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अशोक दर्द की कविताएँ
अग्निगीत तुम लिखो उनके खिलाफ अग्निगीत जिन्हें देश को गलियाँ बकने के बदले जनता की गाढ़ी कमाई की बरियानी खिलाई जाती है देश तोड़ने की... Read more
ग़ज़ल
_________________ मेरा दिल मेरा आईना तो दिखा दे घने सन्नाटे में आवाज़ लगा तो दे ----------------- बात ये नहीं कि कौंन कैसा है यहाँ मैं... Read more
कविता : स्वदेशी
स्वदेशी अपनाओ अगर विदेशी से अच्छा है। संज्ञा नहीं कार्य ही स्वेच्छा की एक सुरक्षा है। पहले तोलो फिर बोलो नीति कितनी सही है। दूध... Read more
अस्तित्व
" अस्तित्व " कौन समझता है नारी को ? बस आदर्श बना डाला है नारी को। अपना जीवन औरों पर न्यौछावर करती है नारी ।... Read more
बदलाव
बदलाव किसी के दूर जाने से जिंदगी के मायने क्यूँ बदल जाते हैं? राह भी वही, मंजिल भी वही, बस हमराह ही क्यूँ बदल जाते... Read more
दोहा मुक्तक
दो दोहा मुक्तक दो दोहा मुक्तक: ००० 1. ठिठुरन बढ़ती जा रही,कलम लिखे अब आग। तभी ताप समुचित मिले,उठा कलम अब जाग। चुनौतियों से डर... Read more
ग़ज़ल
ग़ज़ल अंतर्ध्वनि : अभी सृजित ताज़ी गीतिका: 000 ख़ुशी देख मेरी, वे सब जल रहे हैं. फँसे जाल में वे ,हम यूँ खल रहे हैं.... Read more
टुकड़े तेरे आइने के
Kapil Kumar शेर Dec 17, 2016
टुकड़े तेरे आइने के भी रखे हैं संभाल कर नजर आये तेरी सूरत शायद हो करम हमपे ********************************* कपिल कुमार 16/12/2016
निर्भया
तारीफ़ क्या करूँ, क्या कहूँ मैं तुम्हे निर्भया, मन पर बोझ,माथे पर कलंक, दरिंदगी का लहराता ये परचम, क्या लिखूं,किसकी करू मैं निंदा वो डूबे... Read more
सपनों की गठरी
खुद को मैं खुद में खोज रहा हूँ आजकल मालूम हुआ कि मुझमें मैं बाकी हूँ अभी..... बैठकर अकेला सोचता हूँ अतीत को... और बह... Read more
वो 500 का नोट
मिस्टर मेहता 500 व 1000 रुपयों की गड्डी लेकर बैंक की लाइन में खड़े थे। नवंबर 2016 की रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी... Read more
निर्भया
16 दिसंबर की ही वो सर्द रात जब एक लड़की के साथ अमानवीय खेल खेला गया था। परंतु ये वहशी खेल आज भी जारी है।... Read more
??चिरागे-मुहब्बत जलाकर देखिए??
हाथ से हाथ ज़रा मिलाकर देखिए। इंसानियत का गुल खिलाकर देखिए।। ज़िन्दगी किस तरह से संवरती है। चिरागे-मुहब्बत यार जलाकर देखिए।। परहित को दिल में... Read more