गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

II शायरी II

भेद दिल के सब बताती शायरी l
दो दिलों को पास लाती शायरी ll

बात जो बनती नहीं तकरीर से l
चंद लफ़्ज़ों में सुनाती शायरी ll

आदमी जब जिंदगी से हारता l
खुद खुशी से फिर बचाती शायरी ll

हम सफर यह है अधूरा प्यार भी l
गिर के उठना भी सिखाती शायरी ll

कल मेरी तकदीर थी अब बेवफा l
साथ अब तक है निभाती शायरी ll

हैं बड़े टेढ़े से रास्ते इस गली l
राहत सीधी ही दिखाती शायरी ll

लोग भूले मैं ना भूला आज भी l
अक्श तेरा ही दिखाती शायरी ll

है “सलिल” मुश्किल बड़ा ही भूलना l
रात को भी दिन कराती शायरी ll

संजय सिंह “सलिल”
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश ll

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सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर…
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