मै अभिषेक सिंह ठाकुर मेरा गाँव पलका श्री में एक कृषक पिता का बेटा हूँ

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नजर

बड़ी प्यारी नजर से देखा था उसने मुझको तो चुपके देखा था जिंदगी थम गई थी जब मेरी उसने पलट कर मुझे देखा था Read more

रोज

रोज विखरता हू मोती की तरह अब पीरोने वाला धागा नही मिलता हैलाखो की इस जमाने मे मगर जो यार बिछडा वो दोवरा नही मिलता अभिषेक सिं... Read more

मेरी महफिल

मेरी महफिल मे वो आई तो रोशनी आई चाद मैं भी नहीं वो चाँदनी आई मुझको लगता हैं भगवान ने तोड़ दिया उस साचे जिस मे ढल तुम इस दुनिया म... Read more

कवि नहीं मे

कवि नहीं मे कोई बस तुकबंदी कर देता हु कुछ आपनी कह देता हु कुछ उनकी कह देता हु प्रेम बाग से प्रेम पोध से प्रेम पुष्प छू लेता ह... Read more