अशोक डंगवाल

हिण्डोलाखाल ( देवप्रयाग )

Joined September 2019

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" जोखिम भरी ज़िन्दगी "

जीवन की विडंबना है यही, ये बडती ही चलेगी, बढोगे जितना प्रयास कर, सफल करती चलेगी || रुक जाओगे थककर, तो सिलसिला थम चलेगा, साँसे... Read more

शृंगेरी के सघन वन (कविता)

|| जय माँ शारदे || " शृंगेरी के सघन वन " शृंगेरी के सघन वन मन को बहुत लुभाते हैं, जीवन को जीने का एक नया अ... Read more