सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’

फ़तेहपुर उत्तर प्रदेश

Joined September 2018

कवि एवं लेखक

Books:
मैं और मेरी कविता, किरण सफलता की आधारशिला,आपदाएँ परिचय एवं प्रबंधन, सरदार पटेल चरित मानस(महाकाव्य),प्रखर सतसई(दोहा संग्रह)

Awards:
समाज सेवा, आपदा प्रबंधन, कवि व लेखक के रूप में विभिन्न सम्मान व प्रशस्ति पत्र

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माँ का अनादर

माँ तो इतना चाहती , बेटा बने महान । कभी प्यार से डाँट से ,कभी पकड़ती कान ।। कभी पकड़ती कान ,कभी पकवान बनाती । ... Read more

माँ (कविता)

माँ तेरी वो थपकी लोरी , भूल नहीं क्यों पाती है । बचपन वाली प्यारी बोली,याद मुझे फिर आती है।। मेरा बेटा राजा बेटा ,कहकर मुझे... Read more

दोहे

कभी गाय के नाम में,कभी धर्म के नाम । नेता साधू दे रहे ,भाँति- भाँति पैग़ाम ।। राजनीति में है बहुत ,आज ग़ज़ब का स्वाद । जिधर ... Read more

भाषा की मर्यादा(दोहे)

आज ‘प्रखर’यह देखकर, अब आता आवेश । राजनीति में दे रहे , भाँति-भाँति उपदेश ।। उनको पप्पू कह रहे , बिना ठोस आधार । ... Read more

कविता (माँ)

माँ तेरा वह लालन पालन, तेरा वह दुलराना । थपकी,लोरी,तुतली बोली,आँचल दूध पिलाना । याद बहुत आता है सब ,तुझको बहुत सताना । माँ तेरा व... Read more

कविता (माँ)

माँ तेरा वह लालन पालन, तेरा वह दुलराना । थपकी,लोरी,तुतली बोली,आँचल दूध पिलाना । याद बहुत आता है सब ,तुझको बहुत सताना । माँ... Read more

प्रखर देख हैरान

भारतवासी एक हो, मान रहे क्यूँ हार । लोकतंत्र के राज में, तुम ही हो सरकार।। दान और मतदान में, केवल दे लो ध्यान । सारे कष्टों क... Read more

प्रखर देख हैरान

भारतवासी एक हो, मान रहे क्यूँ हार । लोकतंत्र के राज में, तुम ही हो सरकार।। दान और मतदान में, केवल दे लो ध्यान । सारे कष्टों क... Read more

दोहा

आज हमें लगते नहीं, मात पिता भगवान । इधर उधर हैं खोजते, ‘प्रखर’देख हैरान ।। Read more