Abhishek bharti

Joined October 2016

शिक्षक (गणित और हिंदी)

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हौसला

जख्म देती इस ज़िन्दगी को समर्पित कुछ पंक्तिया। मैं तो दरिया हूँ बहता ही चला जाऊंगा, तू जख्म दे मैं सहता ही चला जाऊंगा, तू न... Read more

सावन

शिर्षक=सावन मुझको भी कुछ अब कहने दो। ये जो सावन है इसे रहने दो। बरखा सा मैं भी तो बरसा था। उनके भी सितम अब सहने दो। सावन ने... Read more