गीत

लिखना मैंने छोड़ दिया है’’ *********************** अपनी रैन-कथाओं को खत लिखना मैंने छोड़ दिया है वादों की प्रतिध्वनियों में ... Read more

गीत

आज पिताजी ************ आज पिताजी शहर छोड़कर गाँव लगे जाने बोल रहे हैं शहरों में अब साँस अटकती है घर में बैठी पड़ी ... Read more

दोहे

पगडंडी का पाट ************* खड़ा रेत पर मौन है, प्रौढ़ नदी का घाट. बाट देखता भीड़ का, पगडंडी का पाट. खेल रहा है फेसबुक, एक विल... Read more

गीत

बहुत हो गये ********** शब्दों की इस पीच सड़क पर चलने वाले बहुत हो गये लय-यति-गति का शब्द-योनि का बदल गया है तौर-तरी... Read more

दोहे

नहीं कहीं है झोंपड़ी ***************** नहीं कहीं है झोंपड़ी, कहीं न रोटी-दाल. सड़क किनारे झाँकते, फटे-फटे तिरपाल. पता नहीं अब... Read more

गीत

मित्रो ! जय माँ शारदे !! जय वसंत !!! **************** हर पतझड़ के बाद **************** एक नया ऋतुराज हँसा है हर पतझड़ के बा... Read more

दोहे

प्रेयस एक जुनून *************** रख सकते घर को नहीं, किसी तरह गुलजार. सौ रुपये की दोस्ती, एक फूल का प्यार. धूप ठहाका मारती,... Read more

गीत

बSलिया के बिजूली ***************** (भोजपुरी गीत) आवS तनी सूति लींजा सजनी थकान बा सSऊसे सरेहिया में एकही बा ढेला नींनि ... Read more

मुक्तक

मुक्तक बुढ़ापे का सहारा जो रहीं ये लाठियाँ देखो दुकानों पर सजी हैं किस तरह ये लाठियाँ देखो बगावत आज तक इनको कभी करते नहीं देखा ... Read more

कुण्डलिया

कटी पेड़ की छाँह *************** शहरों-शहरों गाँव में, कटी पेड़ की छाँह नहीं पकड़ती बाँह अब, किसी बाँह की बाँह किसी बाँह की बाँ... Read more

दोहे

डंडे झंडे शोरगुल ************** सत्ता-सुख की भूख ने, ऐसा मारा डंक. दिल्ली तक है आ गया, ढाका का आतंक. डंडे झंडे शोरगुल,... Read more

गीत

गरम जलेबी ********** नहीं फटकती घर-आंगन में आज कहीं गौरैया उजड़ गये हैं टँगे घोंसलों के वे पावन अड्डे उभर गये हैं द... Read more

गीत

‘छ्ठुआ’ पास हुआ *************** कई साल के बाद आठवीं ‘छ्ठुआ’ पास हुआ सोमवार व्रत व्रत एकादशी सालों तक आये शनि-मंदिर ... Read more

गीत

आते-आते आयेंगे *************** दूर देश से आये पंछी दूर देश जब जायेंगे पहुँचेगा संदेशा परिजन आते-आते आयेंगे करवट बदलेगी ... Read more

बाल कविता

खाला रहती खालापार ******************* खाला रहती खालापार खाला के हैं बेटे चार टंपक टोली दाल बलंडी भंभक भोली ठंक ठिठोली खा... Read more

लेख

आम आदमी की व्यथा-कथा का अनुलोम-विलोम -डा.शिवजी श्रीव... Read more

कुंडलिया

करना है 'जल संचयन' ******************* करना है ‘जल संचयन’, जल है ‘दूध अमूल’ ‘रहिमन पानी राखिये’, ‘बात’ न जान भूल बात न जाना भ... Read more

गीत

मैं गीत लिखता रह गया ********************* टूट सब सपने गये मैं गीत लिखता रह गया छूट सब अपने गये मैं गीत लिखता रह गया आँधी... Read more

गीत

हे ! जनपथ के राजा ***************** हम रोज कुआँ खोदे हम रोज पिये पानी हे ! जनपथ के राजा हे ! जनपथ की रानी बीजों का ताज... Read more

लेख

आम आदमी की व्यथा-कथा का अनुलोम-विलोम -डा.शिवजी श्रीव... Read more

दोहे

उपवन के गुंजन बने, कवि के सुंदर गीत. आज उतारे आरती, माला जपे अतीत. कवि ही लिखता है सदा, जीवन का इतिहास. चाहे भूखी भूख हो, चाह... Read more

गीत

भाव कहाँ से लाऊँ ---------------- शब्दों की डोली सजवाऊँ भाव कहाँ से लाऊँ दर्दों की लोरी सुनवाऊँ घाव कहाँ से लाऊँ अक्षर ... Read more

बालगीत

हम सोयेंगे ;;;;;;;;;;;;;;;;;; माई माई बिछा चटाई हम सोयेंगे मौसम है कुछ ठण्डा-ठण्डा आज न होगा गिल्ली-डंडा मत सुलगाओ... Read more

नवगीत

मुटुरी मौसी ********** चढ़ी बाँस पर पतई तोड़े बछिया खातिर मुटुरी मौसी झुककर पकड़ी ऊँची फुनगी जीती केवल अपनी जिनिग... Read more

गीत

ऐ हवाओ ! बताओ जरा ********************* प्राण लेकर गई हो कहाँ ऐ हवाओ ! बताओ जरा खलबली सी मची है यहाँ ऐ हवाओ ! बताओ जरा ... Read more

बाल गीत

होरी चाचा लाये गाय ****************** होरी चाचा लाये गाय गाय पिलाती अपनी बाछी नाम पड़ा है सोनागाछी लाल-दुपट्टा लाये कीन कु... Read more

