कवितागज़ल/गीतिकामुक्तकगीतलेखदोहेलघु कथाशेरकहानीकुण्डलियाहाइकुबाल कविताघनाक्षरीतेवरीकव्वाली

मेरी P R O

डॉक्टर साहब मैं आपका बहुत एडवरटाइज करती हूं , जिस दिन आपको दिखाने आना होता है मैं सुबह से उठ कर पूरे मुहल्ले में ज़ोर ज़ोर से आप का... Read more

जग के दोहे -५

【४१८-४२४】 लेकर जब प्रभु नाम से, दिन की हो शुरुआत । दूर होते विघ्न सभी, बन जाती हर बात ।। मन के भीतर ही बसे, मंद... Read more

हिन्दी

हिन्दी -------- यह कैसी विडंबना है कि हमनें हिन्दी को अपनी ही भाषा को उपेक्षित कर रखा है, हमें शर्म भी नहीं आती कि हमें हिन्... Read more

कहाँ हैं

मेरे अपने गाँव कहाँ हैं पीपल वट की छाँव कहाँ हैं कैसा आया तूफ़ां जगत में कोई बताये वह पाँव कहाँ ह... Read more

Me!

शीशे में स्वयं के अक्ष को देखते हुए मैंने बालों के गुच्छें सफेद बालों की एक छिपी क्यारी को पाया।मैं स्वयं को शीशे के करीब ले जाता गय... Read more

दो कदम

जरा ठहर दो कदम मेरे साथी कभी तो कोई कारवां हमसे बनेगा आज संग कोई नहीं यह मालूम है कभी तो कोई जहाँ हमसे खिलेगा मुरझा... Read more

बेटी की विदा

🌺 विदा - गीत🌺 छोड़ आपका आंगन बाबुल, ये लाडली तेरी चली। जा रही देख तेरी बिटिया, वो नाज से जो थी पली।। भूल क्या हुई माता मुझसे, त्... Read more

मुस्कान

मुस्कान *********** मुस्कराइये कि आप बड़े शर्मसार हैं, आदत से लाचार हैं, या फिर आपकी मुस्कराहट पर कर्फ्यू लगा है, या फिर मुस्क... Read more

अब कहां चैन पड़ता है

अब कहां चैन पड़ता है अब कहां आराम है महबूब से जुदा होके जीना कितना मुश्किल काम है बेकरार से दिन रहते हैं बे सुकून सी तमा... Read more

शेर

हम अपनी खुशियां जिसपे कुर्बान किए जाते हैं वो अपने गम का इल्ज़ाम हमको दिए जाते हैं हम ये सोच के करते रहे उस बेवफा के साथ वफा ... Read more

आंसू

विधा-मुक्तक खुशी में भी आंसू निकल जाते हैं दुःख में तो और भी पिघल जाते हैं जी भर के रो लिया करो कभी- कभी रोने से मन मौसम बदल ज... Read more

घटा

विषय-घटा /बदली विधा-चौपाई ये भुरी,काली ,सफेद घटा मन को लुभाने वाली छटा शीतल हवाएं साथ लायीं कोयल,पपीहा साथ गायीं। ठण्डी- ठ... Read more

अस्तित्व बचाइए

अस्तित्व बचाइए ◆◆◆◆◆◆◆◆ जल,जंगल और जमीन ये प्रकृति का उपहार है, पर्यावरण का ही नहीं हर प्राणी का जीवन आधार है। इसका संरक्षण, ... Read more

वृक्ष

वृक्ष का धर्म क्या है जहां कहीं खड़ा हो वहीं से शीतलता व उन्नत पुष्प तथा फल प्रदान करे वो कभी दूसरे की निंदा नहीं करते और ना ही ईष्य... Read more

वीर सेनानी - मुक्तक

(१)तिरंगा हाथ में लेकर, चले हैं वीर सेनानी। दमन शत्रु का करने की, जिगर में बात है ठानी। फौलादी इरादे हैं, इन्हें क्या रोक पाओगे,... Read more

-- कितना मुकुर जाते हैं --

लिख दिआ सो लिख दिआ लिखा हुआ कभी मिटता नहीं मुंह के बोल जो कभी रूकते नहीं लिखा हुआ कभी कहीं भागता नहीं मुख से कहने से लोगो... Read more

