Mamta Singh Devaa

Varanasi , Durgakund

Joined June 2020

” लेखन से अपने मन को संतुष्ट और लेखनी को मजबूत करती हूँ ”

मैं भारत से Pottery & Ceramic विषय से Masters ( BHU 1993 ) करने वाली पहली पहली महिला हूँ वाराणसी में मेरा इकलौता Pottery Studio ” AAKKAAR ” है ।

National Cultural Scholarship – Ministry of HRD (1994 – 96 Pottery & Ceramic )

Senior Fellowship – Ministry of culture ( 2015 – 16 Pottery & Ceramic )

Award – Potter of the year 2015 & 2017 ( Organized by AIFACS New Delhi )

लेखन मेरा दूसरा पहलू है कविता , लघु कथा और कहानियां लिखती हूँ ।

सांझा काव्य संकलन – 2018
सांझा लघु कथा संकलन – 2019
पहला काव्य संकलन – ” गढ़ते शब्द ” Nov 2019

लघुकथा लोक – लघुकथा रत्न सम्मान

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प्रभु श्री राम

कल रात प्रभु सपने में आये थोड़ा मंद मंद मुस्काये , मैने पूछा प्रभु खुश तो हैं अब जानती हूँ आप ही का खेल है सब , प्रभु ये सुन फिर ... Read more

" प्यार की अपनी परिभाषा "

(संस्मरण ) बात क़रीब 42 साल पहले की है मैं और मुझसे डेढ़ साल बड़ी बहन इलाहाबाद के क्रॉस्थवेट गर्ल्स इंटर कॉलेज के हॉस्टल में सबसे... Read more

माँ......

इतना छोटा शब्द नही है जिसको विद्वानों के विद्वान भी स्वर - व्यंजनों के बंधन में बाँध पायें इस गूढ़ शब्द को शब्दों की सीमा में समां... Read more

" निर्मोही बरखा "

ये कैसी निर्मोही बरखा है इसने सब मोह पानी में दे पटका है , कुछ दिन पहले ही तो छाई थी छत कैसे संभलेगी मूसलाधार में इस वक्त , जमीन... Read more

" नजरिया "

स्मृति के पेट की चमड़ी हल्की - हल्की फटती तो वो फटन उसको बड़ा दर्द देती पहली बार माँ बन रही थी कुछ पता था नही क्या करे समझ नही पा रही ... Read more

चाह

कहते हैं... प्रेम ईश्वर है शरीर नश्वर है , फिर क्यों नश्वरता के पीछे पागलपन में हो खीचें , शरीर को ना गलाओ चलो अलख जगाओ , चा... Read more

यादें...यादें...यादें... ( Happy Friendship Day )

चलो आज पुराना एलबम खोलते हैं दोस्तों को दिल की बातें याद कराते हैं , कैसे सब किसी बात पर मुँह फुलाते थे और हर थोड़ी देर पर सबको मन... Read more

" पूर्ण विराम "

ये जीवन है इस जीवन में जरा सा ठहराव चाहिए , ज़्यादा नही पर एक - आध तो मुझको भी अर्ध विराम चाहिए , शरीर का क्या है वो त... Read more

हिसाब

आधा वक्त भूत को याद करके वर्तमान से भाग के भविष्य में सब पाने की कल्पना में बर्बाद करते , और बचे हुये थोड़े से वक्त में ज... Read more

लड़का/लड़की

उर्मिला अपनी डा० को दिखा ( एक - दो दिन में डिलीवरी की डेट थी ) पति और छोटी बेटी के साथ हॉस्पिटल से बाहर आई और रास्ते में कुछ ज़रूरी स... Read more

कैसे गाएँ गीत मल्हार ?

आज की दुनिया रही चीत्कार सब तरफ है मारम्म मार कैसे गाएँ गीत मल्हार ? आफत पड़ी है कैसी यार सब हो गया है बेकार कैसे गाएँ गीत मल्हा... Read more

जय है जय है जय है 🇮🇳 ( कारगिल विजय दिवस )

जय है वीर जवानों की जय है वीर जांबाज़ों की जय है वीर रणबाँकुरों की जय है वीरों के वीरों की जय है उनके हौसले की जय है उनके फैसले ... Read more

" सोशल मिडिया एक वरदान "

सोशल मिडिया कमाल है अपने आप में बवाल है नही इससे छिपा कोई भी सवाल है , जब सवाल नही सुलझते हैं सब आपस में उलझते हैं फिर देखो... Read more

" उम्मीद "

अम्माँ मुझे इसके साथ नही जाना " ये काली है " पाँच साल का छोटा भाई लगातार चिल्ला रहा था उसकी दो साल बड़ी बहन उसको देख रही थी लेकिन समझ... Read more

देवी हूँ मैं....

