Apr 18, 2019 · कविता
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Tic Toc Pe Shayri टिक टॉक पे शायरी

बे शर्मी और हया का जो पिक-पाक हो गया।।
एक्टिंग का जो नशा था वो खाक हो गया ।।
चेहरे उतर गए हैं उन लोगों की दोस्तों ,
जबसे ये बन्द देखो टिक – टाक हो गया ।।
✍️ शाह आलम हिंदुस्तानी

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Shah Alam Hindustani
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