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खिला कण कण
खिला कण कण,पुष्प महके, भ्रमर बहके, आम्र बौर आये कोयल कूके,पलाश दहके, मलय समीर, रवि मुस्काये पीताम्बरी नवयौवना धरा, को करके आलिंगनबद्ध मदन मद मस्त... Read more
शारदे माँ
शारदे माँ सज रही तुम, आज वीणा बजाती संगीत में रमी तुम, हर तान है लुभाती तू ज्ञान का समुद्र,दो बूँद चाहती मैं झोली भरो... Read more
बो रहा कोई विष बीज
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ बो रहा कोई विद्रोही विष बीज, पनपने मत दो देशद्रोह, आतंक का तावीज़ पहनने मत दो जागो राष्ट्र प्रेमियों बुलंद अपनी वाणी करो दंभियों... Read more
प्रेम खुमारी
पावन सदा पुनीत मृदुल सा जहान हो सुरभित पवन,रंगीन प्रकृति रूपवान हो रिश्ते प्रगाढ़, प्रेम खुमारी बनी रहे कोई न हो गरीब सभी का मकान... Read more
बैठते न ठाले
समय सारा किया परिवार के हवाले लिखें कुछ कैसे कभी बैठते न ठाले। कभी चाय बनती, बनते परांठे थोड़े हलवा गाजर का, कभी बनते पकोड़े।... Read more
मात पिता
मात-पिता श्रद्धेय सदा, पूज्य ईश समान उनके इर्द-गिर्द बसे,अपना सकल जहान कलयुगी सुत कर रहे, अपमान उनका घोर करोगे जैसा भरोगे , लीजिये यह जान... Read more
मन चंचल
मन चंचल, अधीन हम,पल-पल में भटकाये कभी चढ़ाये पर्वत , कभी धरा पटकाये ज्ञान की डोरी से अंकुश लगा यदि बांधे तिनके प्रस्तर सम,जीवन संतुलित... Read more
रेखाओं  के खेल
लक्ष्मण रेखा तोड़कर सिया के उर थी पीर रेखाओं के खेल ये कौन बंधाता धीर कुछ हद तक बंधन भी उचित हुआ करते हैं आज... Read more
लिपटकर हम न साहिल  से कभी  रोये  यहाँ  यारो जिये   तूफ़ान  की  जद   में  हमें  आंधी ने पाला है
कहीं है चर्च गुरुद्वारा कहीं मस्जिद शिवाला है ख़ुदा को भी सभी ने कर यहाँ तक़सीम डाला है किसी ने आज देखा है मुझे तिरछी... Read more
भोला भाला रूप
भोला-भाला रूप बना कुछ साधू फैंके जाल कथा-कहानी सुनके जनता दंग,करते वो कमाल असलियत खुली, गुनाह सामने, उन्हें मिलती जेल अंधास्था, अन्धविश्वास कभी न करो,... Read more
तो याद करना
कोई दर्द, कोई चुभन जब हद से गुजर जाए,तो याद करना, जिन्दगी में कभी जरूरत पड़ जाए,तो याद करना। बिछड़ते वक्त के ये आखिरी, अल्फाज... Read more
बन्दरबांट
मित्रो, प्रस्तुत है मेरी एक पुरानी व्यंग्य रचना, शीर्षक है - 'बन्दरबांट l यह रचना कुछ वर्ष पूर्व 'अमर उजाला' में मेरे वास्तविक नाम (राजीव... Read more
सहिष्णु
pradeep kumar गीत Jul 15, 2016
एक मुक्तक। कल तक तो इन सबको देखो होती चिंता भारी थी। बात बात पर जीभ सभी की पैनी छुरी कटारी थी। आज सहिष्णु चुप... Read more
लूट
मुक्तक। राष्ट्रवाद का झंडा कुचला, नेताओं ने लातों में। जनता को ठेंगा दिखलाया, बस बातों ही बातों में। ख्वाब दिखाते रहे रात भर, भोली भाली... Read more
नवगीत
मुसाफिर ! देख समय की ओर मुसाफिर !देख समय की ओर .......... - गहरी नदिया दूर है जाना मुश्किल हैं दिल को समझाना लहरें करती... Read more
*गीतिका*
समन्दर प्यास कब किस की कभी देखो मिटाता है हमेशा प्यास तो पावन नदी का जल बुझाता है वफा के नाम पर मिटना उसे कब... Read more
जिस गली जिस शहर में चला सीखना , दर्द उसके मिटाने भी जाया करो
दूर रह कर हमेशा हुए फासले ,चाहें रिश्तें कितने क़रीबी क्यों ना हों कर लिए बहुत काम लेन देन के ,विन मतलब कभी तो जाया... Read more