सत्य का राही

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मुक्तक

चला हूं अपनी नहीं अपनों की तकदीर बदलने, बदल पाया नहीं कभी उनकी तकदीर बदलने । चुनीं राह जो उसने चला उसपर दुनिया बदलने , दुनिया कब... Read more

मुक्तक

चाहता हूं दौलत ज़हान से ज्यादा जान मेरी, मुझे पता है तूं मेरी होकर हो गई पराई जान मेरी । ख्याल रहता है सदा उसका अपने सिवा जान मेरी... Read more