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II हौसला,इंसान से मशीन II

संजय सिंह

संजय सिंह "सलिल"

कविता

February 13, 2017

वक्त का अपना कोई आकार नहीं होता ,
सुना है ईश्वर भी साकार नहीं होता l
वक्त पर काम, इंसान मशीन नहीं है,
मशीन से कोई सपना, साकार नहीं होता ll

तुम चाहो तो वक्त बदल सकते हो ,
अपनी तकदीर अपने हाथों लिख सकते होl
इंसान को वक्त के सांचे में मत ढालो ,
इंसान बनाता है वक्त ,वक्त से इंसान नहीं होता ll
————————————–
कौन कहता है कि ,पर्वत नहीं हिलते ,
तूफान के समुंदर में रास्ते नहीं मिलते l
इरादा करो पक्का, उठा कर दो कदम देखो,
धारा तो क्या समंदर पर भी चल सकते हो ll

समय तुम्हारा है तुम्हारे साथ चलना है ,
इसे तुम्हारे ही सांचे में ढलना है l
करो हौसला देखो झुकेंगे चांद तारे भी,
बहती दरिया का भी रुख बदल सकते हो ll

संजय सिंह “सलिल”
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश l

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Author
संजय सिंह
मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच... Read more

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