लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

स्याँकुरी(धारचूला)

Joined July 2017

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माली को सिर्फ शूल से

जब से वफा जहाँन में मेरी छली गयी आँखों में डूबने की वो आदत चली गयी।१। नफरत को लोग शान से सर पर बिठा रहे हर बार मुँह पे प्या... Read more

सौदा जो सिर्फ देह का

दिल से निकल के बात निगाहों में आ गयी जैसे हसीना यार की बाहों में आ गयी।१। धड़कन को मेरी आपने रुसवा किया हुजूर कैसे हँसी,... Read more