पति..... साहब बाहर से आते हैं जैसा घर छोड़ कर गये थे वैसा ही पाते हैं , एकदम साफ सुथरा हर चीज़ व्यवस्थित कहीं नही बिखरा एक भी कत... Read more

" तब गाँव हमें अपनाता है "

छुट्टियों में त्योहारों में गाँव जाते थे हम क्योंकि गाँव बसता था हमारे व्यवहारों में , हमारे गाँव जाने का एक मकसद होता था मन... Read more

" चालाकी "

ये ज़ाहिर मत होने दो की तुम परेशांं हो तुम्हारी इसी ना - ज़ाहिरी से वो खुद-ब-खुद मर जायेंगे , गर इसी तरह करते रहे तो देखना एक द... Read more

" योगा शिरोमणि "

बहन मेरी जिद्दी थी शरीर से पिद्दि थी , दर्शनशास्त्र में डाक्टर थी मेरे लिए प्राक्टर थी , दार्शनिक बन कर नही वो मानी उसने फिर यो... Read more

फिर कब मिलेंगे

ज़माने बीत गये हम दोस्तों को बिछड़े हुये जी भर कर एक दूसरे से लिपटे हुये , वो भी क्या दिन थे हर पल रंगीन थे कभी नही रहते हम एक ... Read more

" शब्दों से सफाई "

श्वेतांक का पूरा घर कामवाली बाइयों के भरोसे ही चलता पत्नी किसी कंपनी में बड़े ओहदे पर आसीन और पैसों के दंभ में चूर...घर के काम से को... Read more

काशी - बनारस - वाराणसी....मेरी नज़र से...

काशी - बनारस - वाराणसी कुछ भी कह लो.......कभी इसको पृथ्वी से अलग माना गया कभी पृथ्वी की जान जो भी है सबके दिलों में बसता है बनारस ..... Read more

अपना घर

बचपन में हर लड़की से कहा जाता... अपने घर जाना तो ऐसा करना अपने घर जाना तो वैसा करना , माँ के घर से अपने घर आ गये अपने इस घर में ग... Read more

प्रारंभ से भय

समाज की रूढ़ीवादी मान्यताएं तीरों सी चुभती हैं फिर भी रोकर - चिल्लाकर - छटपटाकर सहते हैं क्योंकि हमें भी यही मान्यताएं बचपन में घ... Read more

बुरी सोच

यहाँ पर एक दूसरे को गिराने का रिवाज है जी हाँ यही हमारा वर्षों का राज़ है , कोई मरहम नही लगाता चोट पर अब इस पर नमक छिड़कने को त... Read more

राज़

ये लोग तुम्हें चीर - फाड़ - नोच कर रख देगें फिर पूछेगें हाल तुम्हारा क्योंकि इन्हें पता है पहले तो तुम थे अच्छे अब कहोगे अपना हा... Read more

बैकबोन ( संस्कार )

अजीब सा ..... सिलने लगा है ये शहर सिलने से सड़ने लगे हैं हाथ - पैर गलने लगी है रीढ़ की हड्डी , अगर धूप ना निकली सीलन इसी तरह बढ़ी ... Read more

काशी - बनारस - वाराणसी

काशी - बनारस - वाराणसी कुछ भी कह लो.......कभी इसको पृथ्वी से अलग माना गया कभी पृथ्वी की जान जो भी है सबके दिलों में बसता है बनारस ..... Read more

आपत्ति

पता नही क्यों इस वातावरण में साँस रूक - रूक कर चलती है , लेकिन आश्चर्य है इस पर भी लोगों को आपत्ति है । स्वरचित एवं मौ... Read more

चिंता

मेरे रोने से ज़मीन फटती है रोने से आसमान समझ नही आता कहाँ से लाऊँ अपने लिए दूसरा जहान । स्वरचित एवं मौलिक ( ममता सिंह देवा... Read more

मानवता

अभी भी राजनीति से परे एक शब्द है बचा उसके रहते संस्कृति , देश और मानव हैं ज़िंदा अगर ये शब्द यहाँ से मिटा तो युगों - युगों की... Read more

विश्वास

लगता है खीज कर , उब कर , झुंझला कर भाग जाऊँ पर मेरा विश्वास मूझे रोक लेता है और कहता है अरे ! ये भागना कैसा ? यहीं लड़ो , जूंझ... Read more

हम

तुम्हारे असंख्य शब्द शब्दों को जोड़ कर कितने वाक्य वाक्यों के अर्थ अलग - अलग पर सार यही कि तुम - मैं अधूरे पूर्ण होगें तब तुम... Read more

