लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

स्याँकुरी(धारचूला) उत्तराखण्ड

Joined July 2017

Copy link to share

जीवन के रंग

जीवन के रंग - दोहे रंग जहाँ आनन्द का , मन को करे अनंग करे प्रेम की भावना, जीवन को सतरंग।१। * कहीं बरसती आँख हैं, कहीं छाँव... Read more

खुशियों का मौसम

खुशियों का मौसम यहाँ, रहता है दिन चार करती है फिर जिन्दगी, बस दुख का व्यापार।१। ** खुशियों का मौसम नहीं, पाता है हर एक इसको क... Read more

जमीनें छीन के करते

सिखाते क्यों हमें हो तुम वही इतिहास की बातें दिलों में घोलकर नफरत नये विश्वास की बातें * बताओ घर बनेगा क्या हमारा... Read more

गरीब का पेट

बड़ा जालिम होता है गरीब का पेट नहीं देता देखने सुन्दर-सुन्दर सपने गरीबी के दिनों में छीन लेता है वह सपना देखने का हक जब क... Read more

जीवन को नर्क नित किया मीठे से झूठ ने

भटकन को पाँव की भला कैसे सफर कहें समझो इसे अगर तो हम लटके अधर कहें।१। ** गैरों से जख्म खायें तो अपनों से बोलते अपनों के दुख... Read more

शौक से लूटे जिसे भी लूटना है

आप कहते आपदा में योजना है सत्य में हर भ्रष्ट को यह साधना है।१। ** बाढ़ सूखा ऐपिडेमिक या हों दंगे चील गिद्धों के लिए सद्... Read more

गाँव के दोहे

गाँव के दोहे संगत में जब से पड़ा, सभ्य नगर की गाँव अपना घर वो त्याग कर, चला गैर के ठाँव।१। *** मिलना जुलना बतकही, पनघट पर थी खू... Read more

माली को सिर्फ शूल से

जब से वफा जहाँन में मेरी छली गयी आँखों में डूबने की वो आदत चली गयी।१। नफरत को लोग शान से सर पर बिठा रहे हर बार मुँह पे प्या... Read more

सौदा जो सिर्फ देह का

दिल से निकल के बात निगाहों में आ गयी जैसे हसीना यार की बाहों में आ गयी।१। धड़कन को मेरी आपने रुसवा किया हुजूर कैसे हँसी,... Read more