विहग

विहग (पक्षी ) उड़ान भरूं विहग सी मैं मतवाली,चंचल खो जाऊँ विस्तृत नभ के सिंदूरी अंचल मेघों का आभास,सतरंगी धनक निहारूँ बूंदो... Read more

-- वाह डाक्टर साहब --

कुछ दिन पहले पत्नी जी को हो गया बुखार बोली जल्दी ले चलो अब डाक्टर साहब के द्वार बैठा के अपनी गाडी पर चल दिआ मैं उनके दरब... Read more

--अपना पैसा मांग कर देखो --

इज्जत, मान, मर्यादा का अब जमाना नहीं रहा अपनी जेब तक का दोस्तों अब खजाना बी अपना नहीं रहा देकर किसी को देखो फिर जरा मांग... Read more

समझदारी!

समझदार होने में खोया , मैंने अपना प्यारा बचपन समझदार जो समझा खुद को , खो दिया अपना भावुक मन जिम्मेदारियों की चादर ओढ़ी बड़ा कर ... Read more

किसान का बोया सोना है

किसान का बोया उस के लिए सोना है, फिर भी तमाम उम्र बस उस को रोना है ।। #हनीफ़_शिकोहाबादी Read more

ये बेचारी ग़म दुनियाँ

दुनियाँ चेलैंज देती है हमको और हम दुनियाँ जाने ना अब हमें, तो है ये बेचारी ग़म दुनियाँ दुनियाँ निकालेगी चाहेगी गिन- गिन कमियाँ ... Read more

--वो तस्वीर तेरी --

देख कर इस तस्वीर को मदहोशी सी आने लगी इन आँखों से आपने क्या कहा धड़कन है बताने लगी खोल कर जुल्फोन को जो आपने अंदाज बयान क... Read more

-- प्रेम की भाषा --

अपना बनाने के लिए काफी है मिठास का होना प्रेम को जताने के लिए इश्क में सब लुटाने के लिए प्रेम की भाषा का होना बहुत जरुरी ह... Read more

कातिलों के गलियारे

कातिलों के गलियारों में मैंने आज बसेरा तो यों अपना जमा ही दिया न जाने यहाँ बसने से पहले ही मुझे कितनों ... Read more

*माँ बाप का साया जब सर से उठ जाता है*

कौन कहता है माँ बाप भगवान नहीं ! बच्चे के लिए भगवान से कम भी नहीं !! माँ बाप का साया जब सर से उठ जाता है ! हर अपना कहने वाला ग़ै... Read more

संबंध

संबंध और संबंधों का निर्वाह महज इतना कि संबंध दिखाई दे शायद इससे अधिक कुछ नहीं।किसी को याद तब ही किया जाता है जब ज़रूरत है एक अंतराल... Read more

चुपके चुपके कोने में

दाम लग रहे मेरे सुन लो ओने पौने में क्यों सौदे मेरे हो रहे हैं चुपके चुपके कोने में काबिल में इस कदर हो गया क्या मुझे मा... Read more

साथी

साथी १.जो साथ दे वो साथी फ़रहात दे वो साथी ठोकर लगे,गिर जाऊँ तो हाथ दे वो साथी २.कुछ पल नहीं ,पूरी हयात साथी मेरे,न... Read more

अब पथ के कांटे बड़े हो चले हैं

अब पथ के कांटे बड़े हो चले हैं तनिक रुको जरा सम्भल जाऊँ माँ बापू की विलक्षण बातों की जरा रुको कसकर गाँठ लगाऊँ पथ... Read more

शोर नदियों का

शोर इन नदियों का यादें उन सदियों की बूंद इन बन्दिशों की तन छूती चुभनों सी गर्मी में कामातुर नीर सर्दी में कहिल ... Read more

जिंदगी आजकल थोड़ा

जिंदगी आजकल थोड़ा नाजुक बन गयी है थोड़ा संभल कर चलो यही बात कविता में लिखता हूँ सावधानी बरतो समझो भरोसा रखो ऐ दोस्त! धैर्य र... Read more

हिमालय के ह्रदय की पीड़

हिमालय के ह्रदय की पीड़ पर मैं कभी न कहीं हिम संग फिसल जाऊँ। मैं कभी न खुद को कहीं यों विफल पाऊं।। मेरे ह्रदय की पीड़ को त... Read more