दादी जी का जन्मदिन

ज़िन्दगी का ये पल हर किसी की तकदीर में नही , हमारी किस्मत कि उनकी आँखों से इतने सालों का सफर देखें तो सही , इस सफर में सुख ... Read more

" सीता के दुख का कारण "

कभी सोचा है....... सीता के रूप में मेरा व्यक्तित्व अनोखा था उसका दूसरा पहलू कभी किसी ने नही देखा था , मैंने एक ही पहलू को दिखाया ... Read more

बे अर्थ ज़बान

हम करते हैं आपकी इज्जत देते हैं मान - सम्मान आपके शहीद होने पर रोता है देश का हर इंसान , और आप कायदा - तरीका नज़ाकत - नफासत इस स... Read more

घायल आत्मसम्मान

ग्लानि - कुंठाओं से भरे सैकेंड , मिनट , घंटे , दिन , महीने साल दर साल रोज मुझसे पूछते यही सवाल क्या यही था तुम्हारा मान - अभि... Read more

तेरा आना ( मेरे बेटे का जनम )

तेरा आना..... सात जन्मों की खुशियों को दूनी से चौगुनी कर जाना , आना था शाकुंतल को आ गये तुम शरणम् , कैसे मैं भगवान का करूँ शु... Read more

चालाकी

ये ज़ाहिर मत होने दो की तुम परेशान हो तुम्हारी इसी ना - ज़ाहिरी से वो खुद-ब-खुद मर जायेंगे , गर इसी तरह करते रहे तो देखना एक दिन ... Read more

क्योंकि मै तो बस निक्कम्मी हूँ.....

क्योंकि मै तो बस निक्कम्मी हूँ..... बच्चों को अपने हाथों का बना खिलाती हूँ स्कूल से आने पर घर में ही मिल जाती हूँ सारे कपड़े एक ... Read more

घर/बाहर

यहाँ दस से पाँच नौकरी का दर्द नही तो क्या इसलिये छुट्टी का कोई अर्थ नही ? 8 घंटे की नौकरी का मर्म अलग है 24 घंटे की नौकरी फर्ज अल... Read more

आज की दुनिया

अजीब हाल है इस दुनिया का किस रास्ते पर जा रहे हैं लोग एक दूसरे को नीचे गिराते हुये ज़िंदा लाशों की सीढ़ी बनाते हुए उपर चढ़े जा रहें... Read more

महंगाई एक प्रश्न - चिन्ह

इस बेमुर्रव्वत महँगाई ने बिना बेमुर्रव्वत के तोड़ दी है कमर और अभी भी सुरसा के मुँह की तरह फैलती धन और बेबसी साथ - साथ निगलती ... Read more

करूपता के प्रति मापदंड

चेहरे की कुरुपता से नही लगा सकते हम किसी का मापदंड उपरी कुरुपता से कैसे पहचान सकते हम किसी का भीतरी हृदय - अंग ? चेहरे के विपरीत... Read more

मैं सच लिखने से क्यों डरूँ ?

जो बात कहने से भी डरते है सब वो बात सबने कही वो कहने से नही डरे तो मैं सच लिखने से क्यों डरूँ ? जो तिरस्कार दिया अपनों ने जिसक... Read more

अभिलाषा

हमें नही चाहिए ऐसी आजादी जहाँ हम घिनौने वातावरण में पड़े लगातार होते जा रहे हैं बड़े , हमें नही चाहिए ऐसी आजादी जहाँ अपना मजहब प... Read more

नारी

नारी तुम श्राप नही वरदान हो अपना ही नही सबका मान हो , खुद को पहचानों खुद को जानो , कोई भी सोच तुमको डरा नही सकती तुमको अपने... Read more

बदलती परिभाषा

कहते है राम " अनुकरणीय " हैं कृष्ण " चिंतनीय " हैं , क्योंकि इन्होने ...... दुष्टों के विनाश के लिए लिया अवतार समय को जिया... Read more

अनजान साधु की सच्ची भविष्यवाणी

संस्मरण सन् १९७०.....मेरी लगभग साढ़े चार साल की उम्र थी ( दो साल की उम्र से सारी याददाश्त ताज़ा है , माँ कहती हैं ऐसी याददाश्त ... Read more

आओ एक बार फिर

एक बार फिर से..... आओ वही पुराने होकर फिर से अपने इस बनारस में , तुम्हारे बिना सूना है हाॅस्टल का वो कमरा और ना भूलने वाला फैकल्... Read more

जन्मदिन भाइयों का

जन्मदिन मुबारक हो जियो हज़ारों साल आपस में हमेशा इसी छुटपन की तरह करो प्यार , इतना करो प्यार इतनी खाओ कसम बाद में चाह कर भी इ... Read more