हिंदी का उपासक, सहित्य प्रेमी । सांस्कृतिक बचाव के लिए एक छुपा हुआ छोटा सा कलम का पूजारी । विभिन्न विधाओं में रूचि के अनुसार लेखन करता हूँ । लेख तथा कहानी विशेष तौर से लिखना पसंद करता हूँ ।।

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शायरी

कभी नैन तरसते थे किसी के दीदार को, अरसे बीत गए, लोग भी बदल गए, मगर दिल आज भी खिल उठता है, देखकर अपने प्यार को...| तेरी एक इनका... Read more

एक अधूरा ख्वाब...

वो भी क्या पल थे जिसमें, मेरा हर शाम तेरे नाम था, मैं तुम्हें अपना मानता था, तुम मेरी जान थी, और मैं सिर्फ तुम्हें जानता था| न कि... Read more

माँ ......

माँ... माँ जीवन का आगाज़ है, माँ एक जीने का अंदाज़ है| माँ... माँ अपनेपन की आवाज़ है, माँ आनंद की आभास है| माँ... माँ प्रेम भ... Read more

पैसे का मोल

पैसा,वाह रे पैसा ! लोग पुछते नहीं है हाल, बेहाल होने पर गैर भी कूद आते है, पास में माल होने पर । मित्रता-शत्रुता पैसे का सब खेल ... Read more