खोज में लग जा

दाना दाना ही तो यहाँ कमाना फिर दाने की खोज में लग जा मिट्टी से मानव तो बन गया तू फिर मिट्टी की शोध में लग जा कोसों कोस... Read more

मत पूछिए

मत पूछिए कि आजकल क्या क्या होता है बन्दूक किसी की तो कंधा किसी का होता है ज़रा बच के निकलना यहां की गलियों से सामने से ही नही... Read more

हर बात में राजनीति अच्छी नहीं होती

हर बात में राजनीति, अच्छी नहीं होती लगी है तीसरी आंख, जनता यूंही ही नहीं सोती कब तक बरगलाओगे, क्या आंखों की शरम खो दी बरसों बर... Read more

कोविड में भीख

रोटी खाओगे?वाक्य सुनते ही जैसे वो निढ़ाल हो गया।आंखे खिल गयी होठ फैलने लगे।आज तो पेट भर गया पर कल?ये सोचकर उसने अपना सिर पकड़ लिया।अ... Read more

दोस्ती

कभी-कभी ख़्याल आता है कि ज़िन्दगी इतनी छोटी कैसे हो सकती है ये इल्म कुछ वर्ष पहले ही हुआ जब किताबों से मित्रता हुई।हर तरफ बस किताबों... Read more

चांद

आज फिर चांद बदल गया अभी शाम ही को देखा था धूल से भरा मटमैला रेंगता मेरे घर की ओर लगा यूं कि बड़ा खिन्न था बदरंग सा दिशाहीन ... Read more

पहली भूख है रोटी की, दुनिया में हर इंसान की

पहली भूख है रोटी की, दुनिया में हर इंसान की रोटी मिल जाने पर दूजी भूख है, मान सम्मान की तीजी भूख आती है जग में, कपड़ा और मकान की... Read more

जीवन संघर्ष

हर रोज जीते हैं नई आशा का घूँट हर शुबह पीते हैं । जीतने की आशा बलबती होती है भाग्य की सूली पर कर्म प्रतिफल देती है । हार... Read more

जला या बुझा दो वफ़ा कर चले

विदाकर तुम्हें हम दुआ कर चले तुम्हारे लिये रास्ता कर चले तुम्हारी हैं ख़ुशियाँ बधाई तुम्हें लो दामन भी अपना लुटा कर चले दि... Read more

आज़ाद गज़ल

मौत का मज़ा तो चखना पड़ेगा कर्म का फल तो भुगतना पड़ेगा । तोड़ना गर है दुनियाँ के रस्मो को जिगर फौलाद का रखना पड़ेगा । चाहते है... Read more

आज़ाद गज़ल

मौत का मज़ा तो चखना पड़ेगा कर्म का फल तो भुगतना पड़ेगा । तोड़ना गर है दुनियाँ के रस्मो को जिगर फौलाद का रखना पड़ेगा । चाहते हैं... Read more

इंसान बनाना कभी

जिस्म का खून अपने बढ़ाना कभी आप भी दिल हमारा दुखाना कभी आप हिन्दू ओ मुस्लिम बना ही चुके अब ज़माने को' इंसान बनाना कभी आस है ... Read more

कुछ...

कुछ दरारे आज भी मौजूद हैं मुझ में.. अभी तक कोई भी उनको भर ना पाया... हाँ कोशिश की हैं बह... Read more

कहाँ खो गया बचपन मेरा

कहाँ खो गया बचपन मेरा, खुशियों का वो सुंदर डेरा, आँगन में चिड़ियों का पहरा, जन जन से रिश्ता वो गहरा, सुबह सुबह की प्यारी धूप... Read more

मासूम बेटियाँ

********* मासूम बेटियाँ ******** **************************** फूल सी नाजुक मासूम होती हैं बेटियाँ कायनात पर नियामत होती है बेट... Read more

बचे रहेंगे किसान, तभी तो होगा नफा-नुकसान..

सामयिक लेख: कृषि विधेयक सुशील कुमार 'नवीन' पिछले एक पखवाड़े से देशभर में किसान और सरकार आमने-सामने हैं। मामला नये कृषि विधेयकों क... Read more

अभिलाषा

अभिलाषा ●●●●●● मैं माँ के गर्भ में मरना नहीं चाहती मैं भी जन्म लेना चाहती हूँ, दुनियाँ देखना चाहती हूँ, खुली हवा में साँस लेन... Read more