,धर्म,भाषा को लेकर काफ़ी सचेत रहता है वर्ना धरती पर ... Read more

आज़ाद गज़ल

किस दौर में जी रहें हैं ये क्या हो रहा है अवाम बेफ़िक्र है और सियासत रो रहा है। मिलकियत जिनकी,हैं मातम वही मनाते और वक्त बहती ग... Read more

आज़ाद गज़ल

गड़े हुए मुर्दे,यारों उखाड़ रहा हूँ पढ़ कर पुराने खत फाड़ रहा हूँ । कहीं कोई कमी न रहे भुलाने में यादों के चमन को उजाड़ रहा हूँ। हू... Read more

आज़ाद गज़ल

चलिए अच्छा है सोशल मीडिया पर लड़ रहे हैं तकनिकी तरिके से हाथ धोकर पीछे पड़ रहे हैं। जुबानी जंग बेहद फायदेमंद साबित हो रही है बिना... Read more

आज़ाद गज़ल

'वो' जिनके नाम से शायरीयाँ सुनाते हो क्या सचमुच तुम इतना प्यार जताते हो। प्यार कभी शब्दों में वयां होता है क्या फ़िर क्योंकर ... Read more

आज़ाद गज़ल

उम्र भर उनको ये शिकायत हम से रही आशिक़ी मेरी बुलंद उन के दम से रही । बेहद शुक्रगुज़ार हूँ मैं उस नजरें करम की जिंदगी मेरी गुलज... Read more

आज़ाद गज़ल

यारों मैं भी एक फ़ेसबुकिया साहित्यकार हूँ ये और बात मैं लिखता घटिया और बेकार हूँ । रहता हूँ मैं तलाश में दिन-रात मौज़ुआत के रख दे... Read more

आज़ाद गज़ल

बस केवल नाम से ही सरल है हास्य-व्यंग्य का वो काजल है । दिखने में कुछ खास तो नहीं मगर उगलता हमेशा गरल है । वाकिफ़ है अपनी औका... Read more

आज़ाद गज़ल

बस केवल नाम से ही सरल है हास्य-व्यंग्य का वो काजल है । दिखने में कुछ खास तो नहीं मगर उगलता हमेशा गरल है । वाकिफ़ है अपनी औका... Read more

आज़ाद गज़ल

मुहब्बत की मुश्किलें और कितना बढ़ाएगा तारीफों के लिए चार चांद कहाँ से लगाएगा । अपने पैरों पे तो ठिक से अभी खड़ा हुआ नहीं महबूबा ... Read more

आज़ाद गज़ल

खुद ही छपवा कर खुद बेच रहे हैं कर हम सहित्य की देख रेख रहे हैं । फेसबुक,व्हाट्सप ट्वीटर के जरिए महफ़िलौ मुशायरे में हो प... Read more

आज़ाद गज़ल

चिंता है उन्हें GDP गिर जाने का मिल गया मुद्दा दिल बहलाने का । सत्ता और विपक्ष दोनों हैं गिरे हुए मगर चिंता है बस कुर... Read more