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खिन्नता
........खिन्नता...... .......... तुम खिन्न हो मानते नहीं तुम समझते पर जानते नहीं इस समाजिक संरचना से टूटते रीश्तों की याचना से टूटते संयम उसकी प्रकाष्ठा... Read more
पिता!!!!!!
*पिता!!!!!!* जमीं वितान मौन है ,पिता समान कौन है। शिवा सरूप बाप है,सकाल काल गौन है।। दिया अतीव प्यार तो,लिया जरा दिया नहीं। सदैव थाम... Read more
वेदना
कभी सर्द हवा बनकर मुझको गले लगाती हो. जब शाम होती है तो ख्वाबों में आ जाती हो. कड़ी धूप में भी पागल सा भटका... Read more
जायरा वसीम...सुन प्रीतम की बात
सुन प्रीतम की बात ..जायरा वसीम ****************************** जायरा वसीम से की,जिसने बदसलूकी। इंसानियत से खेली,दुष्ट ने चालाकी।। दुष्ट ने चालाकी,सज़ा का हकदार हुआ। जेल दिखाए... Read more
"दोहा" विषय आज का मनचला, खेल खेल में खेल कहीं रातरानी खिली, कहीं खिली है वेल।।-1 सुंदर हैं तारे सभी, नभ प्रकाश सम आप मंच... Read more
“दोहा-मुक्तक”
“दोहा-मुक्तक” घर की शोभा आप हैं, बाहर में बहुमान भवन सदन सुंदर लगे, जिह्वा मीठे गान धाम धाम में वास हो, सद आचरण निवास भक्ती... Read more
“कुंडलिया”
“कुंडलिया” अपनी गति सूरज चला, मानव अपनी राह ढ़लता दिन हर रोज है, शाम पथिक की चाह शाम पथिक की चाह, अनेकों दृश्य झलकते दिनकर... Read more
“हाइकु”
“हाइकु” कल की बात आस विश्वास घात ये मुलाक़ात॥-1 दिखा तमाशा मन की अभिलाषा कड़वी भाषा॥-2 दुर्बल काया मनषा मन माया दुख सवाया॥-3 मान सम्मान... Read more
"गीतिका" चलो दशहरा पर्व मनाए. प्रति वर्ष यह आता है दे जाता है नई उमंगे, रावण को मरवाता है हम भी मेले में खो जाएँ,... Read more
“क़ता”
“क़ता” हम भी आ नहीं पाए तिरे खिलते बहार में तुम भी तो नहीं आए मिरे फलते गुबार में इक पल को ठहर जाते कभी... Read more
Mahatam Mishra लेख Dec 11, 2017
"धूमिल पहचान" बहुत सौभाग्यशाली हूँ कि जन्मभूमि का दर्शन हुआ, रामायण का सम्पूर्ण पाठ, सत्यनारायण भगवान का कथा पूजन, हवन ब्राह्मण व वंधु वांधव का... Read more
"मुक्तक" नाच रही परियों की टोली, शरद पूनम की रात है। रंग विरंगे परिधानों में, सुंदर सी बारात है। मन करता है मैं भी नाचूँ,... Read more
"चौपाई, अद्भुत रस" बाल्मीकि के आश्रम आई, अनुज लखन सिय साथ निभाई माँ सीता पर आँख उठाई, कोशल की चरचा प्रभुताई ।।-1 ऋषी महामुनि अचरज... Read more
“दोहा मुक्तक”
“दोहा मुक्तक” भूषण आभूषण खिले खिल रहे अलंकार। गहना इज्जत आबरू विभूषित संस्कार। यदा कदा दिखती प्रभा मर्यादा सम्मान- हरी घास उगती धरा पुष्पित हरशृंगार॥-1... Read more
“दोहा मुक्तक”
“दोहा मुक्तक” यह तो प्रति हुंकार है, नव दिन का संग्राम। रावण को मूर्छा हुई, मेघनाथ सुर धाम। मंदोदरी महान थी, किया अहं आगाह- कुंभकर्ण... Read more
"गीतिका" आया शुभ त्योहार, दशहरा खास रहे कटकुटिया की रात, गोबर्धन वास रहे जगमग है दिवाली, अवली दियों की हैं भैया दूज सुहाय, बहन मन... Read more
"गीतिका" आया शुभ त्योहार दशहरा खास रहे कटकुटिया की रात गोबर्धन वास रहे जगमग है दिवाली अवली दियों की हैं भैया दूज सुहाय बहन मन... Read more
“गज़ल”
“गज़ल” गर दरख़्त न होते तो कदम चल निकल जाते यह मंजिल न होती तो सनम हम फिसल जाते तुम ही कभी जमाने को जता... Read more