Aaquib zameel

Darbhanga (Bihar)

Joined February 2018

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धर्मनिरपेक्ष भारत

न कोई गाँधी न कोई पटेल है अब सब कुर्सी के पुजारी है । चोर, उचक्के, गुंडे, मवाली....... देश के सत्ताधारी है ।। क्या कभी धर्मनिरपेक्... Read more

अधूरी प्रेम कथा ......

नजरअंदाज करना उनका सबको खलने लगा । मैं ये सोच कर हैरान था ।वो क्यो अब मुस्कराती नही ।। शायद गलतियाँ हुई होंगी मुझसे। वो नाराज है... Read more

एक ख्वाब.........

न मैने कोशिश की भूल जाने की , न उसने किया कभी हमे अपनी यादों से आजाद । वैसे तो सबकुछ भूल चुका हुँ मैं , हाँ पर कुछ कुछ आ रहा है य... Read more

तालाश-ए-जिंदगी.....

चाहत कब थी दिल को, कोई हमराज भी हो मेरा। ढ़लते हुए से शाम को, मिले एक नया सवेरा ।। आदत सी हो गई थी , टटोलने की खुद को । न कोई रौशन... Read more

खामोश इश्क़........

उन्हें जब फिक्र इतनी है तो वो क्यों कह नहीं देते । भला किश्तों मे ऐसे कौन इज़हार करता है।। मेरे दिल में जो कुछ था वो सब मैंने आँख... Read more

माँ......

मेरे बचपन की सब यादें जहाँ से, होकर गुजरती है । हर ख्वाहिश, हर मन्नत मेरी आँखों में जिसके बनती सवरती है । मेरे चहरे की रंगत से... Read more

सज़ा-ए-मुहब्बत

देने को तो दे दूँ , सज़ा हर ज़ुल्म की जो तू मुझ पे करता है। अदालत भी अपनी ,गवाह भी अपने , पर इस दिल का क्या करूँ......... जो वकालत... Read more

तुम्हारी बेबाक बातें..........😊

क्या याद है तुम्हें ....... वो कसमें ,वो वादे , वो बेबाक से इरादे । हो घर छोटा सा एक अपना और बच्चे.......12 से भी ज्यादे । कुछ... Read more

ज़िन्दगी.....

ज़िन्दगी फिर से एक फसाना ढूंढती है । पास आने का बहाना ढूंढती है ।। मौत कब से खड़ी है, दरवाज़े पर । और ये है की, ना जाने का बहाना ढूढ... Read more

आठ साल की आशिफा ........

मासूम सी निगाहों में ,खौफ का वो मंज़र। थी हैवानियत सवार,जो उन ज़ालिमों के अंदर।। चीखती-चिल्लाती वो पुकारती रह रह कर । न कोई मददगार ... Read more

शर्मो-हया .........

हया तेरे निगाहों की, तेरी हर राज़ कह गई जो थी दिल में दफन अब तक ,वो सारी बात कह गई। निगाहों में हया का रंग सुरख लाल ग़हरा था तो... Read more

हूँ परेशान ......

हूँ परेशान खुद की जिंदगी से क्या करुँ अब कहाँ जाऊँ मैं । डर है ऐ खुदा , इस कश-म-कश में कहीं काफ़िर ना हो जाऊँ मैं । ... Read more

बिखरते ख्वाब

ख़ूबसूरती ख्वाब की , अब ख़ाक हो गई इश्क़ और फेराक़ (जुदाई ) की मुलाकात हो गई । बेख़ौफ़ खुले आसमान में बनाए थे घरौंदे हमने, और देखो ना... Read more

परिंदे ख्वाहिशों के ....

ख्वाहिशों के परिंदे अब फरफरा रहे हैं कुछ डेग भर रहे हैं ,कुछ लड़खड़ा रहे हैं । कल तक नहीं था जिन को , खुद पर यक़ीन देखो अब हौसले कि... Read more

पहली दफा

कुछ तो है ...., जो नींद मुझसे ख़फा है । है इश्क ये , या नादानी दिल की पर जो भी है , पहली दफा है ।। "स... Read more

तुम्हारी यादें........

अपनी यादों से कहो ना , मुझे नींद के हवाले छोड़ दे। भूल जाए अब मुझे , सारे रिश्ते-नाते तोड़ दे ।। :- सैयय्द... Read more