गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

II…हदों को पार करना भी….II

जरुरी है मोहब्बत में हदों को पार करना भीl
अकीदत में झुका हो सिर जरूरत वार करना भी ll

कई टूटे कई बिखरे कई आबाद भी लेकिन l
सभी को है पड़ा चलना ए दरिया पार करना भीll

जुबान की होती है सीमा इशारों की भी भाषा हैl
होती आंखों से भी बातें मगर इजहार करना भी ll

अगर कुछ भी न हो मुमकिन तो भेजो कोरा कागज ही l
लिफाफे पर कहीं कोने में कुछ उद्गगIर करना भी ll

चलें राहे सभी सीधी मगर है चाल कुछ टेढ़ीl
यहां इनकार में भी हां कभी इकरार करना भीll

ए दुनिया पाठशाला है ‘सलिल’ कुछ ठेकेदारों कीl
सिखाती नफरते भी ए मगर तुम प्यार करना भीll

संजय सिंह ‘सलिल’
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश ll

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