साहित्यिक उपनाम-प्रखर है। १९९५ में ३ फरवरी को गाँव-सावन(जिला-नीमच)में जन्मा वर्तमान और स्थाई पता-गाँव-सावन ही है। भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखता हूँ । व शिक्षा-१२ वीं तथा मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नीशियन का डिप्लोमा है। कार्यक्षेत्र-नीमच ही है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत एक संस्थान से जुड़ा होकर समाजसेवा करता हूँ । लेखन विधा-लेख और कविता है। प्रकाशन में मेरे नाम ‘धरोहर अपनों की’ किताब है तो अखबारों में भी रचनाएं छप रही हैं। प्राप्त सम्मान में महफ़िल-ए-ग़ज़ल साहित्य समागम सम्मान, प्रजापति अनमोल रत्न सम्मान, साहित्य सारथी सम्मान 2018 हैं। ब्लॉग पर भी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा को आमजन तक लोकप्रिय करना,युवाओं को जागरूक करना,गरीबी के अभाव में दबी-कुचली प्रतिभाओं को मंच प्रदान करवाना,गरीब परिवार का सहयोग करना और हर वर्ग के लिए कार्य करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और बालकवि बैरागी है, व सभी रचनाकारों को पढ़ता हूँ, प्रेरणा पुंज-कवि दादू प्रजापति हैं। विशेषज्ञता-चिकित्सा प्रयोगशाला कार्य में है।

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अंतरम से मनुहार / प्रवीण प्रजापति

रूठूँ कैसे तुमसे सजनी तुम ना करते मनुहार प्रेम है फीका बिन इसके ज्यूँ जल बिना मछली ..... पागल प्रेमी बन के राह निहारूं तुम खु... Read more

अंतर्मन के एहसास मैं छाया की प्रतिछाया

प्रवीण, नाम और ये काया छाया हो तुम ,प्रेम की मेरी मैं छाया की प्रतिछाया युगों युगों से जीते आये जिस पावन 'अनाम' को हम समय की ... Read more

तु ही मेरा श्याम

तु ही तो है मेरे जीवन की सच्चाई, तु ही मेरा ईश्वर तु ही मेरा श्याम। तेरा रहे आशीष तो मैं कुछ भी कर जाऊं, श्याम तेरे चरनों में ह... Read more

तु ही मेरा श्याम

तु ही तो है मेरे जीवन की सच्चाई, तु ही मेरा ईश्वर तु ही मेरा श्याम। तेरा रहे आशीष तो मैं कुछ भी कर जाऊं, श्याम तेरे चरनों में ह... Read more

उनको नमन हमारा

बलिदान हुए जो वीर जवां, उनको नमन हमारा।। बिना मतलब के वीरों ने, दुर्बल को नहीं मारा। जो शहीद हुए सरहद पर, उनको नमन हमारा... Read more

"मैं कवि हूँ"

प्रवीण कि कलम से..... "मैं कवि हूँ" ----------------------- प्रेरणास्त्रोत गुरूवर कवि दादू प्रजापति जी ,,, ------------... Read more

माँ

प्रवीण कि कलम से.... -------------------------- माँ पर कविता "मेरी माँ" --------------------------- बचपन में माँ... Read more

वर्ष कम हो चला

जिन्दगी का एक और वर्ष कम हो चला, कुछ पुरानी यादें पीछे छोड़ चला.. कुछ ख्वाइशें दिल में रह जाती हैं.. कुछ बिन मांगे मिल जाती हैं... Read more

साल के आखरी महीने में चंद लाईने

साल के आखरी महीने में चंद लाईने जिंदगी से हर पल, एक सिख मिली, कभी कभी नहीं, हर रोज मिली, एक अच्छा गुरु मांगा था जिन्दगी से,... Read more

जाग युवा जाग

प्रवीण कि कलम से..... "जाग युवा जाग" जाग युवा जाग देख बापू कि बैटी को भारती कि शान है,,वो हर युवा कि प्रेरणास्त्... Read more

सिन्दूरी मुस्कान

सिन्दूरी मुस्कान नयनों में मधुशाला झलके, अधरों पर खिले फूल पूनम के। मुख पर दमके चन्द्र ज्योत्सना, मुसकाओ जो हल्के हल्क... Read more

गुरू वंदना

प्रवीण कि कलम से........ """""""""""""""""""" गुरु वंदना ------------------- गुरू दादू कि वंद... Read more

अजनबी से मुलाकात

प्रवीण कि कलम से ....... कवित्री प्रेरणा ठाकरे को समर्पित कविता "अजनबी से मुलाकात" एक अजनबी, से, यूँ मुलाकात, हो गई फिर क्... Read more

नववर्ष

नववर्ष की नयी सुबह नयी कलम और नयी डायरी काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि मंत्रमुग्ध हो जाएँ दुनिया सारी खामोश जुबां के शब्द बनूं टूटे स... Read more