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*रहमत*
कदम तेरी चौखट पर जब सेरखा है आसमां से भी ऊंचा मेरा सर लगता है तेज आँधियाँ है, फिर भी मैं रोशनहूँ ये सिर्फ तेरी... Read more
हरियाली
बहिना बोली यूँ भैया से, ना झुमका, ना लाली ला l लाना ही चाहे तो केवल, ढेरों सी हरियाली ला l बहिना बोली ... l... Read more
कवि नहीं हूँ
लिखता हूँ पर कवि नहीं हूँ। दिखता हूँ पर सही नहीं हूँ। कुछ घाव गहरे लिए बैठा हूँ पर होंठों को में सिए बैठा हूँ।... Read more
तन्हाई
मेले लगे लग के चले गए लोग खेले खेल के चले गए वहीं रहे तो बस हम और हमारी तन्हाई।
आत्मकथा
न ये कविता है न ये कहानी है , ये सच्चाई है कुछ साल पुरानी है ,, मै कन्जूश हू , बहुत मक्खी चूस हू... Read more
जंग
जात-पात और भेदभाव से अब लड़ने की बारी है, उठो साथियो, आज़ादी की जंग अभी भी जारी है l जिस आज़ादी की खातिर, वीरों ने... Read more
ग़ज़ल :-- जुलमी तेरी निगाहें ख़ंज़र .....!!
ग़ज़ल :-- जुल्मी तेरी निगाहें !! गजलकार :-- अनुज तिवारी "इन्दवार " महफिल की भीड़ मे मेरा शिकार करती ! जुल्मी तेरी निगाहें खंजर सी... Read more
सोचकर देखो
युग बदल रहा है तुम भी जरा बदल कर देखो मोह-माया से दूर कहीं सीधे चलकर देखो ! वक्त का सुरुर बहुत कुछ है कहता... Read more