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चलो दिवाली इस बार अलग मनाते हैं
आपको और आपके परिवार को दिवाली के पावन अवसर पर बहुत बहुत शुभकामनाएँ....... चलो दिवाली इस बार अलग मनाते हैं............. नाम शहीदों के चिराग जलाते... Read more
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ : जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट१२५)
मुक्तक --------- आओ मिलकर मनायें दीपावली । ज्योतिर्मयी दीप-- मालाएँ हों ! मात-- पिता ,भाई- बहनों के संग, सँग बच्चे, सँग बालाएँ हों ! आओ... Read more
यज्ञ के लिए भी पंच गव्य जो प्रदान करें:- जितेंद्र कमल आनंद ( पोस्ट१२४)
घनाक्षरी ::: गौ माता ----------------------- यज्ञ के लिए भी पंच गव्य जो प्रदान करें , उन दुग्ध,-- दायिनी की शुचि दुग्ध धार हैं ! मन... Read more
सुरभि,सुभद्रा,नन्दा,बहुला,सुशीला :: जितेंद्रकमलआनंद (१२३)
घनाक्षरी :: गौ माता ----------------------- सुरभि, सुभद्रा,नन्दा,बहुला,सुशीला गायें-- क्षीर- सिंधु-- मंथन से लिए| अवतार| है । जो हैं चन्द्र, रवि और इन्द्र की भी इष्ट... Read more
अदा सा कुछ
इस दिल में हे पुकार सा कुछ बस प्यार की गुहार सा कुछ बहते हे ज़रण पर्बतों से निकल ज़ज़्बा हे उठती जुवार सा कुछ... Read more
गीतिका  /गजल
परीक्षा जिन्दगी की, हल को बारम्बार पढ़ लेना अनूठी जिन्दगी है यह, सही आधार पढ़ लेना |१ कभी ऊपर कभी नीचे, कभी चलती समानांतर बिना... Read more
जो दे रहे थे कल स्वदेशी अपनाने की सलाह खुलकर
जो दे रहे थे कल स्वदेशी अपनाने की सलाह खुलकर, चाइनीज लड़ियाँ सजाई उन्होंने सब बातों को भूलकर। दूसरों को दे रहे थे बड़े बड़े... Read more
औलाद
औलाद —————————————— माँ का हूँ मैं औलाद, मिल रहा है मुझको आशीर्वाद, उनके आशीर्वाद हो रहा हूँ आबाद, और नहीं हो सकता हूँ मैं कभी... Read more
कविता - जलायें दिये पर रहे ध्यान इतना
जलायें दिये पर रहे ध्यान इतना , हरकोई मिट्टी वाले दीपक जलाये । भगाये अंधेरा सम्पूर्ण धरा का , मगर दिलों में अंधेरा रहने न... Read more
मै बेअदब हूँ
Kapil Kumar शेर Oct 28, 2016
मै हूँ बेअदब मगर अदब मे रहता हूँ बाते करता हूँ, मगर हद मे रहता हूँ *************************** कपिल कुमार 27/10/2016
मै इन्तजार में हूँ
Kapil Kumar शेर Oct 28, 2016
अब ये मेरी उसकी मुहब्बत की आजमाइश है मै इंतजार मे हूँ उसकी न लौटने की ख्वाइश है ********************************** कपिल कुमार 28/10/2016
परहितार्थ हम जैसा करते सत्य उसी को:-- जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट१२२)
कविता ----------+ परहितार्थ हम जैसा करते , सत्य उसी को कहा है जाता । धर्म| बहॉ पर| नहीं ,जहॉ पर| -- सत्य| नहीं होता उद्... Read more
ऐली
“ऐली” उस दिन इंटेरनेट पर एक दूसरे को सूचित कर सब पुराने सहपाठी दिल्ली यूनिवर्सिटी में एकत्र होने वाले थे । धीरेन्द्र तयशुदा स्थान पर... Read more
दीपावली
लो आई फिर दीपावली चलो ,इस बार मन के किसी कोने में दीप जलाएं इक शांति का , प्रीती का , स्नेह का फिर इस... Read more
चुप्‍पी तोड़ें
चुप्‍पी तोड़ें आतंकियों का धर्म नहीं होता, आईये इनके विरूद्ध आवाज उठायें, हमारी चुप्‍पी नासूर बन गई है, आएं चुप्‍पी तोड़ें देश हित में कुछ... Read more