Abhilasha Chauhan

जयपुर

Joined October 2018

मेरा नाम अभिलाषा चौहान है और मैंने हिन्दी साहित्य में एम. फिल किया है। अध्ययन – अध्यापन के साथ साहित्य में अभिरूचि रखती हूँ और साहित्य – सरोवर में डुबकियां लगाती हूँ।
अपने मन के भावों को अभिव्यक्त करने के लिए कुछ रचनाएँ
गढ़ लेती हूँ ।मन की अनुभूतियों को शब्दाकार देने का प्रयास करती हूं।

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नदी की व्यथा

मैं सरिता पावन निर्मल, बलखाती बहती अविरल। करती रही धरा को सिंचित, भेद किया न मैंने किंचित। निर्मल सुन्दर मेरी धारा, स्नेह लुटात... Read more

कहीं -अनकही

कुछ कही अनकही बातें, अंतरतम में, सदा मचाती शोर है। उत्ताल तरंगें भावों की, लहराती पुरजोर हैं। अनुभूति की अभिव्यक्ति में, मुझको... Read more

हूँ मैं एक अबूझ पहेली

भीड़ से घिरी लेकिन बिल्कुल अकेली हूँ मैं हां, एक अबूझ पहेली हूंँ मैं कहने को सब अपने मेरे रहे सदा मुझको हैं घेरे पर समझे कोई ... Read more

**माँ**

मांँ, तू जीवन दात्री, तू ही है भगवान, मुझमें नहीं शक्ति करूं तेरा गुणगान। मांँ, तू ममता की मूरत अतुल्य अनुपम, किसी भी हाल में त... Read more

दास्तां ए दर्द

दास्तां ए दर्द कुछ टूट गया कुछ छूट गया रब रूठ गया सब छूट गया रिश्ता दिल का दिल से ही था तुम जब से गए दिल टूट गया दिल के टुक... Read more

मैं वीणा हूँ संगीत हो तुम

साथी जबसे तुम मेरे बने, साथ बुने हमने सपने। नयनों ने प्रेम-पुष्प चुने, भावों के सुंदर हार बने। मेरे जीवन का श्रृंगार हो तुम,... Read more