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Romiyo

Rishikant Rao Shikhare

Rishikant Rao Shikhare

कविता

June 3, 2017

ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं,
तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक हैं,
वफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी,
हमें तो देखना है, तू बेवफ़ा कहा तक हैं….

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Author
Rishikant Rao Shikhare
चुराकर दिल मेरा वो बेखबर से बैठे हैं;मिलाते नहीं नज़र हमसे अब शर्मा कर बैठे हैं;देख कर हमको छुपा लेते हैं मुँह आँचल में अपना; अब घबरा रहे हैं कि वो क्या कर बैठे हैं
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