Preety mohnani

जमशेदपुर,झारखंड

Joined August 2018

मैं प्रीति मोहनानी।अपनी कविताएं भारती विकास के नाम से लिखती हुं। क्योंकि यह मेरा जन्म नाम है। विवाह उपरांत मैं प्रीति विकास मोहनानी कहलाई।मेरी शिक्षा म.कॉम,एम. के साथ B. ed किया। मुझे लिखने के साथ -साथ पढ़ना,और बच्चों को पढ़ाना बहुत पसंद है।

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अपनी छत

आज फिर बेगानी छत छोड़, नए छत की तलाश है करना। सर की छत अपनी कहलाए, पूरा करना है ख्वाब सुनहरा। कई तरह की छते देख ली, अपनी... Read more

ख़त

आज माँ के साथ दीवाली की सफाई मे मैं हाथ बंटा रही थी | यकायक सफाई करते-करते एक छोटा बक्सा हाथ लगा। "माँ से पुछा,तो माँ हल्का मुस... Read more

माँ

माँ शब्द है जितना छोटा, भावनाओं की गहराइयों मे है मोटा। माँ की ममता का नहीं कोई मोल, उसके लिए उसके बच्चे अनमोल। माँ की छाया मे ... Read more

हैप्पी दीवाली

आया त्योहार दीपो का ,जगमग- जगमग हुआ ये जहान सारा। खुशियां बरसेंगी सबके द्वार,होगी आज मिठाइयों की बरसात। दीवाली है सुख-समृद्धि क... Read more

वक़्त और यादें

आज यूं ही बैठे -बैठे जैसे अतीत की यादों में खो गई थी "कुमोद" बस मोबाइल में टक-टकी लगाए इस डिजिटल की दुनियां में पोते-पोतियों का च... Read more

कागज़, कलम और मोबाईल

अभी तो ज़िन्दगी की शुरुवात ही हुई थी सिमरन के।लेकिन डिप्रेशन में आ गई थी।। आती भी कैसे नही इतनी छोटी उम्र में पति का देहांत। 2 माह का... Read more

उमंग

उमंग सा भरा बचपन तरंगों से भरा जीवन द्वेष नहीं कभी किसी मन घर आंगन में फुदकती रहती। चिड़िया जैसी चहकती रहती। हस्ती रहती हर पल म... Read more

बारिश

तपिश धरती की दूर भगाए,सबका मन ठण्डा कर जाए। कागज की कश्ती की याद दिलाए, गर्मी से आराम कराए। सोंधी-सोंधी ख़ुशबू मिट्टी की,मानो मिट... Read more

इश्क़

नज़र कि गुस्ताखियां तो देखो,हमारी बेकरारियाँ तो देखो चले जा रहे थे वो, हमारी एकटक खामोशियाँ तो देखो। तनिक मुड़कर भी देखा उसने,हमार... Read more

कृष्णजन्माष्टमी

तूफान मचा चारो ओर, लपेटे मे थी रात अंधियारी। कृष्ण ने जन्म लिया था तब,वसुदेव-देवकी की खुशी का नहीं कोई था अंत। इतने मे कंस का भय उ... Read more

प्रभु

प्रभु की शक्ति है अनन्त, आस्था भी है बेअन्त। विश्वास इन पर है अटूट, पत्थर को बनादे शक्ति रूप। चाहे हो कुरान या हो गीता,बाइबिल... Read more

उड़ान

पागलपन की हद तक सपनों को चाहना। कुछ नया कर दिखा,दिल यह कह रहा। क्षितिज तक उड़ान है भरना, सपनो को साकार है करना। चाहत ऊँची उड़ान ... Read more

15 अगस्त

15अगस्त1947 की अर्द्ध-रात्रि, जब भारत आज़ाद हुआ। मुर्गे की बांग नही, आज़ादी के जशन का बिगुल बजाया गया। जंजीरो को तोडा मातृभूमि की... Read more

सावन

हरियाली ने हमे बताया देखो देखो सावन आया चहु और हरियाली छाई मन को मुगध कराई। त्योहारों की शुरुवात हुई। सावन की फुवार हुई है। ... Read more

हवा

मैं हूँ हवा,कहूँगी मैं ये आज। बहुमूल्य हूँ मैं सृष्टि मैं सबसे। मुझ बिन जीवन नहीं किसीका। पांच तत्वों मैं एक मेरा भी है नाम। म... Read more

रंगों के रंग

रंगों के रूप तरह तरह के रंग बिछे हैं,अपने देश के अन्दर। देखना है यदी इनको,हमारे देश मे देखो आकर। रंग अलग है धर्म अलग है,अलग ह... Read more