आनन्द बल्लभ

मानिला, अल्मोड़ा, उत्तराखंड

Joined November 2018

लेखन के प्रति मेरा आत्मिक जुड़ाव है

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परिस्थितियाँ

कली के भीतर बंद था, भ्रमर मन ही मन कंत था, न उपाय सूझा न स्थिति बूझा, बस फड़फड़ाता तंग था । सीमा स्वछंद न होकर के उसकी, घुट रहा थ... Read more

माँ वेदों के बोल हैं

चले गये तुम छोड़ अकेला कैसे पीड़ा दर्द सहें अब, निर्जन नीरव से जीवन में कैसे बिन तेरे रहें अब ? सब कुछ मिल जाये इस जग में पर माता... Read more