नवगीत

कवि नहीं हूँ ********** एक अदना आदमी हूँ कवि नहीं हूँ मैं गरीबी की गली की गंदगी हूँ आँसुओं का बोझ बोझिल बंदगी हूँ एक... Read more

नवगीत

आग अंदर थी ************ पिता की लत थी कि वह बीड़ी जलाते थे आग अंदर थी जिसे अक्सर बुझाते थे नहीं छूते थे कभी सिगरेट की ड... Read more

नवगीत

हो सके तो क्षमा करना --------------------- हो सके तो क्षमा करना जो कहीं गलती हुई हो है असंभव कुछ नहीं यह बात संज्ञावान ... Read more

नवगीत

पेट को मैं टाँग आया --------------------- भूख की उस अरगनी पर तंग आकर पेट को मैं टाँग आया असह दुःख की मकड़ियों का सह चुका ... Read more

नवगीत

हम ठहरे गिरमिटिया -------------------- हम ठहरे गिरमिटिया बाबू तुम साधन संपन्न घर में निखहर फूटी कौड़ी सेंकी है बस रोट ... Read more

बाल गीत

खाला रहती खालापार -------------------- खाला रहती खालापार खाला के हैं बेटे चार टंपक टोली दाल बलंडी भंभक भोली ठंक ठिठोली ... Read more

दोहे

औद्योगिक क्षमता लिये, उन्नति का मधुमास. गुड़ गुल चीनी जैगरी, बदलेंगे इतिहास. हरियाली की हो छटा, नई फसल का अन्न. हर किसान का स्व... Read more

नवगीत

कह रहा है मन -------------- जिन्दगी को और जी लो कह रहा है मन गगन की ऊँचाइयों तक झाँकता है डर काटने को दौड़ता है खि... Read more

नवगीत

हे नदी ! ------- घाटियों की खाइयों की पर्वतीय ऊँचाइयों की चोट तुम सहती रही हो हे नदी ! मेघमाली पुण्य सलिला भूमि ... Read more

समकालीन कविता

माँ तुम एक छतरी हो नीली छतरी जिसमें क्षितिज ही नहीं क्षितिज के उस पार का भी एक-एक कोना यहाँ तक कि तल-अतल-चराचर एवं ... Read more

नवगीत

पहन रहा है मोजा जूता --------------------- पहन रहा है मोजा जूता सता रहा है शीत दस्तानों से बिठा लिये हैं अंगुलियों न... Read more

नवगीत

मित्रो ! आज एक गीत **जो लिखा था पत्र तूने** जो लिखा था पत्र तूने आज से दो साल पहले कल मिला है सीप में मोती जमा ज्यों बा... Read more

नवगीत

मित्रो ! ``````````````````````` ‘’*मौन रहने का अर्थ*’’ ````````````````````````` मौन रहने का नहीं है अर्थ सब कुछ मान लेना ... Read more

नवगीत

बुरे दिन ! किसकी छत के नीचे गुजरे कल की लम्बी रात बुरे दिन ! पूँजीवादी प्रधी क्रियायें वैश्वीकरण-प्रभाव कब सहलाये ... Read more

नवगीत

**शब्दों की चकबंदी** पंखनुचे पंछी की पीड़ा शब्दों की चकबंदी गीत भावभूमि का शिला-लेख चिर अर्थ-गगन का श्याम-विवर भावपक्ष... Read more

नवगीत

‘नथुआ’ की मौसी -------------- पतई रही बुहार ‘बगइचा’ ‘नथुआ’ की मौसी पीट ‘महाबल’ ‘घरभरना’ को भेज दिये ‘बहराइच’ उतरे क... Read more

नवगीत

लगे किसान पिता पकड़े हल की मूँठ खुरदरी लगे किसान पिता मीसिरजी के कल का आटा पचा न पाता पेट कभी डबलरोटी से चसका नहीं ... Read more

नवगीत

**मजूरी पेट होती है** कमाती और खाती है मजूरी पेट होती है कहीं है पालना माँ है कहीं पोंछा कहीं बरतन निरंतर नाम बदली ह... Read more

पवन-डाकिया

पवन-डाकिया पवन-डाकिया लेकर आया खुले गाँव की मधुरिम गंध मिलने पहुँचे नदी किनारे तोड़-ताड़ तरलित तटबंध तितली फिसली भ... Read more

नवगीत

लौट आओ गाँव अब तुम सुन रहा हूँ इस तरह कुछ हो चला है और मधुरिम आपसी संबंध लौट आओ गाँव अब तुम अब सटे हैं प्रेम-पर्यक ... Read more

नवगीत

*दस चावल का दो चावल* अगली सुबह अँधेरी होगी चौकस रहना है पुनर्जन्म का पता लिख लिये छिली हथेली पर गई सदी का नाम लिख लिये ... Read more

नवगीत

आखिर कब तक लज्जा ढोये ‘शब्दों पर पहरे हैं’ फिर भी ‘पंखुड़ियों पर गीत’ ‘लिखने का कारण’ ‘अंधायुग’ है ‘मुर्दों का गाँव’ ‘पल... Read more

माँ

‘माँ’ निकलती है सबेरे-सबेरे अकेले-अकेले ले बुढ़ौती का सहारा ठेगनी छड़ी माँ ! पास वाले पार्क में जहाँ फूलों से बतियात... Read more

नवगीत

नवगीत हूँ मैं यदि नई कविता हो तुम संचेतना ! नवगीत हूँ मैं यदि हो तुम मधुरिम गजल परिकल्पना ! जनगीत हूँ मैं यद... Read more