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II…हदों को पार करना भी….II

संजय सिंह

संजय सिंह "सलिल"

गज़ल/गीतिका

February 27, 2017

जरुरी है मोहब्बत में हदों को पार करना भीl
अकीदत में झुका हो सिर जरूरत वार करना भी ll

कई टूटे कई बिखरे कई आबाद भी लेकिन l
सभी को है पड़ा चलना ए दरिया पार करना भीll

जुबान की होती है सीमा इशारों की भी भाषा हैl
होती आंखों से भी बातें मगर इजहार करना भी ll

अगर कुछ भी न हो मुमकिन तो भेजो कोरा कागज ही l
लिफाफे पर कहीं कोने में कुछ उद्गगIर करना भी ll

चलें राहे सभी सीधी मगर है चाल कुछ टेढ़ीl
यहां इनकार में भी हां कभी इकरार करना भीll

ए दुनिया पाठशाला है ‘सलिल’ कुछ ठेकेदारों कीl
सिखाती नफरते भी ए मगर तुम प्यार करना भीll

संजय सिंह ‘सलिल’
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश ll

Author
संजय सिंह
मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच... Read more
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